पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में हिंदुओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वहां हिंदुओं पर होने वाले अत्याचार, उनके अधिकारों पर लगाई गई पाबंदियां और धार्मिक मान्यताओं पर लगातार प्रहार उन्हें नर्क की जिंदगी जीने को मजबूर कर देते हैं। बांग्लादेश में राजनीतिक बदलाव के बाद स्थिति और बिगड़ गई है।

अगस्त 2024 से फरवरी 2026 तक बांग्लादेश में हिंदू तथा अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की लगभग 3100 घटनाएं दर्ज की गई हैं। घर लूटे गए, मंदिर तोड़े गए, महिलाओं पर हमले हुए और कई निर्दोषों की जान चली गई। यह हिंसा कोई अलग घटना नहीं, बल्कि धार्मिक कट्टरता की निरंतर मुहिम है, जिसने बांग्लादेशी हिंदुओं को अपने ही देश में बेघर और असुरक्षित बना दिया है।

इन्हीं अत्याचार की घटनाओं के बीच यूपी के लखीमपुर खीरी जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीधे निर्देश पर बांग्लादेश से आए 331 विस्थापित हिंदू परिवारों को स्थायी रूप से बसाया गया है।

हालांकि ये 331 परिवार हाल के वर्षों में नहीं आए हैं। ये परिवार 1960 से 1975 के बीच पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से धार्मिक अत्याचार, दंगे और अस्थिरता से बचकर भारत आए थे। उस समय ये परिवार लखीमपुर खीरी समेत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बस गए थे। उनका प्रारंभिक पुनर्वास वर्षों पहले हो चुका था, लेकिन अब योगी सरकार ने उन्हें स्थायी बसावट, भूमि अधिकार और पूर्ण सम्मान प्रदान कर दिया है।

लखीमपुर खीरी में पुनर्वास का विस्तार

ये परिवार तीन तहसीलों के चार गांवों में बसाए गए हैं। धौरहरा तहसील के सुजानपुर गांव में 97 परिवारों को बसाया गया है। मोहम्मदी तहसील के मोहनपुर ग्रन्ट गांव में 41 परिवारों को जगह दी गई है। मोहम्मदी तहसील के मियांपुर गांव में सबसे अधिक 156 परिवार बसाए गए हैं। गोला तहसील के ग्रन्ट नंबर-3 में 37 परिवारों को बसाया गया है। कुल मिलाकर इन चार गांवों में 331 परिवारों का पुनर्वास किया गया है।

स्थायी बसाव और सरकारी योजनाओं का लाभ

ये परिवार वर्षों पहले अस्थायी रूप से बसाए गए थे, लेकिन अब योगी सरकार ने उन्हें स्थायी पुनर्वास प्रदान कर दिया है। हर परिवार को खेतीबाड़ी के लिए कृषि भूमि आवंटित की गई है। साथ ही, पात्रता के आधार पर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जा रहा है। इन योजनाओं में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, विधवा एवं वृद्धावस्था पेंशन, सुकन्या समृद्धि योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शामिल हैं।

बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान

इन परिवारों को बुनियादी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। राशन वितरण, टीकाकरण, विकसित भारत जी-राम-जी के तहत रोजगार, स्कूलों में मिड-डे मील, समग्र शिक्षा योजना, स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से इन गांवों में सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह केवल राहत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ नई जिंदगी की शुरुआत है।

विस्थापित परिवारों की खुशी और आभार

नए पुनर्वास से इन परिवारों के चेहरे खिल उठे हैं। वे खुले मन से योगी सरकार का आभार जता रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर जो जख्म उन्हें लगे थे, उन्हें योगी सरकार ने सुविधा, सुरक्षा और सम्मान देकर नर्क से बाहर निकाला है। दशकों तक अनिश्चितता और भय में जीने के बाद उन्हें अब अपना खेत, अपना घर और अपने बच्चों का उज्ज्वल भविष्य नजर आ रहा है।

योगी आदित्यनाथ की सभ्यतागत सोच

यह पहल योगी आदित्यनाथ की सोच को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उन्होंने बार-बार कहा है कि बांग्लादेश के हिंदुओं की रक्षा करना और संकट के समय में उनका समर्थन करना हर भारतीय का नैतिक कर्तव्य है। उनका प्रसिद्ध नारा ‘बटेंगे तो कटेंगे’ इसी एकता और सजगता का संदेश देता है। दुनिया में शायद ही कोई अन्य देश हो जो धार्मिक अत्याचार से पीड़ित हिंदुओं के लिए बांहें फैलाकर स्वागत के लिए तैयार हो। लखीमपुर खीरी का यह मॉडल उसी सभ्यतागत जिम्मेदारी का व्यावहारिक रूप है।

भारत हर हिंदू का आश्रयस्थल

बांग्लादेश में आज भी हिंदू परिवारों पर हमले जारी हैं, मंदिरों की तोड़फोड़ हो रही है और अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश में योगी सरकार इन विस्थापितों को जमीन, योजनाओं और सम्मान देकर एक मजबूत संदेश दे रही है-भारत हिंदू पीड़ितों के लिए आश्रय स्थल है।

भले ही आलोचक इसे राजनीतिक कदम कह सकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन परिवारों को वोट बैंक नहीं, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक एकीकरण का आधार दिया जा रहा है। खेती की जमीन, ऋण सुविधा, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं-ये सब वे चीजें हैं जो बांग्लादेश में उन्हें व्यवस्थित रूप से छीनी गई थीं।

भविष्य के लिए मिसाल

लखीमपुर खीरी में बांग्लादेशी हिंदुओं का पुनर्वास केवल एक स्थानीय प्रशासनिक कार्य नहीं है। यह सभ्यतागत जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण है। यह याद दिलाता है कि हिंदू-बहुल भारत की पहचान के साथ-साथ अपने सभ्यतागत बंधुओं की रक्षा करना भी उसकी नैतिक जिम्मेदारी है।
जब तक योगी सरकार अवैध घुसपैठ पर सख्ती और सच्चे शरणार्थियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगी, तब तक पड़ोसी देशों से आने वाले पीड़ित हिंदुओं को उम्मीद बनी रहेगी। लखीमपुर खीरी के गांवों में अब जो परिवार अपने खेतों में काम कर रहे हैं, उनके लिए अत्याचार की लंबी रात खत्म हो चुकी है और सम्मानजनक भविष्य की सुबह शुरू हो गई है।

(डिस्क्लेमर: लेखक इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अधिवक्ता हैं। राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर निरंतर लेखन करते हैं। इस लेख में लेखक के निजी विचार हैं। जनसत्ता का इनसे सहमत होना जरूरी नहीं है।)