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हर साल 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस इस बार वैश्विक तनाव और महंगाई के साये में मनाया जा रहा है। खासतौर पर ईरान से जुड़े युद्ध और ऊर्जा संकट के चलते दुनिया के कई देशों में मजदूर सड़कों पर उतर आए हैं। बढ़ती ईंधन कीमतों, महंगाई और घटती आय ने श्रमिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, जिसके खिलाफ आज बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। (AP Photo)
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यूरोप में यूरोपियन ट्रेड यूनियन कन्फेडरेशन ने साफ कहा कि मजदूर मध्य पूर्व के युद्ध की कीमत नहीं चुकाएंगे। संगठन ने आरोप लगाया कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के कारण हालात बिगड़े हैं। यूरोप के कई देशों में रैलियों और प्रदर्शनों के जरिए मजदूरों ने अपने अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। (AP Photo)
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अमेरिका में मई दिवस ऑफिशियल छुट्टी नहीं है, लेकिन फिर भी संयुक्त राज्य अमेरिका में हजारों लोग सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। यहां मजदूर संगठनों और एक्टिविस्ट समूहों ने ‘वर्कर्स ओवर बिलेनियर्स’ जैसे नारों के साथ प्रदर्शन और बहिष्कार की योजना बनाई है। ट्रंप प्रशासन की नीतियों, खासकर इमिग्रेशन और आर्थिक फैसलों के खिलाफ गुस्सा देखने को मिल रहा है। (AP Photo)
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फिलीपींस की राजधानी मनीला में बड़ी संख्या में मजदूरों के जुटने की उम्मीद है। स्थानीय संगठनों के अनुसार, ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण मजदूरों की आर्थिक स्थिति और खराब हुई है, जिससे वे सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। (AP Photo)
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इस मौके पर फिलीपींस के मनीला में मई दिवस रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पुतला भी जलाया। (AP Photo)
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इंडोनेशिया में मजदूर संघों ने चेतावनी दी है कि देश में आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में लोग पहले ही कम वेतन और महंगाई के बीच संघर्ष कर रहे हैं, और अब ऊर्जा संकट ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भी हजारों मजदूर सड़कों पर उतरे। उन्होंने बढ़ती महंगाई, कम वेतन और खराब श्रम स्थितियों के खिलाफ विरोध जताया। (AP Photo)
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पाकिस्तान में मई दिवस सार्वजनिक अवकाश है, लेकिन यहां के दिहाड़ी मजदूरों के लिए काम छोड़ना आसान नहीं है। बढ़ती महंगाई और लगभग 16% मुद्रास्फीति के बीच कई मजदूरों का कहना है कि वे एक दिन भी काम नहीं छोड़ सकते, क्योंकि इससे उनके परिवार का खर्च प्रभावित होगा। (AP Photo)
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दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में मजदूरों ने ‘नो वॉर एंड पीस” के नारे के साथ प्रदर्शन किया। यहां के ट्रेड यूनियनों ने वैश्विक संघर्षों के खिलाफ आवाज उठाते हुए शांति और बेहतर कामकाजी हालात की मांग की। (AP Photo)
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तुर्की के इस्तांबुल में मजदूरों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं। मजदूर तक्षिम स्क्वायर की ओर मार्च करना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया, जिससे तनाव बढ़ गया। (AP Photo/Khalil Hamra)
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फ्रांस की राजधानी पेरिस में ‘ब्रेड, पीस एंड फ्रीडम’ के नारे के साथ प्रदर्शन हुए। यहां मई दिवस को लेकर विवाद भी गहराया है, क्योंकि सरकार ने इस दिन कुछ सेक्टर में काम की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है, जिसका मजदूर संगठनों ने विरोध किया। (AP Photo)
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इटली में सरकार ने मई दिवस से पहले रोजगार बढ़ाने के लिए बड़े पैकेज की घोषणा की। हालांकि विपक्ष ने इसे सिर्फ दिखावा बताया है। वहीं मजदूर संगठनों ने स्थायी रोजगार और श्रम अधिकारों की मांग जारी रखी। (AP Photo)
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पुर्तगाल में श्रम कानूनों में प्रस्तावित बदलावों को लेकर पहले से ही विरोध चल रहा है। मई दिवस के मौके पर भी मजदूरों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा और अपने अधिकारों की रक्षा की मांग की। (PTI Photo)
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ताइवान की राजधानी ताइपेई में मजदूरों ने रिटायरमेंट बेनिफिट्स बढ़ाने की मांग को लेकर रैली निकाली। यहां के प्रदर्शन में सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। (AP Photo)
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जापान की राजधानी टोक्यो में बारिश के बावजूद मजदूरों ने रैली में हिस्सा लिया। उन्होंने बेहतर वेतन और कामकाजी हालात की मांग उठाई। (AP Photo)
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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में भी लोग सड़कों पर उतरे और अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाते हुए अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की। (AP Photo)
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अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में मजदूरों ने महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन किया। यहां भी ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी बड़ा मुद्दा बनी हुई है। (AP Photo)
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इराक की राजधानी बगदाद में मजदूरों और राजनीतिक संगठनों ने रैली निकाली और श्रमिक अधिकारों के समर्थन में नारे लगाए। (AP Photo)
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भारत में बेंगलुरु और चेन्नई सहित कई शहरों में मजदूर संगठनों ने रैलियां निकालीं। इस दौरान मजदूरों ने बेहतर वेतन, रोजगार सुरक्षा और महंगाई पर नियंत्रण की मांग की। (PTI Photo)
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इस तरह मई दिवस 2026 वैश्विक स्तर पर सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि संघर्ष और विरोध का प्रतीक बन गया है। (AP Photo)
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बढ़ती महंगाई, ऊर्जा संकट और युद्ध के प्रभाव ने दुनिया भर के मजदूरों को एक मंच पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां वे अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं। (AP Photo)
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