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क्या आपने कभी सोचा है कि जो लोग हमेशा लेट आते हैं, हर बात पर ज्ञान देने लगते हैं या फिर सिर्फ रहने की जगह के लिए रिश्ते बनाते हैं, उनके लिए भी कोई नाम हो सकता है? सुनने में अजीब लगे, लेकिन सच यही है कि ऐसी इंसानी आदतों और व्यवहारों के लिए भाषा में पहले से शब्द मौजूद हैं। (Photo Source: Pexels)
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इन शब्दों को जानने के बाद आप इन्हें अपने आसपास हर जगह पहचानने लगेंगे, ऑफिस में, दोस्तों के बीच, सोशल मीडिया पर और कभी-कभी खुद में भी। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ दिलचस्प और मजेदार पर्सनैलिटी टाइप्स के बारे में। (Photo Source: Pexels)
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होबोसेक्शुअल (Hobosexual)
होबोसेक्शुअल उस व्यक्ति को कहा जाता है जो किसी के साथ रिश्ता सिर्फ इसलिए बनाता है ताकि उसे रहने की जगह मिल सके। ऐसे लोग अक्सर बहुत जल्दी आपके घर में शिफ्ट हो जाते हैं और रिश्ता खत्म होते ही नई छत की तलाश शुरू कर देते हैं। (Photo Source: Pexels) -
टिड्सऑप्टिमिस्ट (Tidsoptimist)
ये वो लोग होते हैं जो दिल से मानते हैं कि समय अपने आप बढ़ जाएगा। “अभी तो बहुत टाइम है” इनका फेवरेट डायलॉग होता है। एक काम, एक स्टॉप, एक कॉल, और फिर ये हमेशा लेट होते हैं। (Photo Source: Pexels) -
अल्ट्राक्रेपिडेरियन (Ultracrepidarian)
ऐसा व्यक्ति जो हर विषय पर राय देने से खुद को रोक नहीं पाता, भले ही उसे उस विषय की असल जानकारी हो या नहीं। राजनीति, साइंस, हेल्थ हर टॉपिक पर एक्सपर्ट बनने वाले लोग इसी कैटेगरी में आते हैं। (Photo Source: Pexels) -
फ्लिबर्टिजिबेट (Flibbertigibbet)
ये लोग बहुत तेज बोलते हैं, बातों के बीच में टॉपिक बदलते रहते हैं और एक जगह टिककर बैठना इनके लिए मुश्किल होता है। थोड़े अराजक, बेहद एनर्जेटिक और अजीब-सी चार्म के साथ ये लोग भीड़ में अलग ही नजर आते हैं। (Photo Source: Pexels) -
वॉलफ्लावर (Wallflower)
सोशल गैदरिंग या पार्टी में जो लोग कोने में खड़े रहते हैं, कम बोलते हैं और भीड़ से दूरी बनाए रखते हैं, उन्हें वॉलफ्लावर कहा जाता है। ये शर्मीले या इंट्रोवर्ट स्वभाव के लोग होते हैं, जिन्हें लाइमलाइट नहीं बल्कि शांति पसंद होती है। (Photo Source: Pexels) -
स्मेल-फीस्ट (Smell-Feast)
इतिहास का एक मजेदार शब्द, जो ऐसे व्यक्ति के लिए इस्तेमाल होता है जो जहां भी मुफ्त का खाना हो, वहां जरूर पहुंच जाते हैं। शादी, पार्टी या दावत, इन्हें सबकी खबर रहती है। (Photo Source: Pexels) -
शब्द सिर्फ नाम नहीं, पहचान हैं
इन शब्दों की खास बात यह है कि ये हमें दूसरों को जज करने के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए एक नया नजरिया देते हैं। कभी-कभी हम खुद भी इनमें से किसी एक पर्सनैलिटी से मेल खा सकते हैं। भाषा हमें इंसानी व्यवहार को पहचानने, समझने और नाम देने की ताकत देती है। तो अगली बार जब कोई दोस्त फिर से लेट हो जाए या हर बात पर राय देने लगे, तो शायद अब आपके पास उसे समझने के लिए एक बिल्कुल सही शब्द होगा। (Photo Source: Pexels)
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