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भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर रोक लगा दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह प्रतिबंध कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी पर लागू होगा। सरकार का मानना है कि आने वाले समय में चीनी उत्पादन मांग से कम रह सकता है, इसलिए घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
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भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कमजोर पैदावार ने चिंता बढ़ा दी है। एल नीनो और अनिश्चित मानसून के कारण अगले सीजन में भी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से सरकार ने निर्यात रोककर देश के भीतर पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने का फैसला किया है।
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चीनी उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ भारत की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति भी इस फैसले की एक बड़ी वजह है। सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिसके लिए बड़ी मात्रा में गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में हो रहा है। इससे चीनी उत्पादन पर दबाव बढ़ रहा है और घरेलू बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
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सरकार को खाद्य महंगाई बढ़ने का भी डर है। पहले से ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपये की कमजोरी और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में निर्यात जारी रहने से घरेलू कीमतों पर और दबाव पड़ सकता था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घरेलू मांग लगभग 280 लाख टन तक पहुंच सकती है, जबकि कुल उपलब्धता सीमित रहने का अनुमान है। (Photo Source: Pexels)
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यही कारण है कि सरकार ने ‘रिस्ट्रिक्टेड’ कैटेगरी से हटाकर चीनी निर्यात को ‘प्रोहिबिटेड’ कैटेगरी में डाल दिया। इस फैसले का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा। भारत एशिया और अफ्रीका के कई देशों को चीनी निर्यात करता है। ऐसे में निर्यात रुकने से वैश्विक बाजार में सप्लाई कम होगी और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी आ सकती है। घोषणा के तुरंत बाद न्यूयॉर्क और लंदन के शुगर फ्यूचर्स में बढ़त देखी गई। (Photo Source: Pexels)
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चीनी की कीमतों और सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंता के बीच भारतीय रसोई में पारंपरिक मिठास वाले विकल्पों की चर्चा फिर तेज हो गई है। कई ऐसे प्राकृतिक स्वीटनर हैं जो स्वाद के साथ पोषण भी देते हैं और लंबे समय से भारतीय खानपान का हिस्सा रहे हैं। (Photo Source: Pexels)
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गुड़
गुड़ भारतीय घरों में सदियों से इस्तेमाल होता आ रहा है। सर्दियों में गुड़ का सेवन खास तौर पर फायदेमंद माना जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स पाए जाते हैं, जो सफेद चीनी में नहीं होते। इसका गाढ़ा, कैरामेल जैसा स्वाद चाय, दलिया, रोटी और मिठाइयों को अलग स्वाद देता है। आप गुड़ का उपयोग दलिया, खीर या गुड़ वाली रोटी बनाने में कर सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
पाम शुगर
पाम शुगर यानी ताड़ की चीनी दक्षिण भारतीय और तटीय इलाकों की रेसिपीज में काफी इस्तेमाल होती है। इसका स्वाद गुड़ से हल्का होता है और यह चाय, पायसम, पुडिंग और सॉस में आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है। नारियल के दूध के साथ ताड़ की चीनी मिलाकर स्वादिष्ट खीर बनाई जा सकती है। (Photo Source: Pexels) -
खजूर
खजूर आजकल सबसे लोकप्रिय हेल्दी स्वीटनर बनता जा रहा है। इसमें फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता है। आजकल कई लोग खजूर का पेस्ट बनाकर केक, स्मूदी, शेक, पैनकेक और मिठाइयों में इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे रिफाइंड शुगर की जरूरत काफी कम हो जाती है। (Photo Source: Pexels) -
शहद
शहद सदियों से इस्तेमाल किया जाने वाला प्राकृतिक स्वीटनर है। यह चाय, गर्म पानी, दही और फलों के साथ अच्छी तरह मेल खाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं। हालांकि शहद को बहुत ज्यादा गर्म करना सही नहीं माना जाता, क्योंकि इससे इसके पोषक तत्व कम हो सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
नारियल चीनी
कोकोनट शुगर यानी नारियल चीनी हेल्थ-कॉन्शियस लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसका स्वाद हल्का कैरेमल जैसा होता है और यह चाय, कॉफी और बेकिंग में आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्य चीनी से कम माना जाता है। (Photo Source: Pexels) -
फलों की प्यूरी
केला, आम, सेब और अंजीर जैसी फलों की प्यूरी भी चीनी का अच्छा विकल्प बन सकती है। यह प्राकृतिक मिठास के साथ फाइबर और टेक्सचर भी देती है। बच्चों के स्नैक्स, पैनकेक, ओट्स और डेजर्ट में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। (Photo Source: Pexels)
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