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भारत अपनी समृद्ध वाइल्डलाइफ हेरिटेज और कंजर्वेशन एफर्ट्स के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। देश में कई प्रसिद्ध चिड़ियाघर हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे पुराना चिड़ियाघर कौन सा है? (Photo Source: Alipore Zoo)
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यह गौरव हासिल है अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन को, जो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के अलीपुर क्षेत्र में स्थित है। यह केवल एक चिड़ियाघर नहीं, बल्कि भारत में वाइल्डलाइफ रिजर्व की ऐतिहासिक यात्रा का जीवंत प्रतीक भी है। (Photo Source: Alipore Zoo)
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24 सितंबर 1875 को हुई थी स्थापना
अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन की स्थापना 24 सितंबर 1875 को हुई थी। इसे भारत का सबसे पुराना ऑफिशियल चिड़ियाघर माना जाता है। खास बात यह है कि इस चिड़ियाघर का निर्माण सरकारी धन से नहीं, बल्कि कोलकाता के नागरिकों के सहयोग और दान से संभव हुआ था। लोगों ने न सिर्फ आर्थिक मदद की, बल्कि अपने निजी पशु संग्रह से जानवर भी दान किए थे। (Photo Source: Alipore Zoo) -
जनता के सहयोग से बना था चिड़ियाघर
अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन की शुरुआत आम जनता की भागीदारी से हुई थी। उस समय कोलकाता के लोगों ने बड़ी उदारता दिखाते हुए इस परियोजना के लिए धन जुटाया। यह भारतीय समाज में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता का एक अनूठा उदाहरण है। (Photo Source: Alipore Zoo) -
रिचर्ड वेलेस्ली के पशु प्रेम से शुरू हुई कहानी
इस चिड़ियाघर की कहानी तत्कालीन भारत के गवर्नर जनरल रिचर्ड वेलेस्ली से जुड़ी है। वे जानवरों के बेहद शौकीन थे और उन्होंने कोलकाता के बैरकपुर स्थित अपने समर रेजिडेंस पर कई दुर्लभ और विदेशी जानवरों का संग्रह रखा था। यही निजी पशु संग्रह आगे चलकर अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन की नींव बना। (Photo Source: Alipore Zoo) -
कई असफल प्रयासों के बाद साकार हुआ सपना
कोलकाता में चिड़ियाघर बनाने का पहला प्रयास 1842 में डॉ. जॉन मैक्लेलैंड ने किया था, जो बंगाल एशियाटिक सोसाइटी म्यूजियम के क्यूरेटर थे। हालांकि, उस समय उनके प्रस्ताव को गंभीरता से नहीं लिया गया। (Photo Source: Alipore Zoo) -
इसके लगभग 20 साल बाद डॉ. जोसेफ बार्ट फेयरर ने फिर इस विचार को आगे बढ़ाया, लेकिन पर्याप्त जमीन की कमी के कारण योजना ठप पड़ गई। आखिर में 1873 में कार्ल लुईस श्वेंडलर ने एक विस्तृत योजना तैयार की और भारत सरकार ने इस परियोजना के लिए 46.5 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई। इसके बाद चिड़ियाघर के निर्माण का सपना साकार हुआ। (Photo Source: Alipore Zoo)
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पहले सुपरिंटेंडेंट और कंजर्वेशन स्पेशलिस्ट
अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन के पहले सुपरिटेंडेंट राम ब्रह्मा सान्याल थे, जिन्होंने इस चिड़ियाघर को नई पहचान दिलाई। उन्होंने 1892 में ‘ए हैंड-बुक ऑफ द मैनेजमेंट ऑफ एनिमल्स इन कैप्टिविटी इन लोअर बंगाल’ नामक पुस्तक लिखी, जो लंबे समय तक भारत और दुनिया भर के चिड़ियाघरों के लिए मार्गदर्शक पुस्तक मानी जाती रही। (Photo Source: Alipore Zoo) -
‘ए हैंडबुक ऑफ द मेनेजमेंट ऑफ एनिमल्स इन केपटिविटी’ उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी 1889 में दुर्लभ सुमात्रन गैंडे का सफल प्रजनन, जो उस समय बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि मानी गई। (Photo Source: Alipore Zoo)
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आज भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र
आज अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन भारत के सबसे लोकप्रिय चिड़ियाघरों में गिना जाता है। यहां देश-विदेश से पर्यटक आते हैं और कई दुर्लभ प्रजातियों को देखने का मौका मिलता है। यह स्थान सिर्फ मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, शिक्षा और शोध का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। (Photo Source: Alipore Zoo) -
अलीपुर जूलॉजिकल गार्डन केवल भारत का सबसे पुराना चिड़ियाघर नहीं, बल्कि यह देश की वन्यजीव संरक्षण परंपरा और इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनता के सहयोग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और वर्षों की मेहनत से बना यह चिड़ियाघर आज भी भारत की प्राकृतिक धरोहर को संजोए हुए है। (Photo Source: Alipore Zoo)
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