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गुड़ी पड़वा के अवसर पर महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में उत्साह और पारंपरिक रंग देखने को मिले। यह पर्व मराठी और कोंकणी हिंदुओं के लिए नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। खासतौर पर नवी मुंबई और नागपुर में भव्य आयोजन और शोभायात्राएं निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। (PTI Photo)
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इस खास दिन महिलाएं पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों में सजी-धजी नजर आईं। सड़कों पर रंगोली, ढोल-ताशों की गूंज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को और भी उत्सवमय बना दिया। हर घर के बाहर ‘गुड़ी’ (ध्वज) स्थापित किया गया, जिसे सुख-समृद्धि और विजय का प्रतीक माना जाता है। (PTI Photo)
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गुड़ी पड़वा की खास पहचान घरों में ‘गुड़ी’ स्थापित करने की परंपरा है। यह एक बांस की लंबी डंडी पर रंगीन कपड़ा, नीम और आम के पत्ते, फूलों की माला और ऊपर से तांबे या चांदी के कलश से सजाई जाती है। इसे घर के प्रवेश द्वार पर लगाया जाता है, जो विजय, समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। (Express Photo by Akash Patil)
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी नागपुर में आयोजित भव्य शोभायात्रा में भाग लिया और लोगों को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पर्व न केवल हमारी परंपराओं को जीवित रखता है, बल्कि समाज में एकता और सकारात्मक ऊर्जा भी लाता है। (PTI Photo)
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इस अवसर पर प्रसिद्ध मराठी एक्ट्रेस सई ताम्हणकर भी उत्सव में शामिल हुईं। उनके साथ हजारों लोग पारंपरिक परिधानों में शामिल होकर इस सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बने। (PTI Photo)
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गुड़ी पड़वा का धार्मिक महत्व भी बेहद खास है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी। साथ ही इसे भगवान राम की अयोध्या वापसी और राजा शालिवाहन की विजय से भी जोड़ा जाता है। इस दिन गुड़ी फहराना बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। (PTI Photo)
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त्योहार के दौरान लोग विशेष पकवान भी बनाते हैं, जिसमें नीम के पत्ते, गुड़, इमली और मसालों का मिश्रण शामिल होता है। यह जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों का प्रतीक है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। (PTI Photo)
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नागपुर में निकली शोभायात्रा में लेजीम नृत्य, वर्करी समूह और विभिन्न झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। भगवान राम और छत्रपति शिवाजी महाराज की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जिससे लोगों में सांस्कृतिक गर्व की भावना और मजबूत हुई। (PTI Photo)
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बता दें, यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होता है। इसे अलग-अलग राज्यों में अलग नामों से जाना जाता है, जैसे कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में उगादी, सिंधी समुदाय में चेती चांद और कश्मीरी पंडितों में नवरेह। यह दिन प्रकृति के नवजीवन और वसंत ऋतु के आगमन का संदेश देता है। (Express Photo by Akash Patil)
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कुल मिलाकर, गुड़ी पड़वा का यह पर्व परंपरा, संस्कृति और एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। इस दिन लोग नए संकल्प लेते हैं और आने वाले वर्ष के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। महाराष्ट्र में यह त्योहार पूरे उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। (Express Photo by Akash Patil)
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