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दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 का 79वां एडिशन 12 मई से 23 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। हर साल फ्रांस के खूबसूरत ‘फ्रेंच रिवेरा’ में होने वाला यह फिल्म फेस्टिवल दुनियाभर के सिनेमा प्रेमियों और फिल्मकारों का ध्यान अपनी ओर खींचता है। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय फिल्मों ने भी कान्स में खास पहचान बनाई है। ‘ऑल दैट ब्रीथ्स’, ‘ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ और ‘होमबाउंड’ जैसी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहना मिली। अब 2026 में भी कई भारतीय फिल्में कान्स में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रही हैं। आइए जानते हैं इस साल कान्स में प्रीमियर होने वाली 6 भारतीय फिल्मों के बारे में। (Stills From Films)
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अम्मा अरियान
मलयालम सिनेमा की क्लासिक फिल्म ‘अम्मा अरियान’ को 4K में रीस्टोर कर ‘कान्स क्लासिक्स’ सेक्शन में शामिल किया गया है। 1986 में रिलीज हुई यह फिल्म निर्देशक जॉन अब्राहम की महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। कहानी पुरुषन नाम के एक युवा कार्यकर्ता की है, जो अपने साथियों के साथ एक मां को उसके बेटे हरी की मृत्यु की खबर देने निकलता है। यह यात्रा धीरे-धीरे शोक, राजनीतिक प्रतिरोध, युवा आंदोलन और वैचारिक संकट की गहरी पड़ताल बन जाती है। (Still From Film) -
बालन: द बॉय
फिल्ममेकर चिदंबरम की मलयालम फिल्म ‘बालन: द बॉय’ कान्स के ‘Marché du Film’ सेक्शन में दिखाई जाएगी। यह फिल्म एक छोटे लड़के बालन की कहानी है, जो त्याग, भावनात्मक अस्थिरता और कठिन सामाजिक परिस्थितियों के बीच अपनी पहचान तलाशने की कोशिश करता है। मां-बेटे के जटिल रिश्ते को दिखाती यह फिल्म अकेलेपन, संघर्ष और आत्मबल जैसे विषयों को छूती है। (Still From Film) -
चर्दीकला
पंजाबी सिनेमा को वैश्विक मंच पर ले जाती निर्देशक अमरजीत सिंह सरोन की फिल्म ‘चर्दीकला’ इस साल कान्स में प्रीमियर होगी। फिल्म में एमी विर्क और रूपी गिल मुख्य भूमिकाओं में हैं। कहानी एक समर्पित नर्स की है, जिसकी शांत जिंदगी एक बड़ी घटना में झूठा फंसाए जाने के बाद बदल जाती है। इसके बाद वह अपने अकेलेपन को दूसरों की मदद में बदल देती है और संघर्ष कर रहे परिवारों का सहारा बनती है। यह फिल्म 29 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। (Still From Film) -
सितंबर 21
निर्देशक करेन क्षिति सुवर्णा की पहली फीचर फिल्म ‘सितंबर 21’ का वर्ल्ड प्रीमियर 16 मई को कान्स के ‘पैलैस थिएटर’ में होगा। हिंदी और कन्नड़ भाषा में बनी यह फिल्म एक बुजुर्ग अल्जाइमर मरीज की कहानी है, जिसे लगता है कि उसकी पत्नी कोविड-19 महामारी के दौरान पड़ोस के घर में क्वारंटीन है। जैसे-जैसे उसकी याददाश्त कमजोर होती जाती है, उसका दूर रह रहा बेटा घर लौटता है और अपने सपनों तथा पिता की देखभाल के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। फिल्म परिवारों पर देखभाल की जिम्मेदारी के भावनात्मक बोझ को गहराई से दिखाती है। (Still From Film) -
शैडोज ऑफ द मूनलेस नाइट
फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) की छात्रा मेहर मल्होत्रा की 24 मिनट की पंजाबी शॉर्ट फिल्म ‘शैडोज ऑफ द मूनलेस नाइट’ को कान्स के ‘ला सिनेफ’ सेक्शन के लिए चुना गया है। फिल्म में रंजन नाम के एक फैक्ट्री कर्मचारी की कहानी दिखाई गई है, जो रात की शिफ्ट में काम करते हुए आर्थिक दबाव, नींद की कमी और मानसिक तनाव से जूझ रहा है। भीड़भाड़ वाले घर और कठिन परिस्थितियों के बीच उसकी मानसिक स्थिति धीरे-धीरे टूटने लगती है। (Still From Film) -
स्पिरिट ऑफ द वाइल्डफ्लावर
लंदन आधारित निर्देशक श्रोमोयी चक्रवर्ती की डॉक्यूमेंट्री ‘स्पिरिट ऑफ द वाइल्डफ्लावर’ कान्स के ‘Marché du Film’ में प्रदर्शित होगी। यह फिल्म दो बहनों की कहानी है, जो भारत की पहली कानूनी महुआ डिस्टिलरी चलाती हैं। जहां बड़ी बहन स्थानीय पेय को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का सपना देखती है, वहीं छोटी बहन अपनी जेंडर पहचान को स्वीकार करते हुए पुरुष के रूप में जीवन जीने की इच्छा रखती है। यह डॉक्यूमेंट्री पहचान, महत्वाकांक्षा और आत्मस्वीकृति जैसे विषयों को संवेदनशीलता से प्रस्तुत करती है। (Still From Film)
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