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आज डिशवॉशर आधुनिक किचन का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका आविष्कार किसी वैज्ञानिक लैब में नहीं बल्कि एक महिला की नाराजगी और जिद से हुआ था? दरअसल, बार-बार बर्तनों के टूटने और खराब होने से परेशान होकर एक महिला ने ऐसी मशीन बना डाली जिसने पूरी दुनिया की रसोई बदल दी। आइए जानते हैं डिशवॉशर के आविष्कार की हैरान कर देने वाली कहानी।
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एक छोटी सी परेशानी से शुरू हुई बड़ी खोज
19वीं सदी के आखिर में अमेरिका की जोसेफीन कोक्रेन नाम की महिला अपने महंगे और नाजुक चाइना क्रॉकरी के टूटने से बेहद परेशान थीं। घर के नौकर जब बर्तन साफ करते थे तो अक्सर उनके कीमती बर्तन चिप हो जाते थे। इसी समस्या ने जोसेफीन को सोचने पर मजबूर किया कि आखिर ऐसा तरीका क्यों न बनाया जाए जिससे बर्तन बिना नुकसान के साफ हो सकें। -
घर के पीछे बने शेड में तैयार हुआ पहला मॉडल
जोसेफीन कोक्रेन ने मैकेनिक जॉर्ज बटर्स के साथ मिलकर अपने घर के पीछे बने एक छोटे से शेड में डिशवॉशर का पहला प्रोटोटाइप तैयार किया। उन्होंने ऐसी मशीन बनाई जिसमें गर्म पानी के प्रेशर से बर्तनों की सफाई होती थी। उस समय के मुकाबले यह तकनीक काफी अलग और प्रभावी थी। -
सिर्फ आविष्कार नहीं, खुद शुरू किया बिजनेस
जोसेफीन सिर्फ आविष्कारक ही नहीं थीं, बल्कि एक सफल बिजनेसवुमन भी बनीं। उन्होंने अपनी मशीन को 1893 के शिकागो वर्ल्ड फेयर में प्रदर्शित किया, जहां इस आविष्कार ने लोगों का ध्यान खींचा। होटल और बड़े रेस्टोरेंट्स ने इसमें दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी। (Photo Source: Pexels) -
इससे पहले भी बने थे डिशवॉशर
हालांकि डिशवॉशर का विचार जोसेफीन से पहले भी सामने आ चुका था। साल 1850 में जोएल हॉटन ने लकड़ी से बनी एक हैंड-क्रैंक मशीन का पेटेंट कराया था, लेकिन वह स्लो और इमप्रैक्टिकल थी। इसके बाद 1865 में एल.ए. एलेक्जेंडर ने भी एक डिजाइन पेश किया, लेकिन वह भी सफल नहीं हो पाया। जोसेफीन कोक्रेन की मशीन इसलिए खास बनी क्योंकि वह वास्तव में काम करती थी और बर्तनों को सुरक्षित तरीके से साफ कर सकती थी। (Photo Source: Pexels) -
यूरोप और ब्रिटेन में भी हुए नए प्रयोग
1929 में यूरोप का पहला इलेक्ट्रिक हाउसहोल्ड डिशवॉशर कंपनी ‘Miele’ ने बनाया। वहीं ब्रिटेन में विलियम हॉवर्ड लिवेन्स ने 1924 में घरेलू उपयोग के लिए छोटा नॉन-इलेक्ट्रिक डिशवॉशर तैयार किया। इसमें दरवाजा, वायर रैक और घूमने वाला स्प्रे सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाओं की शुरुआत हुई। (Photo Source: Pexels) -
1950 के बाद तेजी से बढ़ी लोकप्रियता
शुरुआत में डिशवॉशर सिर्फ अमीर घरों और होटलों तक सीमित था। लेकिन 1950 के दशक के बाद, जब घरों में बेहतर प्लंबिंग और मॉड्यूलर किचन का चलन बढ़ा, तब डिशवॉशर आम घरों तक पहुंचने लगा। 1970 तक अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के अधिकांश घरों में डिशवॉशर इस्तेमाल होने लगा। 2012 तक अमेरिका और जर्मनी के 75 प्रतिशत से ज्यादा घरों में डिशवॉशर मौजूद था। (Photo Source: Pexels) -
कैसे काम करता है डिशवॉशर?
डिशवॉशर एक ऐसी मशीन है जो बर्तनों, कटलरी और कुकवेयर को ऑटोमैटिक तरीके से साफ करती है। इसमें गर्म पानी और डिटर्जेंट को तेज प्रेशर से बर्तनों पर स्प्रे किया जाता है। मशीन में लगे घूमने वाले स्प्रे आर्म्स गंदगी हटाते हैं और फिर बर्तनों को रिंस और ड्राई किया जाता है। आज के आधुनिक डिशवॉशर में ‘सॉइल सेंसर’ जैसी तकनीक भी होती है, जो यह पहचान लेती है कि बर्तन कितने गंदे हैं और उसी हिसाब से पानी व बिजली का उपयोग करती है। (Photo Source: Pexels) -
आज भी जारी है तकनीक का विकास
समय के साथ डिशवॉशर पहले से ज्यादा स्मार्ट और एनर्जी एफिशिएंट हो चुके हैं। अब इनमें पानी और बिजली बचाने वाले फीचर्स, अलग-अलग वॉश मोड और बेहतर ड्राइंग सिस्टम दिए जाते हैं। हालांकि 2022 से 2025 के बीच कई देशों में इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने के कारण डिशवॉशर की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई। (Photo Source: Pexels) -
एक घरेलू परेशानी ने बदल दी दुनिया
डिशवॉशर की कहानी यह साबित करती है कि कई बड़े आविष्कार रोजमर्रा की छोटी समस्याओं से जन्म लेते हैं। जोसेफीन कोक्रेन की नाराजगी और जिद ने न सिर्फ उनके बर्तनों को बचाया, बल्कि दुनिया भर के करोड़ों लोगों का समय और मेहनत भी बचा दी। आज यह मॉडर्न लाइफस्टाइल का एक अहम हिस्सा माना जाता है। (Photo Source: Pexels)
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