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पिछले कुछ समय से कैप्सूल होटल काफी चर्चा में है। यह ऐसा होटल होता है जिसमें सामान्य कमरों की बजाय छोटे-छोटे कैप्सूल या पॉड बनाए जाते हैं, जहां एक व्यक्ति आराम से सो सकता है। कम जगह में अधिक लोगों को ठहराने की इस अनोखी व्यवस्था के चलते इसकी चर्चा होती रहती है। ऐसे में आइए जानते हैं दुनिया में पहला कैप्सूल होटल कहा खुला था और किसने की थी इसकी शुरुआत। (Photo Source: Freepik)
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इस देश में हुई शुरुआत
कैप्सूल होटल की शुरुआत साल 1979 में जापान के ओसाका शहर में हुई थी। इसका उद्देश्य उन लोगों को सस्ती और सुविधाजनक जगह उपलब्ध करना था जो देर रात तक काम करने के कारण घर नहीं जा पाते थे। (Photo Source: Pexels) -
कैप्सूल होटलों की शुरुआत जापानी वास्तुकार किशो कुरोकावा द्वारा डिजाइन किया गया था। दरअसल, उस दौरान जब यात्रियों की देर रात ट्रेन छूट जाती थी, तो उन्हें रात बिताने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ती थी। क्योंकि होटल काफी महंगे थे। इन्हीं यात्रियों और बजट पर्यटकों को सस्ते और सुविधाजनक सोने की जगह देने के उद्देश्य से इसकी शुरुआत की गई थी। (Photo Source: Pexels)
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हालांकि, शुरुआत में इसका इस्तेमाल ट्रेन जूट जाने वाले यात्री, ऑफिस कर्मचारी और बिजनेस ट्रैवलर्स द्वारा किया जाता था, लेकिन आज इसका इस्तेमाल दुनिया भर से आने वाला पर्यटक भी करते हैं। (Photo Source: Freepik)
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कैसे दिखते हैं
कैप्सूल होटल में सामान्य होटल की तरह बड़े कमरे नहीं होते हैं। इसके बजाए एक बड़े हॉल में दो या तीन मंजिल तक छोटे-छोटे कैप्सूल बनाए जाते हैं। एक कैप्सूल का आकार लगभग इतना होता है कि व्यक्ति आराम से लेट और बैठ सकता है। (Photo Source: Freepik) -
मिलती हैं ये सुविधाएं
छोटे होने के बावजूद कैप्सूल कमरा काफी सुविधाजनक होता है। इसमें आरामदायक गद्दा, तकिया, कंबल, पढ़ने की लाइट, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, एयर कंडिशनिंग या वेंटिलेशन से लेकर वाई-फाई तक जैसी सुविधाएं मिलती हैं। (Photo Source: Freepik) -
कैप्सूल होटल का आइडिया अब दुनिया के कई और देशों में भी पसंद किया जा रहा है। भारत में नोएड, मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में भी कैप्यूल होटल का व्यवसाय शुरु हो चुका है। (Photo Source: Pexels)
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