-
चार दशक के से भी अधिक समय से हिंदी सिनेमा में सक्रिय दिग्गज अभिनेता अनिल कपूर अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में अनिल कपूर एक्सप्रेसो के 12वें एडिशन के हिस्सा बनें और इस दौरान उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस हिंदी के एडिटर सौरभ द्विवेदी संग खास बातचीत में कई खुलासे किए। आइए डालते हैं एक नजर: (Photo Source: Indian Express)
-
अनिल कपूर ने इस दौरान बताया कि फिल्म नायक जब रिलीज हुई तो उसमें उनके किरदार को देखने के बाद कई पॉलिटिकल पार्टियों ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि ‘नायक’ के लिए अपने दोस्त और पुराने थिएटर डायरेक्टर फिरोज अब्बास खान से बात की थी। ‘मैंने फिल्म (नायक) के लिए उनके साथ वर्कशॉप करने के बारे में सोचा था। इसलिए, मैं माहिम में उनके ऑफिस जाता था और कई वर्कशॉप और रिहर्सल करता था। हमने अभी तक साथ में कोई प्ले नहीं किया। यह मेरी बकेट लिस्ट में है। हम एक दिन जरूर करेंगे, जो उम्मीद है ‘नायक’ से भी बड़ा होगा’। (Photo Source: Indian Express)
-
‘नायक’ में उनके किरदार को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। यहां तक कि फिल्म देखने के बाद कई पॉलिटिकल पार्टियों ने उनसे संपर्क किया था। हालांकि, अभिनेता ने पार्टी का नाम लिए बिना बताया कि, कुछ बातचीत हुई थी, लेकिन मैंने उन्हें शुरू में ही रोक दिया। वे लोग भी समझदार होते हैं, जो लोग आपको ऐसा ऑफर देते हैं, वे सीधे नहीं देते। यह प्रस्ताव किसी और के जरिए आता है। उन्हें कहीं न कहीं यह अंदाजा हो जाता है कि मैं इस काम में दिलचस्पी नहीं रखता’। (Photo Source: Indian Express)
-
अनिल के अनुसार वह जो भी कुछ करते हैं उसमें अपना 100 प्रतिशत देने की कोशिश करते हैं। स्लमडॉग मिलियनेयर के रिलीज होने के वह जब अमेरिका में थे तब UN ने उन्हें कई बार ब्रांड एंबेसडर बनने के लिए कहा। अभिनेता ने बताया कि कभी-कभी जब आप सीजन के फ्लेवर होते हैं, तो दुनिया का हर ऑर्गनाइजेशन आपसे संपर्क करना चाहता है। (Photo Source: Indian Express)
-
अनिल ने दावा किया कि वह यूनाइटेड नेशंस में एक दिखावटी पद स्वीकार करके अपनी नई मिली इंटरनेशनल पॉपुलैरिटी का फायदा नहीं उठाना चाहते थे। एक्टर ने कहा, मैं इसे एक फोटो ऑप की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहता था कि मैं वो चार फोटो ले लूं और फिर आप कुछ न करें। अगर आप करते हैं, तो आप अपना सब कुछ देते हैं। (Photo Source: Indian Express)
-
लेकिन अभी, मेरी इतनी सारी प्रायोरिटी हैं कि मुझे नहीं लगता कि मैं यह कर सकता हूं। इसलिए, मैं बिना दिखावा किए सिर्फ वही करता हूं जो मैं कर सकता हूं। मुझसे कहीं बेहतर लोग हैं जो राज्यसभा और लोकसभा में होने के लायक हैं। (Photo Source: Indian Express)
-
इस दौरान उन्होंने अपने करियर पर भी खुलकर बात की। एक मजबूत फिल्मी परिवार से होने के बाद भी अभिनेता को अपने करियर के शुरुआती दिनों में खूब संघर्ष करना पड़ा था (Photo Source: Indian Express)
-
इस दौरान अनिल कपूर ने बताया कि, मेरे पिता शुरुआत में मुगल-ए-आजम में के. आसिफ के असिस्टेंट थे। क्योंकि वे बहुत ईमानदार, विनम्र और दयालु व्यक्ति थे, इसलिए के. आसिफ साहब ने उनकी ईमानदारी की सराहना करते हुए उन्हें निर्माण कार्य में लगा दिया। जब वे राजस्थान में युद्ध के सीन की शूटिंग के लिए गए, जो छह महीने तक चली, तो उन्होंने वित्त और निर्माण से संबंधित अन्य पहलुओं को संभाला। यही ईमानदारी थी जिसने बाद में सुरिंदर कपूर के लिए इंडस्ट्री में और अधिक अवसर खोले’। (Photo Source: Indian Express)
-
बाद में वह शम्मी कपूर के मैनेजर बन गए, वो उनका काम संभाला करते थे। उसके बाद, शम्मी जी की पत्नी गीता बाली जी ने उन्हें निर्माता बनने के लिए प्रोत्साहित किया। अनिल ने बताया कि निर्माता के रूप में अपने पिता के संघर्षों को देखना उन पर गहरा प्रभाव पड़ा। फिल्मों का निर्माण करने और बड़े सितारों को कास्ट करने की कठिनाइयों ने उन पर अमिट छाप छोड़ी। (Photo Source: Indian Express) पिता के संघर्ष को देखकर लिया था खुद को साबित करने का फैसला, अनिल कपूर ने ‘Expresso’ में साझा किए अनसुने किस्से
