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अक्सर हमें लगता है कि जब भी हमें किसी खास चीज को खाने की इच्छा होती है तो इसका मतलब सिर्फ भूख लगना है। लेकिन मनोविज्ञान के अनुसार फूड क्रेविंग्स यानी अचानक किसी खास खाने की इच्छा का संबंध केवल पेट से नहीं बल्कि हमारे दिमाग और भावनाओं से भी होता है। कई बार हमारी मानसिक स्थिति, तनाव, बचपन की आदतें और भावनात्मक अनुभव यह तय करते हैं कि हमें क्या खाने का मन करेगा। (Photo Source: Pexels)
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एक्सपर्ट्स के अनुसार फूड क्रेविंग्स वास्तव में हमारे दिमाग के संकेत होते हैं। जब हम तनाव, अकेलापन या भावनात्मक दबाव महसूस करते हैं तो हमारा दिमाग ऐसे खाद्य पदार्थों की ओर आकर्षित होता है जो हमें तुरंत संतुष्टि या आराम का एहसास दिला सकें। (Photo Source: Pexels)
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कुरकुरी चीजें खाने की इच्छा का मतलब
अगर आपको अक्सर चिप्स, नमकीन या अन्य कुरकुरी चीजें खाने का मन करता है तो यह दबे हुए गुस्से या तनाव का संकेत हो सकता है। कुरकुरी चीजों को चबाने की क्रिया शरीर में जमा तनाव को कम करने में मदद कर सकती है। (Photo Source: Pexels) -
तीखा खाना पसंद करने का कारण
जो लोग बहुत ज्यादा मसालेदार या तीखा खाना पसंद करते हैं, वे अक्सर नई चीजें अनुभव करने वाले और रोमांच पसंद व्यक्तित्व के होते हैं। मनोविज्ञान के अनुसार तीखा खाना खाने से दिमाग में उत्साह और उत्तेजना की भावना बढ़ती है। (Photo Source: Pexels) -
भावनात्मक स्थिति और गर्म खाना
कई लोग जब उदास या अकेला महसूस करते हैं तो उन्हें सूप, चाय या घर का गर्म खाना खाने की इच्छा होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्म भोजन मनोवैज्ञानिक रूप से आराम, सुरक्षा और देखभाल से जुड़ा हुआ होता है। (Photo Source: Pexels) -
ध्यान भटकाकर खाना क्यों बढ़ाता है भूख
अगर आप मोबाइल देखते हुए या टीवी देखते हुए खाना खाते हैं तो दिमाग उस भोजन को सही तरह से याद नहीं रख पाता। इसकी वजह से थोड़ी देर बाद ही फिर से भूख लगने का एहसास हो सकता है। (Photo Source: Pexels) -
मीठा खाने की इच्छा और भावनाएं
जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर या उदास महसूस करता है तो मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है। इसका कारण यह है कि चीनी शरीर में सेरोटोनिन नामक ‘फील-गुड’ हार्मोन को थोड़े समय के लिए बढ़ा देती है, जिससे मन बेहतर महसूस करता है। (Photo Source: Pexels) -
प्लेट में रखा खाना पूरा खत्म करने की आदत
कई लोगों की आदत होती है कि वे प्लेट में रखा खाना पूरी तरह खत्म करते हैं, भले ही पेट भर चुका हो। यह आदत अक्सर बचपन में मिले ‘खाना बर्बाद नहीं करना चाहिए’ जैसे नियमों या भोजन की कमी के अनुभव से जुड़ी होती है। (Photo Source: Pexels) -
नाश्ता छोड़ने का असर
जो लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, उनमें दिन के बाद के समय में ज्यादा अस्वस्थ या जल्दबाजी में भोजन चुनने की प्रवृत्ति देखी जाती है। इससे ओवरईटिंग का खतरा भी बढ़ सकता है। (Photo Source: Pexels) -
कम्फर्ट फूड का भावनात्मक रिश्ता
कई बार हमारी पसंदीदा ‘कम्फर्ट फूड’ का स्वाद से ज्यादा संबंध हमारी यादों और भावनाओं से होता है। बचपन में खाए गए कुछ खास खाने हमें सुरक्षा और खुशी की याद दिलाते हैं। (Photo Source: Pexels) -
बार-बार वही खाना खाने की आदत
कुछ लोग लंबे समय तक एक ही तरह का खाना बार-बार खाते हैं। साइकोलोजिस्ट मानते हैं कि तनाव या अव्यवस्था भरे समय में यह आदत व्यक्ति को कंट्रोल और स्टेबिलिटी का एहसास देती है। (Photo Source: Pexels) -
धीरे-धीरे खाना खाने के फायदे
धीरे-धीरे खाना खाने वाले लोग अक्सर अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से कंट्रोल कर पाते हैं। इससे चिंता का स्तर भी कम हो सकता है और शरीर को पेट भरने का सही संकेत मिलने में मदद मिलती है। (Photo Source: Pexels) -
बार-बार स्नैकिंग का कारण
अगर किसी व्यक्ति को लगातार कुछ न कुछ खाने का मन करता रहता है तो यह हमेशा भूख का संकेत नहीं होता। कई बार यह मानसिक थकान या तनाव का परिणाम भी हो सकता है। (Photo Source: Pexels)
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