जय जय ‘भजन क्लबिंग कल्चर’ की! जेन-जी को ‘भजन पसंद’ है। इस पर भी विवाद। ‘भक्त’ कहिन कि जेन-जी दिल से ‘भक्त’ है… ‘हनुमान अंश’ को लोकप्रियता इसी ने दिलाई। ‘अभक्त’ कहिन कि यह सब जेन-जी के वोट पाने का चक्कर है। फिर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की चुनाव आयोग के अंदरूनी मतभेदों पर रिपोर्ट आई और मुख्य चुनाव आयुक्त निशाने पर आ गए। आरोप कि चौदह बार दो चुनाव आयुक्तों ने आपत्तियां जताईं… मुख्य चुनाव आयुक्त सिर्फ अपनी चला रहे हैं।

यों मुख्य चुनाव आयुक्त तो पहले से ही विपक्ष के निशाने पर थे, पर इस रिपोर्ट के आने के बाद वे चौतरफा घिर गए। विपक्षी दलों की बांछें खिल गईं, उनके नेता मन ही मन गदगद दिखे, मानो उनके आरोपों को बल मिल गया हो…कि हम तो पहले से कह रहे थे कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने वोट चोरी करके बड़ा अपराध किया है, उनको जाना होगा।

दिल्ली सरकार के एक मंत्री द्वारा सड़क पर एक व्यक्ति को थप्पड़ मारने की घटना भी सुर्खियों में आई। मंत्री कहिन कि संबंधित व्यक्ति ने उनके परिवार के बारे में अपशब्द कहे, लेकिन कई भक्त चर्चकों तक ने मंत्री के इस व्यवहार की निंदा की। इसके बाद विपक्षी दल के एक मुख्यमंत्री ने ‘राम’ और ‘शिवजी’ के बारे में अपने ‘पौराणिक ज्ञान’ का बखान कर विवाद पैदा कर दिया कि ‘राम’ उत्तर के… ‘आर्यों’ के और ‘शिवजी’ दक्षिण के, द्रविड़ के।

इसके बाद सत्तासीन दल के प्रवक्ताओं को विपक्ष को निशाने पर लेने का अवसर मिल गया। प्रवक्ता कहिन कि यह देवताओं को भी विभाजित करने का विपक्ष का षड्यंत्र है, जबकि ‘राम’ और ‘शिवजी’ में कोई भेद नहीं। एक भक्त प्रवक्ता ने ‘श्रीरामचरितमानस’ में उद्धृत अंश का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि राम, शिव की पूजा करते हैं और शिव, राम की पूजा करते हैं, इनमें भेद पैदा करना ‘हिंदू द्रोही’ होना है!

आरोपों से इस्तीफे की मांग तक, विपक्ष का आंदोलन

फिर ‘विपक्षी गठबंधन’ के दलों की बैठक… ‘प्रधानमंत्री, गृह मंत्री तथा मुख्य चुनाव आयुक्त’ के इस्तीफे की मांग और आंदोलन का एलान। एक विपक्षी नेता ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वे पद से नहीं हटे, तो आंदोलन आसमान तक जाएगा। एक बड़े विपक्षी दल के नेता गद्गद कि जो उन्होंने कहा था, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट ने उसकी पुष्टि कर दी। उधर, चुनाव आयोग का इन आरोपों के आगे हाथ एकदम तंग, उसने सिर्फ लिखित ‘स्पष्टीकरण’ दिए, लेकिन मीडिया से सीधे बात कर जनता को भरोसे में नहीं लिया।

एक सत्ता प्रवक्ता ने कहा कि विपक्षी दल अपनी हार को देख चुनाव आयोग पर ही ठीकरा फोड़ने लगते हैं, ताकि दबाव में आकर आयोग उन्हें किसी तरह गद्दी पर बिठा दे। विपक्षी अवसरवादी हैं, जब वे कहीं जीतते हैं तब चुनाव आयोग सही काम करता है, लेकिन जैसे ही हारते हैं, आयोग को ‘चुनाव चोर’ कहने लगते हैं। इसी बीच, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त’ का उजड़ा हुआ चेहरा दिखाने वाला एक ‘मीम पोस्टर’ जे-जीन की भाषा में कहता दिखा ‘इट्स डन ब्रो’… यानी ‘आपका खेल खत्म..!’

एक ओर इस्तीफा-इस्तीफा का कोरस, दूसरी ओर मुख्य चुनाव आयुक्त को मिली ‘इम्यूनिटी’, जो कहती है कि उन्हें पद से हटाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है…।

फिर एक दिन इजरायली यात्रियों से भरे दुबई से तेल अवीव जा रहे हवाई जहाज को ओमान के ‘सह-पायलट’ द्वारा जानबूझकर गिराने की कोशिश करना और भारतीय पायलट स्मित मछार का उसका प्रतिरोध करने की घटना सामने आई। सह-पायलट का स्मित पर जानलेवा हमला कर उसे बुरी तरह घायल कर देना, स्मित का कॉकपिट का दरवाजा खोलकर मदद के लिए पुकारना और चार यात्रियों का आगे आकर स्मित को बचाना तथा हमलावर को काबू करना। इस पूरी घटना के ये वे अंश हैं, जो लंबे समय तक याद रखे जाने योग्य हैं।

कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की तारीफ डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू तक ने की। नेतन्याहू ने कहा कि भारतीय पायलट ने अपनी बहादुरी से दुनिया को दूसरी ‘9/11’ जैसी घटना से बचाया। फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मित के पराक्रम और साहस की सराहना करते हुए उनसे फोन पर बात की, जिसमें स्मित ने बताया कि संकट में वह हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और जहाज को गिरते देख उन्होंने ऐसा ही किया, वे हनुमान जी के ‘भक्त’ हैं।

फिर, शुक्रवार की सुबह विपक्ष के कुछ नेता और कार्यकर्ता जंतर मंतर पर पहुंचे और ‘इस्तीफा दो- इस्तीफा दो’ के नारे लगाते हुए दिखे। उधर, पुलिस की ओर से धर-पकड़ जारी रही। पुलिस का कहना था कि उसने किसी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है… मेट्रो के कई स्टेशन बंद रहे और विपक्षी नेता लोगों को बुलाते रहे। इस बार पुलिस और प्रशासन पहले से तैयार था, इसलिए यह आंदोलन कितना सफल होगा- कितना नहीं, अभी से कुछ नहीं कहा जा सकता। इस मामले में फिलहाल यही कहा जा सकता है कि ‘तेल देखो, तेल की धार देखो’!