इंसान को जिंदा होने, जुड़ाव और अपनेपन की अनुभूति कराने वाला एक गहरा शारीरिक और भावनात्मक अनुभव है स्पर्श। यह न केवल शारीरिक संवेदना है, बल्कि प्यार, सुकून और आत्मीयता का संकेत देने वाला आभास भी है, जो किसी के दूर होने पर भी यादों में महसूस किया जा सकता है। यह एक रूहानी अनुभव भी हो सकता है। स्पर्श को कभी शब्दों की आवश्यकता नहीं होती। वह अपने आप में ही एक पूरा शास्त्र है। अब बच्चों को भी बताया जाता है कि किस तरह के स्पर्श को किस तरह से लिया जाए। वे भी अब ‘अच्छे स्पर्श’ और ‘बुरे स्पर्श’ को समझने लगे हैं। इससे हटकर कई बातें ऐसी होती हैं, जिन्हें कहा नहीं जा सकता, बस एक स्पर्श ही काफी होता है पूरी बात बताने के लिए।
स्पर्श मात्र से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। यह भावनाओं की अतल गहराइयों से अनुभव के मोती निकाल लाता है। यह दिल से दिल की बात करता है। इस स्पर्श को समझना भी मुश्किल है, पर इतना भी नहीं कि समझा ही न जा सके। हम सबको याद होगा कि किस तरह से असफल होने पर पिता ने हमारे सिर पर हाथ रखते हुए कहा था कि निराश होने की आवश्यकता नहीं है। जीवन में इस तरह की परिस्थितियां आती रहती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हार मान ली जाए। इसे पड़ाव मानो और कुछ आराम करने के बाद फिर निकल पड़ो। पिता के शब्द आज भले ही याद न हों, पर उनका वह स्पर्श आज भी सहसा याद आ जाता है।
आज हम भले उन हालात से दस कदम आगे हों, पर वह स्पर्श हमें सदैव यही याद दिलाता है कि हम भी कभी बेबस थे। उसी स्पर्श ने हमें संभाला। ऐसे कई पल होंगे, जो हमारे जीवन में आए होंगे। माता-पिता, भाई-बहन, दोस्त-साथी के स्पर्श पर उस समय हमने भले ही ध्यान नहीं दिया हो, पर आज वे सभी स्पर्श हमारी यादों में हैं। कई बार स्पर्श का जवाब स्पर्श ही होता है। हमने भी कई दफा अपनों को दिलासा देने के लिए उनके सिर पर हाथ रखा होगा। उनके कंधे थपथपाए होंगे। सामने वाले ने ऊर्जामय होकर हमसे विदाई ली होगी। स्पर्श से भावनाओं का संचार होता है।
दूसरों को नहीं, खुद को बदलने की सीख, एक छोटे से वाकये में छिपा बड़ा सबक | दुनिया मेरे आगे
एक अनजाना या कोमल स्पर्श अंतर्मन के तारों को झंकृत कर देता है। वहां खुशियों के भाव जगा देता है। अपनी कोमल भावनाओं को व्यक्त करने का शक्तिशाली माध्यम है स्पर्श, जो बिना शब्दों के बहुत कुछ कह जाता है। स्पर्श केवल शरीर तक सीमित नहीं है, अगर गहराई से महसूस करें, तो एक स्पर्श रूह में उतर जाता है। रण के मैदान में जाने वाले किसी सैनिक को उसकी मां या पिता जब कंधे पर अपना हाथ रखते हुए कहते हैं कि आज देश को तुम्हारी जरूरत है, जाओ और दुनिया को बता दो कि हममें भी दम है, तो यही उसका सहारा बन जाता है और वह पूरी शक्ति से दुश्मन पर हावी हो जाता है। रिश्तों की गहराई को बढ़ाने में यही स्पर्श बहुत अहम भूमिका निभाते हैं।
बरसों से एक-दूसरे को फूटी आंख न सुहाने वाले भाई जब आपस में मिलते हैं, तो एक स्पर्श उनके दुराग्रह की दीवारों को क्षण भर में तोड़ देता है। मन की भड़ास आंसू बनकर बाहर आ जाती है। दोनों के दिलों में प्यार का सोता बह निकलता है। दोनों को आश्चर्य होता है कि अभी तक प्यार का यह सोता कहां छिपा था! स्पर्श एक अनुभूति है, जिसे शब्दों की आवश्यकता नहीं होती। स्पर्श ही है, जो दुराग्रह की दीवार को पल भर में गिरा देता है। यह संघर्षों को झेलने की शक्ति देता है। इसके सहारे इंसान पूरी जिंदगी काट लेता है। स्पर्श से हौसला-अफजाई होती है। यह भावनाओं के समुंदर को बहा ले जाता है। यह रुलाता है, हंसाता है और कभी-कभी ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहां कोई पराया नहीं, सभी अपने होते हैं, अपनापन होता है।
इसके अलावा, स्पर्श व्यक्ति को संघर्षों से लड़ने की शक्ति भी देता है। एक सैनिक जब युद्ध के मैदान में जाता है, तो उसके परिजनों का स्नेहिल स्पर्श उसके लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है। वही स्पर्श उसे साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है, जिससे वह कठिन परिस्थितियों का सामना कर पाता है। स्पर्श का प्रभाव इतना व्यापक है कि यह मनुष्य के संपूर्ण व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। स्पर्श के माध्यम से व्यक्ति अपने भीतर और दूसरों के भीतर छिपी भावनाओं को समझ पाता है।
यह कहा जा सकता है कि स्पर्श एक ऐसी अनुभूति है, जो शब्दों और संकेतों से परे है। यह मनुष्य के जीवन का अभिन्न हिस्सा है, जो उसे भावनात्मक रूप से जोड़ता है और जीवन को सही मायने में अर्थपूर्ण बनाता है। आज के इस व्यस्त और यांत्रिक जीवन में, जहां लोग एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं, वहां स्नेहपूर्ण स्पर्श की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। अपने जीवन में स्पर्श के महत्त्व को समझने तथा अपने स्नेहिल स्पर्श से दूसरों के जीवन में खुशी, उत्साह, साहस, करुणा और अपनापन भरने की जरूरत है। एक छोटा-सा स्पर्श किसी के जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। यही स्पर्श मानवता का सबसे सुंदर और सशक्त माध्यम है।
