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हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और प्रदूषण कम करने के लिए प्रेरित करना है। आज प्लास्टिक प्रदूषण दुनिया की सबसे बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक बन चुका है। नदियों, जंगलों, समुद्रों और यहां तक कि हमारे भोजन में भी प्लास्टिक के कण पहुंच चुके हैं। ऐसे समय में भारत के एक छोटे से राज्य ने कई दशक पहले ही प्लास्टिक के खतरे को समझते हुए बड़ा कदम उठाया था। (Photo Source: Pexels)
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भारत का पहला राज्य जिसने प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगाया, वह है सिक्किम। वर्ष 1998 में सिक्किम सरकार ने डिस्पोजेबल प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाकर देश के लिए एक मिसाल पेश की थी। उस समय देश के अधिकांश हिस्सों में प्लास्टिक बैग का व्यापक उपयोग होता था, लेकिन सिक्किम ने पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए यह साहसिक निर्णय लिया। (Photo Source: Pexels)
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सिक्किम की पहल केवल प्लास्टिक बैग तक सीमित नहीं रही। राज्य ने अपने संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर कई पर्यावरण-अनुकूल नीतियां लागू कीं। इन प्रयासों का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना और प्रदूषण को कम करना था। (Photo Source: Pexels)
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वर्ष 2016 में सिक्किम ने सरकारी कार्यालयों और सरकारी कार्यक्रमों में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर की प्लास्टिक बोतलों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगा दिया। यह कदम सिंगल-यूज प्लास्टिक पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। (Photo Source: Pexels)
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राज्य सरकार ने थर्मोकोल और स्टायरोफोम से बने डिस्पोजेबल प्लेट, कप और कटलरी के उपयोग पर भी रोक लगाई। इसके स्थान पर लोगों को पर्यावरण के अनुकूल और जैविक रूप से नष्ट होने वाले विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। (Photo Source: Pexels)
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प्लास्टिक प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए सिक्किम सरकार ने सख्त नियमों के साथ जागरूकता अभियान भी चलाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माने का प्रावधान किया गया, जिससे लोगों और व्यापारियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। (Photo Source: Pexels)
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समय के साथ राज्य के निवासियों और व्यवसायों ने दोबारा उपयोग किए जा सकने वाले उत्पादों को अपनाना शुरू कर दिया। इससे प्लास्टिक कचरे में उल्लेखनीय कमी आई और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिली। (Photo Source: Pexels)
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प्लास्टिक के विकल्प के रूप में सिक्किम ने पत्तों, बांस, बैगास और अन्य जैविक सामग्री से बने उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया। ये सामग्री पर्यावरण के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं और आसानी से नष्ट हो जाती हैं। (Photo Source: Pexels)
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सिक्किम की पर्यावरणीय उपलब्धियां केवल प्लास्टिक नियंत्रण तक सीमित नहीं हैं। वर्ष 2016 में यह भारत का पहला पूर्ण जैविक (ऑर्गेनिक) राज्य बना। यहां की कृषि व्यवस्था को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से मुक्त कर टिकाऊ खेती को बढ़ावा दिया गया। (Photo Source: Pexels)
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ऑर्गेनिक खेती अपनाने से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ, बल्कि किसानों को भी बेहतर और सुरक्षित कृषि पद्धतियों का लाभ मिला। इससे राज्य की पर्यावरणीय छवि और मजबूत हुई। (Photo Source: Pexels)
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आज सिक्किम को भारत में पर्यावरण संरक्षण के सबसे सफल उदाहरणों में गिना जाता है। राज्य की नीतियों ने अन्य राज्यों और शहरों को भी सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने के लिए प्रेरित किया है। (Photo Source: Pexels)
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पिछले कुछ वर्षों में देश के कई हिस्सों में प्लास्टिक उपयोग को सीमित करने के लिए नियम बनाए गए हैं, लेकिन सिक्किम ने यह पहल बहुत पहले शुरू कर दी थी। यही कारण है कि उसे पर्यावरणीय नेतृत्व का प्रतीक माना जाता है। (Photo Source: Pexels)
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