-
अनिल कपूर ने बताया कि शुरुआत में इस फिल्म की योजना कमल हासन के साथ बनाई गई थी जो स्वाति मुथ्यम के अहम किरदार थे। उन्होंने बताया कि मशहूर फिल्ममेकर राज कपूर इस हिंदी रीमेक को प्रोड्यूस करना चाहते थे और कमल हासन को हीरो के रूप में लेने की सोच रहे थे। अनिल ने बताया कि एक दिन राज साहब उनके घर आए और उन्होंने इस फिल्म के बारे में उन्हें बताया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि, वह ऐसा किरदार निभा सकते हैं, लेकिन उनकी योजना कमल हासन के साथ फिल्म बनाने की थी। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। (Photo Source: Indian Express)
-
मुझे काम में पूरी तरह डूबने के लिए हमेशा एक भावनात्मक जुड़ाव की जरूरत होती है और यहां मुझे अपने पिता को यह साबित करने की चाहत थी कि मैं एक हीरो बन सकता हूं। मैंने उन्हें मुश्किल दौर से गुजरते देखा था और फिल्म निर्माण एक ऐसा काम है जिसमें कोई सराहना नहीं मिलती। फिल्म बनाना एक बहुत बड़ा काम है और दुर्भाग्य से, उनकी कोई भी फिल्म सफल नहीं हुई। तो यही मेरे लिए सफल होने का प्रेरणास्रोत बन गया। (Photo Source: Indian Express)
-
साल 1989 में अनिल कपूर में एक ऐसा किरदार निभाया जिसके बारे में किसी ने कल्पना नहीं की थी। दरअसल, 1989 में फिल्म ईश्वर आई थी जो के. विश्वनाश की तेलुगु क्लासिक स्वाति मुथ्यम की हिंदी रीमेक थी। इस फिल्म की कहानी एक लग तरह की लव स्टोरी पर आधारित थी। उन्होंने जब यह किरदार निभाने का फैसला लिया तो फिल्म इंडस्ट्री के लोग हैरान रह गए। आइए जानते हैं इससे जुड़ा किस्सा क्या है: (Photo Source: Indian Express)
-
अनिल कपूर ने बताया कि, एक निर्माता के तौर पर उनके लिए बड़े सितारे, मुख्य अभिनेता ढूंढना बहुत मुश्किल था। हर फिल्म एक संघर्ष थी। मैंने उन्हें बड़े सितारों की डेट्स मैनेज करने में बहुत मुश्किल दौर से गुजरते देखा है और इससे मुझे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा, क्यों न मैं खुद हीरो बन जाऊं? ताकि मेरे परिवार को फिल्में बनाने के लिए बाहर न जाना पड़े। (Photo Source: Indian Express)
-
अभिनेता बताते हैं, ‘मुझे नहीं पता क्या हुआ, बात बन नहीं पाई और फिर मुझे पता चला कि फिल्म ही नहीं बन रही। इसके बाद उन्होंने खुद पहल की। मैं के. विश्वनाथ जी के पास गया और आखिरकार मैंने यह फिल्म की। उन्होंने यह भी बताया कि उनके कुछ करीबी सहयोगी, जिनमें मिस्टर इंडिया के निर्देशक शेखर कपूर भी शामिल थे, इस फैसले को लेकर खुश नहीं थे। शेखर कपूर ने उनसे कहा, आप इस तरह की फिल्म क्यों कर रहे हैं, यह आपकी छवि के बिल्कुल खिलाफ है। (Photo Source: Indian Express)
-
लेकिन अनिल कपूर इसे एक अवसर के रूप में देख रहे थे और वह ऐसा ही किरदार निभाना चाहते थे। साथ ही के. विश्वनाथ जैसे निर्देशक के साथ काम करना वह खास मौका मानते थे। अनिल कपूर ने यह भी साझा किया कि फिल्म रेन मैन में डस्टिन हॉफमैन का अभिनय उनके लिए गहरी प्रेरणा बना। ‘मैं उस फिल्म और डस्टिन हॉफमैन के अभिनय का दीवाना हो गया था। वह भूमिका अद्भुत थी। उन्होंने उस फिल्म के लिए ऑस्कर जीता था। वही मेरा प्रेरणास्रोत था।’ (Photo Source: Indian Express)
-
ईश्वर फिल्म में अनिल कपूर ने अपनी स्थापित छवि से हटकर एक चुनौतीपूर्ण किरदार को चुनकर यह साबित कर दिया कि उनके लिए अदाकारी की कोई भी सीमा नहीं है। वह किसी भी किरदार को बड़े ही बखूबी से निभा सकते हैं। अभिनेता ने परदे पर न सिर्फ हीरो बन बल्कि नेगेटिव से लेकर कॉमेडी तक जैसे किरदार से दर्शकों के दिल पर राज कर रहे हैं। (Photo Source: Indian Express) ‘बातचीत हुई थी, लेकिन…’, जब पॉलिटिकल पार्टियों ने किया था अनिल कपूर से संपर्क, अभिनेता ने ठुकरा दिया था ऑफर