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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि उनका खुद सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने का फैसला है। ममता बनर्जी भारत की पहली ऐसी मौजूदा मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने स्वयं सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका पर बहस की। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ममता बनर्जी कितनी पढ़ी-लिखी हैं? (Photo Source: ANI)
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साधारण परिवार से राजनीति तक का सफर
ममता बनर्जी का जन्म कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में एक बंगाली हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ। उनके पिता प्रमिलेश्वर बनर्जी और मां गायत्री देवी थीं। ममता बनर्जी के जीवन में संघर्ष बहुत कम उम्र से ही शुरू हो गया था। जब वह सिर्फ 17 साल की थीं, तब इलाज के अभाव में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी काफी हद तक उनके कंधों पर आ गई। (Photo Source: PTI) -
ममता बनर्जी की शिक्षा (Educational Qualification)
ममता बनर्जी की शैक्षणिक यात्रा काफी प्रभावशाली रही है। 1970 में उन्होंने देशबंधु शिशु शिक्षालय से हायर सेकेंडरी परीक्षा पास की। फिर उसके बाद उन्होंने जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में स्नातक (BA) की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री (MA) प्राप्त की। (Photo Source: ANI) -
वहीं, श्री शिक्षायतन कॉलेज से बीएड (शिक्षा में डिग्री) की। यही नहीं, इसके बाद फिर उन्होंने जोगेश चंद्र चौधुरी लॉ कॉलेज, कोलकाता से एलएलबी (कानून की डिग्री) हासिल की। यानी ममता बनर्जी न सिर्फ राजनीति में, बल्कि इतिहास, शिक्षा और कानून, तीनों क्षेत्रों में औपचारिक रूप से प्रशिक्षित हैं। (Photo Source: PTI)
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सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी पैरवी की
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल में की जा रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुनवाई चल रही है। ममता बनर्जी ने इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। (Photo Source: PTI) -
उनका आरोप है कि सत्यापन के नाम पर नाम की स्पेलिंग में गलती, नाम में मामूली बदलाव, और दस्तावेजों की कमी जैसे कारणों से वास्तविक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर मताधिकार प्रभावित होगा। (Photo Source: ANI)
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2026 विधानसभा चुनाव को लेकर चिंता
मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव 2025 की मौजूदा वोटर लिस्ट के आधार पर कराए जाएं, ताकि लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रह सकें। उनका कहना है कि SIR प्रक्रिया से चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। (Photo Source: ANI) -
देशभर में छिड़ी बहस
यह मामला सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। इससे जुड़े सवाल वोटर अधिकार, निष्पक्ष चुनाव, और चुनाव आयोग की भूमिका पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं। तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं ने भी इसी मुद्दे पर याचिकाएं दाखिल की हैं, जिनकी सुनवाई एक साथ हो रही है। (Photo Source: PTI) -
क्यों खास है ममता बनर्जी का यह कदम?
एक मुख्यमंत्री का खुद सुप्रीम कोर्ट में खड़े होकर संवैधानिक मुद्दे पर बहस करना भारतीय राजनीति में असाधारण घटना मानी जा रही है। इससे ममता बनर्जी की कानूनी समझ, आत्मविश्वास और राजनीतिक आक्रामकता, तीनों सामने आती हैं। (Photo Source: PTI)
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