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जून का महीना दुनियाभर में प्राइड मंथ (Pride Month) के रूप में मनाया जाता है। यह महीना LGBTQ+ समुदाय की पहचान, अधिकारों और उनके संघर्षों को सम्मान देने का अवसर है। भारतीय सिनेमा ने भी समय-समय पर ऐसी कई फिल्में बनाई हैं, जिन्होंने प्रेम, पहचान और सामाजिक स्वीकृति जैसे विषयों को संवेदनशीलता और साहस के साथ पर्दे पर उतारा है। अगर आप इस प्राइड मंथ कुछ सार्थक और प्रभावशाली फिल्में देखना चाहते हैं, तो ये 7 भारतीय फिल्में आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। (Still From Film)
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फायर (1996)
दीपा मेहता निर्देशित ‘फायर’ भारतीय सिनेमा की सबसे साहसी फिल्मों में गिनी जाती है। शबाना आज़मी और नंदिता दास अभिनीत यह फिल्म दो ऐसी महिलाओं की कहानी है जो अपने असफल वैवाहिक जीवन और पितृसत्तात्मक बंधनों के बीच एक-दूसरे में प्यार और सहारा खोजती हैं। इस फिल्म ने भारत में LGBTQ+ मुद्दों पर व्यापक बहस छेड़ दी थी। (Still From Film) -
अलीगढ़ (2015)
हंसल मेहता की ‘अलीगढ़’ एक सच्ची घटना पर आधारित मार्मिक फिल्म है। इसमें मनोज बाजपेयी ने प्रोफेसर रामचंद्र सिरस का किरदार निभाया है, जिन्हें उनकी निजी जिंदगी सार्वजनिक होने के बाद नौकरी से निलंबित कर दिया जाता है। फिल्म समाज में मौजूद प्रेजुडिस और डिस्क्रिमिनेशन को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाती है। (Still From Film) -
कपूर एंड संस (2016)
‘कपूर एंड संस’ बॉलीवुड की उन फिल्मों में शामिल है जिसने LGBTQ+ किरदारों को रूढ़ियों से अलग दिखाने का प्रयास किया। फवाद खान एक सफल लेखक की भूमिका में हैं, जिसकी यौन पहचान सामने आने के बाद परिवार को अपनी सोच और प्रेजुडिस का सामना करना पड़ता है। यह फिल्म परिवार, प्रेम और स्वीकृति का खूबसूरत संदेश देती है। (Still From Film) -
एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा (2019)
सोनम कपूर और राजकुमार राव अभिनीत ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ मुख्यधारा हिंदी सिनेमा की पहली व्यावसायिक लेस्बियन प्रेम कहानी मानी जाती है। फिल्म पारिवारिक रिश्तों और पारंपरिक बॉलीवुड शैली के जरिए प्रेम और आत्मस्वीकृति का संदेश देती है। (Still From Film) -
सुपर डीलक्स (2019)
तमिल सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘सुपर डीलक्स’ में विजय सेतुपति ने शिल्पा नामक ट्रांसजेंडर महिला का किरदार निभाया है। अपने परिवार के पास लौटने वाली शिल्पा की कहानी सम्मान, पहचान और स्वीकार्यता की लड़ाई को प्रभावशाली ढंग से सामने लाती है। इस भूमिका के लिए विजय सेतुपति को खूब सराहना मिली थी। (Still From Film) -
बधाई दो (2022)
राजकुमार राव और भूमि पेडनेकर स्टारर ‘बधाई दो’ एक मनोरंजक लेकिन संवेदनशील कॉमेडी-ड्रामा है। फिल्म में एक समलैंगिक पुलिस अधिकारी और एक लेस्बियन शिक्षिका समाज और परिवार के दबाव से बचने के लिए शादी कर लेते हैं। हास्य के साथ फिल्म LGBTQ+ समुदाय की चुनौतियों और भावनाओं को बखूबी दर्शाती है। (Still From Film) -
पाइन कोन (2023)
क्वियर फिल्ममेकर ओनिर द्वारा निर्देशित ‘पाइन कोन’ एक समलैंगिक व्यक्ति के जीवन के तीन दशकों की यात्रा को दिखाती है। यह फिल्म न सिर्फ आधुनिक रिश्तों की जटिलताओं को सामने लाती है, बल्कि भारत में LGBTQ+ आंदोलन के बदलते स्वरूप को भी दर्शाती है। (Still From Film)
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