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मानव शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में से एक नाक भी है, जिसके मुख्य काम सांस लेने, हवा को शुद्ध करने और गंध का अनुभव करना है। किसी भी चीज की महक का पता नाक से चलता है। लेकिन कुछ ऐसे जानवर हैं जो नाक की जगह जीभ से सूंघते हैं। (Photo Source: Pexels)
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आपने सांपों को अपनी दोमुंही जीभ बाहर निकालने और अंदर करते देखा होगा। वह अपनी जीभ की मदद से आसपास मौजूद रासायनिक संकेतों को पहचानते हैं। सांप की जीभ हवा, जमीन या आसपास की सतहों से बेहद छोटे रासायनिक कणों को इकट्ठा करती है। जब सांप जीभ को वापस मुंह के अंदर लेता है, तो ये रासायनिक संकेत मुंह की छत में मौजूद वोमेरोनैजल ऑर्गन या जैकबसन ऑर्गन तक पहुंचते हैं। यह अंग इन संकेतों को पहचानकर दिमाग तक जानकारी पहुंचाता है। जीभ की मदद से उन्हें यह भी पता चलता है कि गंध या रासायनिक संकेत किस दिशा से आ रहे हैं। आइए जानते भारत के पांच ऐसे जानवरों के बारे में जो इस खास तरीके से अपने आसपास की जानकारी हासिल करते हैं। (Photo Source: Pexels)
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1- भारतीय कोबरा
भारतीय कोबरा आसपास की जानकारी जुटाने के लिए अपनी दोमुंही जीभ का इस्तेमाल करता है। वह जीभ को बार-बार बाहर निकालकर वातावरण से रासायनिक संकेत इकट्ठा करता है। इन संकेतों की मदद से कोबरा शिकार, दूसरे सांपों और संभावित खतरे के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। जीभ के दोनों सिरे थोड़ी अलग जगहों से संकेत लेते हैं, जिससे उसे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि रासायनिक संकेत किस दिशा से आ रहे हैं। (Photo Source: Pexels) -
2- कॉमन क्रेट
कॉमन क्रेट भी अपनी जीभ को बार-बार बाहर निकालकर आसपास के रासायनिक संकेतों को पहचानते हैं। जीभ के अंदर-बाहर आने के दौरान यह आसपास के बेहद छोटे रासायनिक कणों को इकट्ठा करती है। इसके बाद वेमेरोनैजल सिस्टम इन संकेतों को पहचानता है। इससे क्रेट को अपने आसपास के वातावरण को समझने और शिकार आदि का पता लगाने में मदद मिलती है। (Photo Source: Pexels) -
3- रसेल वाइपर
रसेल वाइपर भी आसपास के गंध और रासायनिक संकेतों को पहचानने के लिए जीभ की मदद लेते हैं। वाइपर पर किए गए शोध से पता चलता है कि जीभ को बाहर निकालना और अंदर करना शिकार से जुड़े रासायनिक संकेतों को पहचानने और उनका पीछा करने में मदद कर सकता है। इसलिए रसेल वाइपर का बार-बार जीभ निकालना सिर्फ एक सामान्य हरकत नहीं है। बल्कि यह उसके लिए शिकार की तलाश और आसपास की जगह को समझने का तरीका है। (Photo Source: Pexels) -
4- इंडियन रॉक पाइथन
इंडियन रॉक पाइथन में भी वोमेरोनैजल सिस्टम अच्छी तरह विकसित होता है। यह अजगर अपनी दोमुंही जीभ की मदद से वातावरण से रासायनिक संकेत इकट्ठा करता है। इससे उसे आसपास मौजूद शिकार के बारे में जानकारी हासिल करने में मदद मिलती है। खास बात यह है कि शिकार दिखाई न देने पर भी अजगर इन रासायनिक संकेतों की मदद से उसके बारे में जानकारी जुटा सकता है। (Photo Source: Pexels) -
5- बंगाल मॉनिटर लिजर्ड
सिर्फ सांप ही नहीं बल्कि बंगाल मॉनिटर लिजर्ड यानी गोह भी अपनी लंबी और दोमुंही जीभ को बार-बार बाहर निकालकर शिकार, दिशा और रासायनिक संकेत इकट्ठा करते हैं। वह आसापस की जगह को समझने और शिकार की तलाश के दौरान करते हैं। शोध से पता चलता है कि जीभ को बार-बार निकालने से गोह शिकार से जुड़े रासायनिक संकेतों को पहचान सकता है। (Photo Source: Pexels)
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