-
गर्मियों का मौसम आते ही भारत में आमों की मिठास हर घर तक पहुंच जाती है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और यहां के अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और चौसा जैसे आम विदेशों में भी काफी पसंद किए जाते हैं। लेकिन इस बार भारतीय आम निर्यातकों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि जापान ने भारत से ताजे आमों के आयात पर रोक लगा दी है। (Photo Source: Pexels)
-
जापान ने यह फैसला भारतीय ट्रीटमेंट सुविधाओं में कीट नियंत्रण प्रक्रिया में कथित खामियां मिलने के बाद लिया है। यह प्रतिबंध ऐसे समय में लगाया गया है जब भारत में आमों का पीक एक्सपोर्ट सीजन चल रहा है। (Photo Source: Pexels)
-
आखिर क्यों लगाया गया बैन?
हर साल आम के निर्यात सीजन से पहले जापान अपनी क्वारंटीन टीम भारत भेजता है। ये अधिकारी वेपर हीट ट्रीटमेंट सुविधाओं का निरीक्षण करते हैं। वेपर हीट ट्रीटमेंट एक खास नॉन-केमिकल प्रक्रिया होती है, जिसमें गर्म और नम हवा के जरिए आमों को कीटों से मुक्त किया जाता है ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतर सकें। (Photo Source: Pexels) -
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में जापानी अधिकारियों ने उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वेपर हीट ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। इस दौरान फ्यूमिगेशन और डिसइन्फेक्शन प्रक्रियाओं में कुछ कमियां पाई गईं। इसके बाद जापान की योकोहामा प्लांट प्रोटेक्शन एसोसिएशन ने नोटिस जारी कर कहा कि 25 मार्च 2026 के बाद जारी किए गए भारतीय प्रमाणपत्रों वाले आमों की खेप स्वीकार नहीं की जाएगी। (Photo Source: Pexels)
-
क्या है असली चिंता?
इस पूरे विवाद के केंद्र में फ्रूट फ्लाई यानी फल मक्खी है, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक कृषि कीटों में गिना जाता है। ये कीट फलों के अंदर अंडे देते हैं और बाद में उनके लार्वा फल को भीतर से खराब कर देते हैं। जापान जैसे देश अपने कृषि क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए बेहद सख्त क्वारंटीन नियम अपनाते हैं। हालांकि इस बार सीधे तौर पर आमों में फ्रूट फ्लाई मिलने की बात सामने नहीं आई है, बल्कि जापानी अधिकारियों को यह चिंता है कि भारत में पेस्ट-कंट्रोल प्रोटोकॉल्स सही तरीके से लागू किए जा रहे हैं या नहीं। (Photo Source: Pexels) -
कौन-कौन सी आम की वैरायटी हुई प्रभावित?
इस बैन का असर भारत की कई प्रीमियम आम किस्मों पर पड़ा है। इनमें अल्फांसो, केसर, बंगनपल्ली, लंगड़ा, चौसा, और मलिका शामिल हैं। महाराष्ट्र का अल्फांसो आम अपनी खास मिठास और खुशबू के लिए दुनियाभर में मशहूर है। वहीं गुजरात का केसर अपने गहरे केसरिया रंग और मीठे स्वाद के लिए पसंद किया जाता है। उत्तर प्रदेश का लंगड़ा और आंध्र प्रदेश का बंगनपल्ली भी जापान में काफी लोकप्रिय हैं। (Photo Source: Pexels) -
20 साल बाद फिर लगा बैन
यह पहली बार नहीं है जब जापान ने भारतीय आमों पर रोक लगाई हो। इससे पहले 1986 में जापान ने फ्रूट फ्लाई इन्फेस्टेशन की आशंका के चलते भारतीय आमों के आयात पर बैन लगा दिया था। यह प्रतिबंध पूरे 20 साल तक चला और आखिरकार 2006 में हटाया गया, जब भारत ने वैज्ञानिक परीक्षणों और वेपर हीट ट्रीटमेंट सिस्टम के जरिए यह साबित किया कि भारतीय आम सुरक्षित हैं। (Photo Source: Pexels) -
इसके बाद भारत ने जापान के नियमों के अनुसार विशेष वेपर हीट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए और तभी से दोनों देशों के बीच आमों का व्यापार सुचारू रूप से चल रहा था। भारत से अल्फांसो, केसर, लंगड़ा, चौसा और बंगनपल्ली जैसे आम जापान भेजे जाने लगे थे। लेकिन अब लगभग दो दशक बाद फिर से जापान ने भारतीय आमों पर रोक लगा दी है। (Photo Source: Pexels)
-
निर्यातकों और किसानों के लिए बड़ा झटका
हालांकि जापान भारत का सबसे बड़ा आम बाजार नहीं है, लेकिन वहां भारतीय आमों को प्रीमियम कीमत मिलती है। ऐसे में यह बैन निर्यातकों के लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है। इस साल आम उत्पादक पहले से ही कई मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी और अनियमित मौसम की वजह से अल्फांसो आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। (Photo Source: Pexels) -
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार कई इलाकों में 85-90 प्रतिशत तक फसल प्रभावित हुई है। इसके अलावा वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के कारण फ्रेट कॉस्ट और रेफ्रिजरेटेड कंटेनर्स की कीमतें भी बढ़ गई हैं, जिससे आमों का निर्यात और महंगा हो गया है। (Photo Source: Pexels)
-
क्या फिर शुरू हो पाएगा निर्यात?
फिलहाल जापान की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि बैन कब हटेगा। जापानी अधिकारियों ने कहा है कि जब तक भारतीय वेपर हीट ट्रीटमेंट सुविधाओं में ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स बेहतर नहीं किए जाते, तब तक आमों का आयात निलंबित रहेगा। (Photo Source: Pexels) -
भारतीय निर्यातक और मैंगो ग्रोअर एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि जापानी अधिकारियों से बातचीत जारी है और समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल के सीजन में स्थिति सामान्य होना मुश्किल दिख रहा है। (Photo Source: Pexels)
-
भारत के लिए कितना अहम है आम निर्यात?
भारत हर साल लगभग 26 से 28 मिलियन मीट्रिक टन आम पैदा करता है, लेकिन इसका केवल एक छोटा हिस्सा ही निर्यात किया जाता है। भारतीय आम यूएई, यूएस, यूके, कुवैत, कतर और जापान जैसे देशों में भेजे जाते हैं। जापान भले ही छोटा बाजार हो, लेकिन वहां मिलने वाली ऊंची कीमतें भारतीय निर्यातकों के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। (Photo Source: Pexels)
(यह भी पढ़ें: सब्जियों का ऊपरी हिस्सा क्यों काटकर फेंक देते हैं लोग? रसोई की पुरानी आदत के पीछे छिपा है साइंस)