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भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध वार्षिक रथ यात्रा गुरुवार को ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ शुरू हो गई। नौ दिनों तक चलने वाले इस भव्य धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल हुए। ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष से पूरा पुरी शहर भक्तिमय माहौल में डूब गया और भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। (ANI Photo)
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हिंदू परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ वर्ष में एक बार श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं। इस यात्रा को भगवान का अपनी मौसी के घर जाने का प्रतीक माना जाता है। तीनों देवता नौ दिनों तक गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहेंगे और 24 जुलाई को ‘बहुदा यात्रा’ के साथ वापस श्रीमंदिर लौटेंगे। (PTI Photo)
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रथ यात्रा की शुरुआत पारंपरिक ‘धाड़ी पहांडी’ अनुष्ठान से हुई। इस दौरान सेवायतों और पुजारियों ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को भव्य शोभायात्रा के बीच मंदिर से बाहर लाकर उनके-अपने रथों पर विराजमान कराया। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य दृश्य का दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। (PTI Photo)
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भगवान जगन्नाथ का रथ नंदीघोष, भगवान बलभद्र का तलध्वज और देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ आकर्षक सजावट से सुसज्जित नजर आया। इसके बाद लाखों श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार इन विशाल रथों को रस्सियों से खींचते हुए लगभग तीन किलोमीटर लंबे ‘बड़ा डांडा’ मार्ग से गुंडिचा मंदिर की ओर रवाना किया। (PTI Photo)
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रथ यात्रा के दौरान ‘चिता लागी’ सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान भी संपन्न किए गए। मंदिर परिसर और रथों के आसपास वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटियों की गूंज से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा। हर ओर भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। (ANI Photo)
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इस वर्ष प्रशासन ने पिछले साल हुई अव्यवस्था और रथों के देर से आगे बढ़ने की घटना से सबक लेते हुए विशेष तैयारियां की हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी धार्मिक अनुष्ठान समय पर पूरे कराए जाएं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा में किसी प्रकार की कमी न रहे। (ANI Photo)
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रथ यात्रा के लिए करीब 12 हजार पुलिसकर्मियों, 19 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों और 100 से अधिक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के कर्मियों को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है। (PTI Photo)
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श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने लगभग 500 सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कई निकासी मार्ग (इवैक्यूएशन कॉरिडोर) बनाए गए हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आठ अस्थायी अस्पताल और पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है। (PTI Photo)
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महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। वहीं, स्वच्छता बनाए रखने के लिए शहर में 1,700 बायो-टॉयलेट स्थापित किए गए हैं और स्वयंसेवकों की बड़ी टीम को साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सहायता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। (PTI Photo)
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प्रशासन का अनुमान है कि इस वर्ष रथ यात्रा के दौरान भारत और विदेशों से करीब 30 लाख श्रद्धालु पुरी पहुंचेंगे। होटल, धर्मशालाएं और अन्य आवासीय सुविधाएं पहले से ही श्रद्धालुओं से भर चुकी हैं, जबकि पूरे शहर में सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए हैं। (AP Photo)
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रथ यात्रा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने रथों के सामने लोकनृत्य और भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। धार्मिक आस्था के साथ ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक भी इस आयोजन में देखने को मिली। (ANI Photo)
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भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। सदियों पुरानी यह परंपरा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में बांधती है और भारत की आध्यात्मिक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करती है। (ANI Photo)
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