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भारत की वस्त्र परंपरा उसकी सांस्कृतिक विविधता की तरह ही बेहद समृद्ध और रंग-बिरंगी है। देश के हर क्षेत्र की अपनी अलग बुनाई, डिजाइन और तकनीक है, जो सदियों से चली आ रही है। इन अनोखी परंपराओं को सुरक्षित रखने और उनकी पहचान बनाए रखने के लिए GI टैग बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह टैग किसी उत्पाद को उसके मूल स्थान से जोड़ता है, जिससे उसकी नकल करना आसान नहीं होता और कारीगरों को भी पहचान मिलती है। आइए जानते हैं भारत के कुछ प्रमुख GI-टैग्ड हैंडलूम टेक्सटाइल्स के बारे में, जो अपने-अपने क्षेत्र की कला और परंपरा को दर्शाते हैं-
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बनारसी साड़ी – उत्तर प्रदेश
वाराणसी की बनारसी साड़ी भारत की सबसे प्रसिद्ध और शाही साड़ियों में गिनी जाती है। इसमें इस्तेमाल होने वाला रेशम, मुगलकालीन डिजाइन और जरी का बारीक काम इसे खास बनाता है। शादी-ब्याह और खास मौकों पर यह महिलाओं की पहली पसंद होती है। (Photo Source: Pexels) -
कांचीपुरम सिल्क साड़ी – तमिलनाडु
तमिलनाडु के कांचीपुरम शहर में बनी यह साड़ी अपनी मजबूत बनावट और चमकीले, कंट्रास्ट बॉर्डर के लिए जानी जाती है। इसकी खासियत यह है कि साड़ी के बॉडी और बॉर्डर को अलग-अलग बुनकर बाद में जोड़ा जाता है, जिससे यह लंबे समय तक टिकाऊ रहती है। (Photo Source: Pexels) -
चंदेरी फैब्रिक – मध्य प्रदेश
चंदेरी का कपड़ा सिल्क और कॉटन का मिश्रण होता है, जो इसे हल्का और चमकदार बनाता है। हल्का, पारदर्शी और चमकदार बनावट वाला यह फैब्रिक गर्मियों के लिए बेहद आरामदायक माना जाता है। इसकी नाजुक बनावट इसे खास बनाती है। (Photo Source: Pexels) -
पटोला फैब्रिक – गुजरात
गुजरात के पाटन का पटोला दुनिया के सबसे जटिल टेक्सटाइल्स में से एक माना जाता है। इसमें डबल इकट तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिसमें धागों को बुनाई से पहले ही रंगा जाता है। इसके जियोमेट्रिक डिजाइन बेहद आकर्षक होते हैं और इसे बनाने में महीनों का समय लगता है। (Photo Source: Pexels) -
भागलपुरी सिल्क – बिहार
भागलपुर का सिल्क, जिसे टसर सिल्क भी कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक और टेक्सचर के लिए प्रसिद्ध है। यह हल्का और आरामदायक होता है, इसलिए ऑफिस और फेस्टिव दोनों तरह के मौकों के लिए उपयुक्त है। (Photo Source: Pexels) -
बालूचरी साड़ी – पश्चिम बंगाल
बालूचरी साड़ियों की खासियत इनके पल्लू पर बने पौराणिक कथाओं के चित्र होते हैं। ये साड़ियां रेशम से बनी होती हैं और इन पर बारीक बुनाई के जरिए कहानियां उकेरी जाती हैं। इनमें रामायण और महाभारत जैसे प्रसंगों को बारीकी से दर्शाया जाता है। यह साड़ी कला और परंपरा का सुंदर संगम है। (Photo Source: Pexels)
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