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नेशनल बॉलपॉइंट पेन डे हर साल 10 जून को मनाया जाता है। यह दिन दुनिया के सबसे उपयोगी और लोकप्रिय लेखन उपकरणों में से एक, बॉलपॉइंट पेन, को समर्पित है। इस अवसर पर 10 जून 1943 को बॉलपॉइंट पेन के पेटेंट दाखिल किए जाने की ऐतिहासिक घटना को याद किया जाता है। आज डिजिटल युग में भी बॉलपॉइंट पेन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बना हुआ है। (Photo Source: Pexels)
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बॉलपॉइंट पेन का इतिहास
लेखन उपकरणों का इतिहास हजारों साल पुराना है। प्राचीन सभ्यताओं में लोग पत्थरों, पेड़ों की छाल और जानवरों के खोल पर लिखते थे। बाद में स्याही और कलम का इस्तेमाल शुरू हुआ। हालांकि फाउंटेन पेन और स्याहीदानी का उपयोग करना आसान नहीं था क्योंकि इनमें अक्सर स्याही फैलने और रिसने की समस्या होती थी। (Photo Source: Pexels) -
साल 1888 में अमेरिकी आविष्कारक जॉन जे. लाउड ने बॉलपॉइंट जैसी कलम का पहला पेटेंट हासिल किया था। हालांकि उनका आविष्कार व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो पाया। (Photo Source: Pexels)
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इसके बाद हंगेरियन पत्रकार लास्जलो बीरो (László Bíró) ने एक ऐसी कलम विकसित करने का विचार किया जिसमें जल्दी सूखने वाली स्याही का इस्तेमाल हो। उन्होंने देखा कि अखबारों में इस्तेमाल होने वाली स्याही जल्दी सूख जाती है और धुंधली नहीं होती। (Photo Source: Liszt Institute – Hungarian Cultural Centre Delhi/Facebook)
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अपने भाई ग्योर्गी बीरो, जो एक कैमिस्ट थे, की मदद से उन्होंने एक ऐसी कलम बनाई जिसमें निब की जगह एक छोटी धातु की गेंद (बॉल) लगी थी। कई वर्षों के परीक्षण के बाद दोनों भाइयों ने 1943 में अपने आविष्कार का पेटेंट प्राप्त किया। यही आधुनिक बॉलपॉइंट पेन की शुरुआत थी। (Photo Source: Pexels)
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कैसे लोकप्रिय हुआ बॉलपॉइंट पेन?
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स ने बॉलपॉइंट पेन का इस्तेमाल शुरू किया क्योंकि यह ऊंचाई पर भी बिना स्याही रिसे काम करता था। इसके बाद इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। (Photo Source: Pexels) -
1945 में अमेरिकी व्यवसायी मिल्टन रेनॉल्ड्स ने अमेरिका में ‘Reynolds Rocket’ नाम से बॉलपॉइंट पेन लॉन्च किया। शुरुआत में यह एक महंगा उत्पाद था, लेकिन धीरे-धीरे इसका उत्पादन बढ़ा और कीमतें कम होती गईं। (Photp Source: @newellbrands/instagram)
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साल 1950 में फ्रांसीसी कंपनी BIC ने कम कीमत वाला Bic Cristal पेन लॉन्च किया, जिसने बॉलपॉइंट पेन को आम लोगों तक पहुंचा दिया। आज यह दुनिया के सबसे अधिक बिकने वाले पेन में शामिल है। (Photo Source: Pexels)
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अंतरिक्ष तक पहुंचा बॉलपॉइंट पेन
बॉलपॉइंट पेन का सफर केवल स्कूलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा। बाद में पॉल सी. फिशर ने ‘स्पेस पेन’ विकसित किया, जिसे नासा ने प्रमाणित किया। यह पेन शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity), अत्यधिक तापमान और विभिन्न सतहों पर भी लिख सकता था। अंतरिक्ष यात्रियों ने इसका उपयोग अंतरिक्ष मिशनों में किया। (Photo Source: Pexels) -
क्यों खास है बॉलपॉइंट पेन?
यह सस्ता, टिकाऊ और उपयोग में आसान है। स्याही जल्दी सूखती है, जिससे लिखावट धुंधली नहीं होती। फाउंटेन पेन की तुलना में इसमें स्याही रिसने की संभावना कम होती है। छात्रों, शिक्षकों, लेखकों और कार्यालय कर्मचारियों के लिए यह सबसे भरोसेमंद लेखन उपकरण है। आज भी दुनिया भर में हर साल अरबों बॉलपॉइंट पेन बेचे जाते हैं। (Photo Source: Pexels) -
डिजिटल युग में भी क्यों जरूरी है पेन?
मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग के बावजूद हस्तलिखित नोट्स का महत्व कम नहीं हुआ है। कई शोध बताते हैं कि हाथ से लिखने से याददाश्त बेहतर होती है और रचनात्मकता को बढ़ावा मिलता है। यही वजह है कि बॉलपॉइंट पेन आज भी शिक्षा, कला, व्यवसाय और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। (Photo Source: Pexels) -
नेशनल बॉलपॉइंट पेन डे कैसे मनाएं?
अपनी पसंदीदा डायरी या नोटबुक में कुछ लिखें। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को हस्तलिखित पत्र भेजें। बच्चों को बॉलपॉइंट पेन के इतिहास के बारे में बताएं। अपने पुराने पेन संग्रह को व्यवस्थित करें। बॉलपॉइंट पेन से स्केचिंग या ड्राइंग करने का प्रयास करें। (Photo Source: Pexels)
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