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भारत के मंदिर केवल आस्था के केंद्र ही नहीं हैं, बल्कि अपनी अनूठी परंपराओं, रहस्यमयी मान्यताओं और सदियों पुराने रीति-रिवाजों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। आमतौर पर मंदिर दर्शन के बाद श्रद्धालु प्रसाद को अपने परिवार और रिश्तेदारों के लिए घर लेकर जाते हैं। इसे भगवान का आशीर्वाद माना जाता है। (Photo Source: Tour My India)
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लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कुछ ऐसे मंदिर भी हैं, जहां प्रसाद को घर ले जाना उचित नहीं माना जाता? इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार प्रसाद को मंदिर परिसर में ही ग्रहण करना चाहिए या वहीं छोड़ देना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 अनोखे मंदिरों के बारे में। (Photo Source: Pexels)
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काल भैरव मंदिर, मध्य प्रदेश
उज्जैन स्थित काल भैरव मंदिर भगवान शिव के उग्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित है। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है, जहां भक्त भगवान को मदिरा अर्पित करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मंदिर में चढ़ाई गई मदिरा और अन्य विशेष भेंट केवल भगवान के लिए होती हैं। इन्हें सामान्य प्रसाद की तरह घर ले जाना या वितरित करना उचित नहीं माना जाता। यही वजह है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। (Photo Source: Tour My India) -
कामाख्या मंदिर, असम
असम की राजधानी गुवाहाटी के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर तांत्रिक साधना और विशिष्ट धार्मिक परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। विशेष रूप से अंबुबाची मेले के दौरान यहां मिलने वाले कुछ प्रसाद और पवित्र वस्तुओं को अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष प्रसाद को मंदिर परिसर से बाहर ले जाना उचित नहीं माना जाता। यह परंपरा मंदिर की अनूठी आध्यात्मिक मान्यताओं से जुड़ी हुई है। (Photo Source: Tour My India) -
कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक
कर्नाटक का कोटिलिंगेश्वर मंदिर लाखों शिवलिंगों के लिए प्रसिद्ध है। यह देश के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। मंदिर की मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव के परम भक्त चंडेश्वर का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि भगवान को अर्पित किए गए प्रसाद पर प्रतीकात्मक रूप से चंडेश्वर का अधिकार होता है। यही कारण है कि कई श्रद्धालु प्रसाद को घर ले जाने या सामान्य रूप से उपयोग करने से बचते हैं। (Photo Source: Tour My India) -
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान
राजस्थान के दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर बालाजी मंदिर देश के सबसे रहस्यमयी मंदिरों में गिना जाता है। यह मंदिर भगवान हनुमान के बालाजी स्वरूप को समर्पित है और यहां नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति पाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। मंदिर की सबसे खास परंपरा यह है कि यहां का प्रसाद या कोई भी खाद्य सामग्री घर ले जाने की सलाह नहीं दी जाती। मान्यता है कि पूजा-पाठ के दौरान प्रसाद नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समाहित कर लेता है। इसलिए श्रद्धालुओं को प्रसाद मंदिर परिसर में ही ग्रहण करने या वहीं छोड़ देने के लिए कहा जाता है। (Photo Source: Tour My India) -
नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित नैना देवी मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। शिवालिक पर्वतमाला की ऊंचाइयों पर स्थित यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय परंपराओं के अनुसार देवी को अर्पित कुछ विशेष प्रसाद और भेंट मंदिर परिसर में ही रहने चाहिए। हालांकि यह परंपरा सभी श्रद्धालुओं पर समान रूप से लागू नहीं होती, फिर भी बड़ी संख्या में भक्त आज भी इस मान्यता का पालन करते हैं। (Photo Source: Tour My India)
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