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हर क्रांति की अपनी एक आवाज होती है। लेकिन इतिहास के सबसे साहसी प्रतिरोध हमेशा नारों या भाषणों में नहीं गूंजे, कभी-कभी वे पैरों की थाप में भी दर्ज हुए। ये सिर्फ कला नहीं थे, बल्कि प्रतिरोध, पहचान और आजादी की भाषा थे। आइए जानते हैं ऐसे सात नृत्यों की कहानी, जो मंच पर नहीं, संघर्ष की जमीन पर पैदा हुए। (Photo Source: Pexels)
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हिप-हॉप (ब्रॉन्क्स, 1970s)
1970 के दशक में न्यूयॉर्क का ब्रॉन्क्स जल रहा था, सिर्फ आग से नहीं, बल्कि उपेक्षा और गरीबी से। ऐसे माहौल में अश्वेत और लैटिनो युवाओं ने अपने दर्द को एक नई संस्कृति में बदल दिया। सड़कें उनका मंच बनीं, गैंग की लड़ाइयां डांस बैटल में बदलीं और बर्बादी से जन्म हुआ ब्रेकडांसिंग (बी-बॉयिंग) का। यह महज डांस नहीं था, बल्कि एक नई दुनिया बनाने का प्रयास था, कंक्रीट और कार्डबोर्ड पर निर्मित एक क्रांति थी। (Photo Source: Pexels) -
आयरिश स्टेप डांस (आयरलैंड, 1600s)
आयरलैंड में ब्रिटिश शासन के दौरान, आयरिश संस्कृति को दबाने की कोशिश की गई, नृत्य भी निगरानी में था। लोग छत पर निगरानी रखते थे कि कहीं सैनिक न आ जाएं। डांसर्स अपने पैरों में सिक्के बांधते ताकि आवाज तेज हो, लेकिन हाथों को सख्त अपनी जगह पर रखते, यह सिर्फ शैली नहीं, बल्कि एक प्रतीक था। यह ब्रिटिश सत्ता के सामने झुकने से इनकार करने का एक मौन विरोध था, जो आज भी हर प्रतियोगिता में जिंदा है। (Photo Source: Pexels) -
टॉय-टॉय (दक्षिण अफ्रीका)
यह नृत्य नहीं, बल्कि धरती पर पड़ती गूंज है। एक साथ उठते कदम, ऊंची आवाजें और जोश, यह सब मिलकर बनता है टॉय-टॉय। दक्षिण अफ्रीका के अपार्थाइड के खिलाफ आंदोलन के दौरान यह नृत्य एक हथियार बन गया। जब लोग एक साथ नाचते थे, तो वह डर के खिलाफ सामूहिक ऐलान होता था। आज भी यह नृत्य विरोध प्रदर्शनों में जिंदा है। (Photo Source: Pexels) -
छऊ नृत्य: (पूर्वी भारत)
छऊ शब्द का अर्थ ही है- ‘छाया’ और ‘सैनिक शिविर’। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के इस पारंपरिक नृत्य में युद्ध कौशल छिपा है। ऊंची छलांगें, तेज वार और मुखौटे ये सब कभी युद्ध अभ्यास का हिस्सा थे। रात के अंधेरे में, मशालों की रोशनी में किया जाने वाला यह नृत्य आज भी उस वीरता की कहानी कहता है। (Photo Source: Pexels) -
घोस्ट डांस (नेटिव अमेरिका, 1889)
1889 में एक आध्यात्मिक नेता वोवोका ने एक नृत्य सिखाया, जो उम्मीद का प्रतीक था। यह नृत्य मूल अमेरिकी समुदायों में तेजी से फैला, जिसमें विश्वास था कि इससे उनकी जमीन, पूर्वज और जीवन वापस आएंगे। इस विश्वास के साथ यह नृत्य फैला। लेकिन सत्ता ने इसे विद्रोह समझा। इस डर ने हिंसा को जन्म दिया और महान नेता सिटिंग बुल की हत्या कर दी गई। फिर भी, यह नृत्य उम्मीद का प्रतीक बना रहा। (Photo Source: Pexels) -
कैपोएरा (ब्राजील, 1600s)
ब्राजील में गुलाम बनाए गए अफ्रीकी लोगों को लड़ने की अनुमति नहीं थी। तो उन्होंने अपनी लड़ाई को नृत्य में बदल दिया। किक, छलांग और घुमाव को संगीत के साथ छिपा दिया। कैपोएरा में हर मूव एक युद्ध तकनीक है, लेकिन बाहर से यह एक सुंदर नृत्य लगता है। यह दिखाता है कि शरीर हमेशा अपनी आजादी का रास्ता ढूंढ लेता है। (Photo Source: Pexels) -
केकवॉक (अमेरिका, 1800s)
अमेरिका में गुलामों से यह नृत्य करवाया जाता था। लेकिन असल में यह एक व्यंग्य था। लेकिन उन्होंने इसे मजाक का हथियार बना दिया। हर बढ़ा-चढ़ा कदम, हर बनावटी झुकाव, यह सब उनके मालिकों की नकल थी। वे उनका मजाक उड़ाते थे, लेकिन मालिक समझ नहीं पाते थे। यह इतिहास का सबसे सलीकेदार और चतुर विरोध था, जो मनोरंजन के रूप में छिपा था। (Photo Source: Pexels)
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