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भारत के घने जंगलों, हिमालयी घाटियों, दलदली घास के मैदानों और पूर्वोत्तर के अनोखे वेटलैंड्स में हिरणों की कई खूबसूरत और दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। ये शाकाहारी जीव न केवल जंगलों के इकोलॉजिकल बैलेंस को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि बाघ, तेंदुए जैसे शिकारी जीवों के लिए प्रमुख आहार भी हैं। कुछ हिरण जैसे चीतल आसानी से सफारी के दौरान दिख जाते हैं, जबकि कुछ प्रजातियां बेहद दुर्लभ और सीमित क्षेत्रों में ही मिलती हैं। आइए जानते हैं भारत में पाए जाने वाले प्रमुख हिरणों और उन नेशनल पार्क के बारे में, जहां पर्यटक उन्हें देख सकते हैं। (Photo Source: Pexels)
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बारहसिंगा (स्वैम्प डियर)
बारहसिंगा अपने बड़े और कई शाखाओं वाले सींगों के लिए प्रसिद्ध है। कभी यह उत्तर और मध्य भारत में बड़ी संख्या में पाया जाता था, लेकिन शिकार और आवास नष्ट होने के कारण इसकी संख्या तेजी से कम हो गई। आज यह कुछ चुनिंदा संरक्षित क्षेत्रों तक सीमित है। मध्य भारत में पाए जाने वाले हार्ड-ग्राउंड बारहसिंगा को बचाने में कान्हा नेशनल पार्क की बड़ी भूमिका रही है। इसके अलावा आप इसे दुधवा नेशनल पार्क में भी आसानी से देख सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
काकड़ या बार्किंग डियर (इंडियन मुन्टजैक)
बार्किंग डियर को काकड़ भी कहा जाता है। इसका नाम इसकी कुत्ते जैसी भौंकने की आवाज के कारण पड़ा है। यह बेहद शर्मीला और अकेले रहने वाला हिरण है, जो घने जंगलों में छिपा रहता है। नर काकड़ के छोटे सींग और लंबे कैनाइन दांत होते हैं। यह हिमालय की तलहटी से लेकर पश्चिमी घाट तक लगभग सभी घने जंगलों में, खासकर राजाजी नेशनल पार्क, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और बांदीपुर नेशनल पार्क में पाया जाता है। (Photo Source: Pexels) -
चीतल (स्पॉटेड डियर)
चीतल भारत में सबसे अधिक दिखाई देने वाली हिरण प्रजातियों में से एक है। इसके शरीर पर मौजूद सफेद धब्बे इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। चीतल आमतौर पर झुंड में रहते हैं और पानी व घास वाले क्षेत्रों के आसपास पाए जाते हैं। इनकी बड़ी संख्या किसी जंगल में स्वस्थ शिकारी आबादी का संकेत मानी जाती है। पर्यटक इन्हें जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, बांधवगढ़ नेशनल पार्क, रणथंभौर नेशनल पार्क और नागरहोल नेशनल पार्क में आसानी से देख सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
हंगुल (कश्मीर स्टैग)
हंगुल भारत की सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त हिरण प्रजातियों में से एक है। यह केवल कश्मीर घाटी में पाया जाता है। इसके विशाल शरीर और शानदार सींग इसे बेहद खास बनाते हैं। पिछले कुछ दशकों में आवास नष्ट होने और घटती प्रजनन क्षमता के कारण इसकी संख्या काफी कम हो गई। आज हंगुल का प्रमुख और अंतिम सुरक्षित आवास दाचीगाम नेशनल पार्क माना जाता है। (Photo Source: Pexels) -
हॉग डियर
हॉग डियर का नाम इसके दौड़ने के तरीके के कारण पड़ा है, क्योंकि यह सिर नीचे करके दौड़ता है, ठीक जंगली सूअर की तरह। यह आकार में छोटा और मजबूत शरीर वाला हिरण है। यह मुख्य रूप से ऊंची घास और नदी किनारे वाले इलाकों में पाया जाता है। पूर्वोत्तर भारत के काजीरंगा नेशनल पार्क और मानस नेशनल पार्क में इसे देखा जा सकता है। (Photo Source: Pexels) -
कस्तूरी मृग (मस्क डियर)
कस्तूरी मृग हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला बेहद दुर्लभ जीव है। यह अन्य हिरणों से अलग होता है क्योंकि इसके सींग नहीं होते। नर मस्क डियर में लंबे दांत जैसे दाढ़ दिखाई देते हैं। इसकी कस्तूरी ग्रंथि के कारण पहले इसका बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता था। ये हिरण 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले अल्पाइन जंगलों और झाड़ीदार क्षेत्रों में रहते हैं। इन्हें ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, नंदा देवी नेशनल पार्क और केदारनाथ वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में देखा जा सकता है। (Photo Source: Pexels) -
सांभर हिरण
सांभर भारत का सबसे बड़ा हिरण माना जाता है। इसका गहरा भूरा रंग, बड़े कान और मजबूत सींग इसकी पहचान हैं। सांभर घने जंगलों में रहना पसंद करते हैं और ज्यादातर सुबह या शाम के समय दिखाई देते हैं। ये अपनी तेज अलार्म कॉल के लिए भी प्रसिद्ध हैं, जिससे दूसरे जानवरों को शिकारी के आने का संकेत मिल जाता है। सांभर हिरण देश के कई जंगलों में पाए जाते हैं, खासकर कान्हा नेशनल पार्क, पेंच नेशनल पार्क, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और पेरियार टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में। (Photo Source: Pexels) -
संगाई (ब्राउ-एंटलर्ड डियर)
संगाई को ‘मणिपुर का डांसिंग डियर’ भी कहा जाता है। यह दुनिया में केवल मणिपुर की लोकटक झील के तैरते हुए फुमदी घास क्षेत्रों में पाया जाता है। तैरती हुई वनस्पतियों पर संतुलन बनाकर चलते समय ऐसा लगता है जैसे यह नृत्य कर रहा हो। इस दुर्लभ हिरण का प्राकृतिक घर केइबुल लमजाओ नेशनल पार्क है, जो दुनिया का एकमात्र फ्लोटिंग नेशनल पार्क माना जाता है। (Photo Source: Pexels)
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