हम अपने आसपास मानव निर्मित जिन चीजों को देखते हैं, वे विज्ञान के बल पर ही आकार पाने में सफल हो पाई हैं। सड़क पर चलती साइकिल हो या दूर गगन को भेदता हवाई जहाज, सभी विज्ञान के आविष्कार हैं। यह अलग बात है कि जिस तरह सिक्के के दो पहलू होते हैं, उसी तरह यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह विज्ञान को सृजनात्मक माने या विध्वंसात्मक।

इसमें कोई शक नहीं है कि विज्ञान से अगर हमें लाभ हुआ है, तो इसके दुष्परिणामों को भी हमें ही भुगतना पड़ा है। लिहाजा, इस बात का निर्णय करना थोड़ा कठिन है कि विज्ञान वरदान है या अभिशाप। कई मामलों में यह वरदान साबित हुआ है, तो कई मामलों में यह अभिशाप भी साबित हो रहा है।

दरअसल, विज्ञान ने मानव जीवन को सुखद और सुगम बना दिया है। पहले लंबी दूरी की यात्रा करना मनुष्य के लिए बेहद कष्टदायी होता था, पर अब विज्ञान ने हर तरह की यात्रा को आसान बना दिया है। सड़कों पर दौड़ती मोटरगाड़ियों और हवाईअड्डों पर लोगों की भीड़ इसका उदाहरण है। मगर परिवहन से निकलने वाले विषैले धुएं और गैसों से फेफड़े और आंखों की बीमारियों का प्रसार तेजी से बढ़ा है।

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साथ ही, वायु प्रदूषण से पर्यावरण भी बिगड़ता जा रहा है। पहले मनुष्य के पास मनोरंजन के लिए विशेष साधन उपलब्ध नहीं थे, अब उसके पास इसके लिए हर प्रकार के साधन उपलब्ध हैं। रेडियो, टेप रिकॉर्डर से आगे बढ़कर अब एलसीडी, वीसीडी और डीटीएच का जमाना आ गया है। मनोरंजन के आधुनिक उपकरणों के प्रसार से मनुष्य घर तक ही सीमित होकर रह गया है। इससे मनुष्य के स्वास्थ्य पर गहरा और जटिल कुप्रभाव पड़ रहा है। दूसरी ओर, अधिक ध्वनि वाले यंत्रों से छोटे जीव-जंतुओं की संख्या में कमी होती जा रही है।

यही नहीं, मनुष्य विज्ञान की सहायता से शारीरिक कमजोरियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पार पाने में अब पहले से कहीं अधिक सक्षम हो गया है और यह सब संभव हुआ चिकित्सा क्षेत्र में आई वैज्ञानिक प्रगति से। अब ऐसी असाध्य बीमारियों का इलाज भी संभव है, जिन्हें पहले लाइलाज समझा जाता था। अब टीबी सहित कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का शुरुआती स्तर पर उपचार संभव हुआ है।

आज हर हाथ में मोबाइल का दिखना भी विज्ञान के वरदान का ही उदाहरण है। हालांकि विज्ञान ने अमूमन सभी क्षेत्रों में बहुत तरक्की की है, पर सोनोग्राफी, एक्स-रे आदि मशीनों से निकलने वाली किरणों के दुष्प्रभावों को लेकर भी चिंताएं जताई जाती रही हैं। नई-नई पर्यावरणीय समस्याएं भी सामने आ रही हैं, जिनका असर पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं पर पड़ रहा है।

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कुछ लोगों का यह भी मानना है कि विज्ञान ने इंसान को मशीन बना दिया है। मशीनों का आविष्कार मनुष्य ने अपनी सुख-सुविधा के लिए किया है। अगर मशीनें नहीं होतीं, तो मनुष्य इतनी तेजी से प्रगति नहीं कर पाता। कोई मनुष्य मशीन के बिना कार्य करे, तो उसे कई गुना अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता पड़ेगी। इस दृष्टि से देखा जाए, तो मशीनों के कारण मनुष्य का जीवन यंत्रवत नहीं हुआ है, बल्कि उसके लिए हर प्रकार का कार्य करना सरल हो गया है। यह विज्ञान का ही वरदान है कि अब डेबिट-क्रेडिट कार्ड के रूप में लोगों की जेब में पैसे मौजूद होते हैं।

वहीं यह भी सही है कि किसी भी चीज का दुरुपयोग या बेलगाम उपयोग बुरा होता है। आज डिजिटल लेनदेन की दुनिया में लगातार ठगी और घोटाले भी सामने आ रहे हैं। विज्ञान की सहायता से मानव ने घातक हथियारों का आविष्कार किया, जो पूरी मानव सभ्यता का विनाश करने में सक्षम हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय इनके प्रयोग से समूची मानवीयता को जो क्षति हुई, उसकी पूर्ति असंभव है। विज्ञान की सहायता से मनुष्य ने मशीनों का आविष्कार अपने सुख के लिए किया, लेकिन अफसोस की बात यह है कि मशीनों के अनियंत्रित इस्तेमाल के साथ-साथ वह भी मशीन होता जा रहा है और उसमें संवेदनाओं की जगह सिकुड़ती जा रही है।

मशीनों के आविष्कार के बाद छोटे-छोटे और सामान्य कार्यों के लिए भी उन पर निर्भरता बढ़ी है। यही कारण है कि बेरोजगारी में वृद्धि हुई है। मशीनों के अत्यधिक प्रयोग और पर्यावरण के दोहन के कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है और मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। विज्ञान की सहायता से ही प्रगति के लिए मनुष्य ने पृथ्वी पर मौजूद संसाधनों का व्यापक रूप से दोहन किया है और यही वजह है कि आज ऊर्जा संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

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यह भी विज्ञान की ही देन है कि मशीनों पर निर्भरता के कारण मनुष्य की शारीरिक सक्रियता और रोग प्रतिरोधक क्षमता पर असर पड़ रहा है। नई-नई बीमारियों, प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण की चुनौतियां बढ़ रही हैं। कृषि क्षेत्र में विज्ञान और मशीनों से उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है, पर रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग से भूमि की उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। भूमिगत जल में हानिकारक तत्वों की मात्रा बढ़ती जा रही है और खरपतवार का विस्तार भी एक समस्या बनता जा रहा है।

विज्ञान के सहारे रक्षा क्षेत्र में नए-नए आविष्कार हो रहे हैं, पर इसका कुप्रभाव नागासाकी और हिरोशिमा में देखा जा चुका है। विभिन्न क्षेत्रों में नए-नए पुल, वायुयान और बांधों का निर्माण विज्ञान ने सरल बनाया है। सच यह है कि विज्ञान ने मनुष्य के जीवन को बहुत बदल दिया है। लेकिन प्राकृतिक संसाधनों का अतिशय दोहन आज पर्यावरण प्रदूषण के रूप में दिखाई दे रहा है। मनुष्य के लालच को अगर समय रहते नहीं रोका गया, तो एक समय ऐसा आ सकता है जब विज्ञान और मशीनें तो होंगी, लेकिन पृथ्वी पर जीवन को बचाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगा।