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हाल ही में जयपुर के एक स्कूल से सामने आए नौ वर्षीय बच्ची अमायरा के दुखद मामले ने एक बार फिर स्कूलों में होने वाली बुलिंग (Bullying) को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। मामले की जांच अभी जारी है, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे अक्सर अपनी परेशानी शब्दों में बताने से पहले अपने व्यवहार के जरिए उसके संकेत देने लगते हैं। इसलिए माता-पिता के लिए इन संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। (Photo Source: Pexels)
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बच्चे खुलकर क्यों नहीं बताते?
अधिकांश बच्चे बुलिंग का शिकार होने पर सीधे यह नहीं कहते कि उनके साथ गलत हो रहा है। कई बार उन्हें डर होता है कि शिकायत करने पर स्थिति और खराब हो जाएगी, कोई उन पर विश्वास नहीं करेगा या फिर उन्हें ही दोषी ठहराया जाएगा। ऐसे में वे अपने व्यवहार, भावनाओं और दिनचर्या में बदलाव के जरिए मदद की कोशिश करते हैं। (Photo Source: Pexels) -
अचानक स्कूल जाने से कतराना
यदि आपका बच्चा पहले खुशी-खुशी स्कूल जाता था, लेकिन अब रोज पेट दर्द, सिरदर्द या अन्य बहाने बनाकर स्कूल जाने से बचने की कोशिश करता है और मेडिकल जांच में कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता, तो इसे सामान्य जिद समझकर नजरअंदाज न करें। यह बुलिंग का शुरुआती संकेत हो सकता है। (Photo Source: Pexels) -
व्यवहार और मूड में अचानक बदलाव
बुलिंग का असर बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा पड़ सकता है। यदि बच्चा अचानक बहुत चुप रहने लगे, उदास दिखे, जल्दी गुस्सा हो जाए, हर समय चिंतित रहे या पहले की तुलना में अधिक भावुक हो जाए, तो यह उसकी अंदरूनी परेशानी का संकेत हो सकता है। (Photo Source: Pexels) -
खुद के बारे में नकारात्मक बातें कहना
अगर बच्चा बार-बार कहने लगे, ‘मुझे कोई पसंद नहीं करता’, ‘मैं अच्छा नहीं हूं’, ‘मेरे कोई दोस्त नहीं हैं’ या ‘सब मुझसे नफरत करते हैं’, तो इन बातों को हल्के में न लें। ऐसे वाक्य उसके आत्मविश्वास में आई गिरावट और भावनात्मक तनाव की ओर इशारा कर सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
नींद, भूख और पसंदीदा गतिविधियों में बदलाव
बुलिंग का असर बच्चे की दिनचर्या पर भी दिखाई देता है। बार-बार बुरे सपने आना, ठीक से नींद न आना, भूख कम या ज्यादा लगना, पसंदीदा खेल या हॉबी में रुचि खत्म हो जाना और स्कूल से लौटने के बाद अपने दिन के बारे में बात न करना चिंता का विषय हो सकता है। (Photo Source: Pexels) -
पढ़ाई और स्कूल एक्टिविटीज में गिरावट
यदि बच्चे के अंक अचानक कम होने लगें, वह खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों या अन्य गतिविधियों में हिस्सा लेने से बचने लगे या स्कूल के किसी विशेष पीरियड या जगह से डरने लगे, तो इसके पीछे बुलिंग जैसी समस्या हो सकती है। (Photo Source: Pexels) -
शारीरिक संकेत और सामान का बार-बार गायब होना
शरीर पर बिना वजह खरोंच या चोट के निशान, स्कूल बैग, किताबें, लंच बॉक्स या अन्य सामान का बार-बार खो जाना या टूट जाना, अतिरिक्त जेब खर्च मांगना या स्कूल की चीजें बार-बार बदलने की जरूरत पड़ना भी बुलिंग के संकेत हो सकते हैं। (Photo Source: Pexels) -
दोस्तों से दूरी बनाना
अगर बच्चा अचानक दोस्तों से मिलना-जुलना बंद कर दे, जन्मदिन या अन्य कार्यक्रमों के निमंत्रण आना बंद हो जाए, वह अकेले रहने लगे या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से भी बचने लगे, तो यह सामाजिक अलगाव का संकेत हो सकता है। (Photo Source: Pexels) -
माता-पिता क्या करें?
सबसे जरूरी है कि घर का माहौल ऐसा हो जहां बच्चा बिना डर के अपनी बात कह सके। सीधे यह पूछने के बजाय कि ‘क्या कोई तुम्हें परेशान करता है?’, ऐसे सवाल पूछें- आज स्कूल में किसके साथ समय बिताया?, क्या आज स्कूल में कुछ ऐसा हुआ जिससे तुम्हें बुरा लगा?, क्या कोई बात है जो तुम मुझसे शेयर करना चाहते हो? (Photo Source: Pexels) -
बच्चे की बात बीच में टोकने या डांटने के बजाय धैर्य से सुनें। यदि आपको लगातार ऐसे संकेत दिखाई दें, तो स्कूल के शिक्षकों और काउंसलर से बात करें और जरूरत पड़ने पर किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लें। (Photo Source: Pexels)
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