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भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां खेती की रीढ़ माने जाते हैं उर्वरक यानी खाद। धान, गेहूं, गन्ना, दालें या सब्जियां, हर फसल की अच्छी पैदावार के लिए किसानों को यूरिया, डीएपी, पोटाश और अन्य उर्वरकों की जरूरत पड़ती है। लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल उठता है- क्या खाद की कमी हो जाएगी? (Photo Source: Pexels)
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हाल के समय में ईरान और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बाद यही चिंता फिर सामने आई है। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कहा कि भारत में खाद्यान्न और उर्वरकों की कोई कमी नहीं है। (Photo Source: Pexels)
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उन्होंने नई दिल्ली में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा के साथ SEHAT (Science Excellence for Health through Agriculture Transformation) पहल की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार खाद सुरक्षा और स्वस्थ कृषि व्यवस्था के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। (Photo Source: Pexels)
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भारत में कितनी खाद की जरूरत होती है?
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उर्वरक उपभोक्ता और तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। वर्ष 2023-24 में देश में कुल 503.35 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का उत्पादन हुआ। गर्मियों और खरीफ सीजन में खेती के लिए खाद की मांग तेजी से बढ़ती है। (Photo Source: Pexels) -
रसायन और उर्वरक मंत्रालय के अनुसार, आगामी फसल सीजन के लिए देश को करीब 3.9 करोड़ टन खाद की आवश्यकता होगी। सरकार के मुताबिक फिलहाल भारत के पास लगभग 18 मिलियन मीट्रिक टन यानी 1.8 करोड़ टन खाद का स्टॉक मौजूद है। यह पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है। पिछले वर्ष इसी समय यह स्टॉक करीब 14.7 मिलियन टन था। (Photo Source: Pexels)
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भारत खुद कितना खाद बनाता है?
देश में यूरिया का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। भारत यूरिया उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चुका है और करीब 87 प्रतिशत जरूरत देश के भीतर पूरी हो जाती है। वर्तमान में भारत में हर महीने लगभग 1.8 मिलियन टन यूरिया का उत्पादन हो रहा है। (Photo Source: Pexels) -
कुछ बड़े प्लांट मेंटेनेंस के बाद फिर से चालू हो रहे हैं, इसलिए आने वाले महीनों में उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और पोटाश के मामले में भारत अभी भी विदेशों पर काफी निर्भर है। पोटाश की लगभग 100 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी होती है, जबकि डीएपी का बड़ा हिस्सा विदेशों से आता है। (Photo Source: Pexels)
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भारत खाद कहां-कहां से मंगाता है?
पहले भारत यूरिया और डीएपी के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर था। युद्ध से पहले भारत अपने यूरिया आयात का 20 से 30 प्रतिशत और डीएपी का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व से खरीदता था। लेकिन अब भारत ने सप्लाई के कई विकल्प तैयार कर लिए हैं। (Photo Source: Pexels) -
भारत रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र और टोगो जैसे देशों से खाद और कच्चा माल मंगा रहा है। डीएपी के लिए जरूरी फॉस्फोरिक एसिड और रॉक फॉस्फेट मुख्य रूप से मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब, ट्यूनीशिया और मिस्र से आता है। वहीं अमोनिया और गैस जैसे कच्चे पदार्थ कतर, ओमान और रूस से आयात किए जाते हैं। (Photo Source: Pexels)
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खाद बनाने में किन चीजों की जरूरत होती है?
उर्वरक उत्पादन के लिए कई महत्वपूर्ण कच्चे माल की जरूरत होती है। इनमें सबसे अहम है तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG)। भारत अपनी लगभग 50 प्रतिशत LNG जरूरत मध्य पूर्व से पूरी करता है। डीएपी बनाने के लिए फॉस्फोरिक एसिड और अमोनिया का इस्तेमाल होता है। (Photo Source: Pexels) -
रॉक फॉस्फेट को प्रोसेस करके फॉस्फोरिक एसिड बनाया जाता है, फिर इसे अमोनिया के साथ रिएक्ट कर डीएपी तैयार किया जाता है। DAP में लगभग 18 प्रतिशत नाइट्रोजन और 46 प्रतिशत फॉस्फेट होता है, इसलिए यह फसलों के शुरुआती विकास के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। (Photo Source: Pexels)
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सरकार ने क्या इंतजाम किए हैं?
केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं। जैसे कि फरवरी में ही अतिरिक्त 1.3 मिलियन टन यूरिया आयात के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया गया। (Photo Source: Pexels) -
इसके साथ ही रूस से 2.8 मिलियन टन खाद आयात के लिए लंबी अवधि का समझौता किया गया। सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों का इस्तेमाल बढ़ाया गया। सरकार यूरिया और डीएपी को भारी सब्सिडी पर उपलब्ध कराती रहेगी। (Photo Source: Pexels)
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भारत में कौन-कौन सी खाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं?
भारत में खेती के लिए कई तरह के उर्वरकों का उपयोग होता है, जैसे कि यूरिया, डीएपी (DAP), पोटाश (MOP), एनपीके खाद, सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP), अमोनियम सल्फेट, जिंक सल्फेट, मैग्नीशियम सल्फेट, और जिप्सम। अब किसान जैविक खेती और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स की ओर भी बढ़ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक मिट्टी परीक्षण के आधार पर संतुलित खाद उपयोग की सलाह देते हैं। (Photo Source: Pexels) -
क्या किसानों को चिंता करने की जरूरत है?
फिलहाल सरकार का कहना है कि देश में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और खरीफ सीजन के लिए तैयारी पूरी है। हालांकि वैश्विक हालात, कच्चे माल की कीमतें और सप्लाई चेन आने वाले समय में चुनौती बन सकती हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत को दीर्घकाल में आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। साथ ही संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और वैकल्पिक पोषक तत्वों को बढ़ावा देना जरूरी होगा। (Photo Source: Pexels)
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