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देशभर में छात्र आंदोलनों और विश्वविद्यालयों की राजनीति एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे समय में बॉलीवुड की कई फिल्में याद आती हैं, जिन्होंने सिर्फ मनोरंजन ही नहीं किया, बल्कि छात्र राजनीति, युवा नेतृत्व, सामाजिक बदलाव और व्यवस्था के खिलाफ उठती आवाज को भी प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर पेश किया। इन फिल्मों में कहीं कैंपस चुनावों की सियासत दिखाई गई, तो कहीं युवाओं के भीतर पनपते विद्रोह और बदलाव की चाह को कहानी का केंद्र बनाया गया। आइए जानते हैं ऐसी सात बॉलीवुड फिल्मों के बारे में, जिन्होंने छात्र राजनीति और युवा आंदोलनों को अलग-अलग नजरिए से दर्शकों के सामने रखा। (Still From Film)
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आरक्षण (2011)
प्रकाश झा की आरक्षण भारत में शिक्षा व्यवस्था, जातिगत आरक्षण और निजीकरण जैसे सेंसिटिव मुद्दों पर आधारित है। फिल्म में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद कॉलेज परिसर में आरक्षण समर्थक और विरोधी छात्रों के बीच बढ़ते तनाव और टकराव को दिखाया गया है। यह फिल्म बताती है कि शिक्षा और राजनीति का रिश्ता किस तरह सामाजिक बहस को जन्म देता है। (Still From Film) -
गुलाल (2009)
अनुराग कश्यप की गुलाल छात्र राजनीति पर बनी सबसे गंभीर फिल्मों में गिनी जाती है। राजस्थान की पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति, चुनाव, सत्ता संघर्ष और अलगाववादी विचारधारा के बीच फंसे युवाओं की कहानी कहती है। फिल्म सत्ता, महत्वाकांक्षा और हिंसा के जटिल संबंधों को बेहद प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है। (Still From Film) -
हासिल (2003)
तिग्मांशु धूलिया की पहली निर्देशित फिल्म हासिल इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से प्रेरित मानी जाती है। फिल्म में कैंपस चुनावों पर बाहुबल, अपराध और राजनीतिक प्रभाव की गहरी पकड़ को रियलिस्टिक स्टाइल में दिखाया गया है। यह उन फिल्मों में शामिल है जिन्होंने छात्र राजनीति के स्याह पक्ष को बेहद वास्तविक तरीके से पेश किया। (Still From Film) -
हजारों ख्वाहिशें ऐसी (2005)
सुधीर मिश्रा निर्देशित यह फिल्म 1970 के दशक की राजनीतिक उथल-पुथल और आपातकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी तीन कॉलेज छात्रों की है, जिनकी अलग-अलग राजनीतिक सोच और जीवन की राहें समय के साथ बदलती जाती हैं। फिल्म छात्र राजनीति, नक्सल आंदोलन और सामाजिक बदलाव के दौर को गंभीरता से प्रस्तुत करती है। (Still From Film) -
रांझणा (2013)
आनंद एल. राय के निर्देशन में बनी रांझणा की शुरुआत एक प्रेम कहानी के रूप में होती है, लेकिन फिल्म का दूसरा हिस्सा पूरी तरह छात्र राजनीति और युवा आंदोलनों की ओर मुड़ जाता है। दिल्ली के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से प्रेरित कैंपस का माहौल, छात्र संगठन, चुनावी रणनीतियां, विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल जैसी घटनाएं कहानी का अहम हिस्सा बनती हैं। फिल्म यह दिखाती है कि छात्र राजनीति किस तरह राष्ट्रीय राजनीति से जुड़ सकती है। (Still From Film) -
रंग दे बसंती (2006)
अगर युवा आंदोलन और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने वाली फिल्मों की बात हो तो रंग दे बसंती का नाम सबसे पहले लिया जाता है। फिल्म में कुछ बेफिक्र कॉलेज छात्र अपने दोस्त, एक फाइटर पायलट, की भ्रष्टाचार के कारण हुई मौत के बाद व्यवस्था के खिलाफ खड़े हो जाते हैं। यह फिल्म युवाओं में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता का प्रतीक बन गई और इसके संवाद व गीत आज भी प्रेरणा देते हैं। (Still From Film) -
युवा (2004)
मणिरत्नम की युवा तीन युवाओं की अलग-अलग कहानियों को जोड़ती है। इनमें से एक छात्र नेता कॉलेज राजनीति से निकलकर मुख्यधारा की राजनीति में प्रवेश करता है और व्यवस्था बदलने का सपना देखता है। फिल्म में छात्र चुनाव, राजनीतिक हिंसा और आदर्शवाद के बीच संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया है। (Still From Film)
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