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केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक बार फिर आस्था का सागर उमड़ा, जब लाखों महिलाओं ने Attukal Bhagavathy Temple में आयोजित अट्टुकल पोंगला महोत्सव में भाग लिया। यह विश्व के सबसे बड़े महिला धार्मिक समागमों में से एक माना जाता है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस वर्ष लगभग 40 लाख महिलाओं के शामिल होने का अनुमान है। (Photo Source: ieMalayalam)
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10 दिवसीय उत्सव का नौवां दिन सबसे खास
अट्टुकल पोंगला, देवी अट्टुकल अम्मा को समर्पित 10 दिवसीय मंदिर उत्सव का प्रमुख आकर्षण है। यह पर्व मलयालम माह मकरम या कुंभम में कार्तिगई नक्षत्र से शुरू होकर ‘कुरुथितर्पणम’ अनुष्ठान के साथ समाप्त होता है। इस वर्ष पोंगला महोत्सव 3 मार्च को ‘पूरम नक्षत्र’ में मनाया गया, जिसे केरल की मंदिर परंपराओं में अत्यंत शुभ माना जाता है। (Photo Source: ieMalayalam) -
कैसे मनाया जाता है पोंगला?
सुबह तड़के ही शहर की सड़कों, गलियों और मंदिर परिसर के आसपास महिलाओं ने ईंटों से अस्थायी चूल्हे (अडुप्पु) बनाए। सुबह 9:15 बजे मुख्य पुजारी ब्रह्मश्री अनीश नंबूथिरी ने मंदिर के भीतर पोंगला चूल्हा प्रज्वलित किया। 9:45 बजे श्रद्धालुओं के चूल्हे जलाए गए, जिसके साथ सामूहिक पोंगला अनुष्ठान शुरू हुआ। (Photo Source: ieMalayalam) -
दोपहर 2:15 बजे लगभग 350 पुजारियों ने भक्तों के प्रसाद पर पवित्र जल छिड़ककर निवेद्यम अर्पित कराएंगे। महिलाएं मिट्टी के बर्तनों में चावल, गुड़, नारियल और घी से बनी मीठी डिश ‘पोंगला’ तैयार करती हैं, जिसे देवी को अर्पित किया जाता है। (Photo Source: ieMalayalam)
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‘महिलाओं का सबरीमाला’
अट्टुकल पोंगला को अक्सर ‘महिलाओं का सबरीमाला’ कहा जाता है। वर्ष 2009 में इसे धार्मिक गतिविधि के लिए महिलाओं की सबसे बड़ी सभा के रूप में Guinness World Records में स्थान मिला था। (Photo Source: ieMalayalam) -
चंद्र ग्रहण के कारण बदली व्यवस्थाएं
इस वर्ष पोंगला के दिन चंद्र ग्रहण भी पड़ने से मंदिर के गर्भगृह को दोपहर 3:10 बजे बंद कर दिया जाएगा, जिसे शाम 7 बजे दोबारा खोलाजाएगा। ग्रहण को ध्यान में रखते हुए अनुष्ठानों की समय-सारिणी में भी बदलाव किया गया है। (Photo Source: ieMalayalam) -
सुरक्षा और स्वास्थ्य इंतजाम
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए शहर में सोमवार दोपहर से ही विशेष ट्रैफिक व्यवस्था लागू की गई, जो मंगलवार शाम 8 बजे तक जारी रहेगी। भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, पार्किंग पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा केरल राज्य सड़क परिवहन निगम और रेलवे की विशेष सेवाएं शुरू की गई हैं। Kerala State Road Transport Corporation ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त बस सेवाएं चलाई हैं। (Photo Source: ieMalayalam) -
वहीं, स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल टीमें, एंबुलेंस और कंट्रोल रूम की तैनाती की गई है। हीट वेव को देखते हुए अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से हाइड्रेटेड रहने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की। (Photo Source: ieMalayalam)
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आस्था और एकता का अद्भुत दृश्य
भोर से पहले ही राजधानी की सड़कें मिट्टी के चूल्हों की लंबी कतारों में बदल गईं। महिलाएं सिर पर बर्तन, हाथों में लकड़ी और मन में श्रद्धा लिए अपने स्थान पर बैठ गईं। तपती धूप के बावजूद भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसके अलावा पुलिस् स्टेशनों में भी यहीं नजारा देखने को मिला। पुलिस अधिकारियों ने भी अपने पुलिस स्टेशन के बाहर चुल्हा बनाकर प्रसाद तैयार किया। (Photo Source: ieMalayalam) -
अट्टुकल पोंगला केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा, सामूहिक शक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। यह पर्व समृद्धि, परिवार की खुशहाली, संकटों से रक्षा और मनोकामनाओं की पूर्ति का संदेश देता है। (Photo Source: ieMalayalam)
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