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पश्चिम एशिया में शनिवार को हालात अचानक बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमले किए। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं और आसमान में धुएं के गुबार दिखाई दिए। इस हमले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। (Photo Source: Reuters)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सैन्य अभियान की पुष्टि करते हुए इसे एक ‘मेजर कॉम्बैट ऑपरेशन’ बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना है। ट्रंप ने ईरान की जनता से अपने भविष्य का फैसला खुद करने की अपील भी की, जिससे संकेत मिलता है कि इस कार्रवाई के राजनीतिक परिणाम भी हो सकते हैं। (Photo Source: Reuters)
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इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि यह ऑपरेशन कई महीनों की योजना का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद ईरान की आक्रामक नीतियों और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना है। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इस अभियान से क्षेत्र में दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। (Photo Source: Reuters)
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हमलों के दौरान तेहरान में स्थित ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के कार्यालय के आसपास भी विस्फोट हुए। इससे उनके सुरक्षित होने को लेकर अटकलें लगने लगीं। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दोनों सुरक्षित हैं। (Photo Source: Reuters)
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ईरान ने इस हमले को ‘अवैध और उकसावे वाला’ बताया और तत्काल जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरानी सेना ने इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो वह और भी सख्त जवाब देगा। (Photo Source: Reuters)
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ईरान की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उन्होंने कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है। क्षेत्र के कई देशों में सायरन बजने और हवाई सुरक्षा प्रणाली सक्रिय होने की खबरें सामने आई हैं। (Photo Source: Reuters)
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इस संघर्ष का असर खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में भी देखा गया है। सऊदी अरब, कतर और कुवैत में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई देशों ने अपने हवाई क्षेत्र को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है और नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। (Photo Source: AP)
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इस बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है। (Photo Source: Reuters)
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इस संघर्ष का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का फैसला करता है, तो इससे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यह जलमार्ग दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। (Photo Source: AP)
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इस संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा भी प्रभावित हुई है। भारत की प्रमुख एयरलाइंस एयर इंडिया और इंडिगो ने मध्य पूर्व के कई मार्गों पर अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। यात्रियों को सुरक्षा कारणों से यात्रा स्थगित करने की सलाह दी गई है। (Photo Source: AP)
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भारत सरकार ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह हालात पर लगातार नजर रख रहा है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है। (Photo Source: AP)
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ईरान के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में स्थित चाबहार पोर्ट के पास भी विस्फोट की खबरें सामने आई हैं। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी तरह की अस्थिरता भारत के व्यापार को प्रभावित कर सकती है। (Photo Source: Reuters)
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एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह संघर्ष केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। इसके राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव भी होंगे। अमेरिका और इजराइल इस कार्रवाई को सुरक्षा के नजरिए से देख रहे हैं, जबकि ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है। (Photo Source: Reuters)
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ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने अभी अपनी पूरी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल नहीं किया है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो वे और भी शक्तिशाली हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। (Photo Source: Reuters)
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इस संघर्ष का असर वैश्विक बाजारों और निवेशकों पर भी पड़ रहा है। तेल की कीमतों में उछाल की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और सप्लाई चैन पर भी इसका असर पड़ सकता है। यह संघर्ष ऐसे समय में हुआ है जब पहले से ही मध्य पूर्व में अस्थिरता बनी हुई है। क्षेत्र में कई देशों के बीच तनाव और संघर्ष पहले से जारी हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। (Photo Source: AP)
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कूटनीतिक स्तर पर कई देश इस संकट को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय चाहता है कि यह संघर्ष बड़े युद्ध में न बदले। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सैन्य कार्रवाई सीमित रहेगी या बड़े युद्ध का रूप लेगी। इस संकट ने वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। (Photo Source: AP)
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