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चार धाम यात्रा भारत की सबसे पवित्र और लोकप्रिय तीर्थ यात्राओं में से एक है, जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं को हिमालय की गोद में बुलाती है। वर्ष 2026 में यह पवित्र यात्रा 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर शुरू हुई, जब यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम के कपाट खोले गए। (PTI Photo)
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हिमालय की वादियों में फैली आध्यात्मिक आभा के बीच यह यात्रा चार पवित्र धामों- यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के साथ पूरी होती है। परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु इस यात्रा को पश्चिम से पूर्व की दिशा में ‘परिक्रमा’ करते हुए पूरा करते हैं। (PTI Photo)
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यमुनोत्री: यात्रा की शुरुआत
समुद्र तल से लगभग 3,293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री चार धाम यात्रा का पहला पड़ाव है। यह धाम देवी यमुना को समर्पित है, जिन्हें सूर्य देव की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए जानकी चट्टी से कठिन ट्रेक करना पड़ता है, जो संकरी पहाड़ी घाटियों से होकर गुजरता है। मान्यता है कि यमुना नदी में स्नान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। (PTI Photo) -
गंगोत्री: गंगा का उद्गम स्थल
यात्रा का अगला पड़ाव गंगोत्री है, जो 3,400 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। यह मंदिर मां गंगा को समर्पित है और मान्यता है कि भगवान शिव ने गंगा को अपनी जटाओं में धारण कर पृथ्वी पर उतारा। गंगोत्री से करीब 19 किमी दूर गौमुख स्थित है, जिसे गंगा का वास्तविक स्रोत माना जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए कठिन ट्रेक करना पड़ता है। इस क्षेत्र में नदी को भागीरथी के नाम से जाना जाता है। (PTI Photo) -
केदारनाथ: आस्था की पराकाष्ठा
केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल 2026 को खुले। यह धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 22 किलोमीटर का कठिन ट्रेक करना पड़ता है या फिर हेलीकॉप्टर सेवा का सहारा लिया जा सकता है। पौराणिक कथा के अनुसार, महाभारत के बाद पांडवों ने यहां भगवान शिव से क्षमा मांगी थी। (PTI Photo) -
बद्रीनाथ: यात्रा का अंतिम पड़ाव
चार धाम यात्रा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बद्रीनाथ मंदिर है, जिसके कपाट 23 अप्रैल 2026 को खुले। यह धाम भगवान विष्णु को समर्पित है और यहां स्थापित उनकी काले पत्थर की प्रतिमा पद्मासन मुद्रा में है। यहां हर साल जून से सितंबर के बीच बद्री-केदार उत्सव का आयोजन होता है, जो शिव और विष्णु की एकता का प्रतीक है। (PTI Photo) -
यात्रा के लिए जरूरी नियम
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: यात्रा से पहले उत्तराखंड पर्यटन पोर्टल या ऐप पर पंजीकरण जरूरी है।
QR कोड/ई-पास सिस्टम: सभी यात्रियों को डिजिटल पास दिया जाता है, जिसे रास्ते में चेक किया जाता है।
फिटनेस चेक जरूरी: खासकर केदारनाथ यात्रा के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य हो सकती है।
नाइट ट्रैवल पर रोक: रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों का संचालन बंद रहता है।
वाहन जांच: पहाड़ी रास्तों के लिए वाहनों का तकनीकी निरीक्षण जरूरी है। (ANI Photo) -
स्वास्थ्य और सुरक्षा सलाह
ऊंचाई पर जाने से पहले शरीर कोएक्लीमेटाइज करें, पर्याप्त पानी पिएं और हल्का भोजन करें, शराब और नींद की गोलियों से बचें, ट्रेकिंग के दौरान धीरे-धीरे चलें और जरूरत पड़ने पर आराम करें। (PTI Photo)
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