एक बार फिर वही ‘राग’ कि ‘मनुवाद से आजादी… जातिवाद से आजादी..।’ एक चैनल में एक किशोर ‘बटुक’ क्षोभ प्रकट करता रहा कि पूरी सृष्टि उथल-पुथल हो जाएगी। ऐसा ‘सतयुगी क्षोभ’ सुनकर दया आती रही कि बटुक महाराज किस युग के मिथक में रह रहे हैं! एक पल ‘अपमानित’, लेकिन दूसरे पल ही ‘अभिमानित’! एक उपमुख्यमंत्री 101 बटुकों का सम्मान करते हैं। भोजन कराते हैं। पुष्प वर्षा करते हैं। ‘बटुक’ वेदमंत्रों का उच्चारण करते दिखते हैं। एक एंकर कटाक्ष करता है- वाह! पहले शिखा खींचो, फिर नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करो, भोजन कराओ।
इसे देख कर एक ओर विपक्ष मस्त, दूसरी और बाबा और बाबा के बीच टकराव जारी। एक बाबा दुर्दमनीय, तो दूसरे बाबा और भी दुर्दमनीय। असली सवाल यह कि कौन बाबा असली, कौन नकली! ऐसे सवाल से आहत एक बाबा इतने क्षुब्ध दिखे कि उन्होंने बड़े उपदेशक बाबा के उपदेश कि ‘हिंदू तीन बच्चे पैदा करें’ पर यह कह दिया कि पहले शादी कर बच्चे पैदा कर लो, फिर दूसरों से कहना कि इतने बच्चे पैदा करो।
फिर एक दिन जैसे ही बड़े बाबा ने ‘घर वापसी का काम तेज करने’ की लाइन दी, वैसे ही एक बड़े अल्पसंख्यक संगठन के मुखिया ने बहस को एक झटके में और भी ‘गरम’ कर दिया कि ये नफरत फैलाने वाला बयान है। बहरहाल, ‘वंदे मातरम्’ से लौटते हुए बाबाओं के बाबा की ट्रेन पर पत्थर मारे जाते हैं। किसने किया, यह साफ नहीं।
दरअसल, इन दिनों ‘सनातन’ ही ‘सनातन’ से नाराज है। यह सब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के ‘समान नियमों’ का फलागम है। विश्वविद्यालयों में टकराव जैसा सुलग रहा है। परिसरों और सोशल मीडिया में ‘जाति घृणा’ बरसती है। एक चर्चक कहता है कि कुछ राजनीतिक बाबाओं ने सोचा होगा कि ‘सवर्ण वोट बैंक’ तो अपना है… वह कहां जाएगा! आकर्षित करना है तो नया वोट बैंक बनाओ और जीतो। सनातनवादियों की इस ‘पलटी’ से ‘सवर्ण मतदाता’ इतने क्षुब्ध और क्रुद्ध दिखे कि बड़े बाबा तक की सभाओं का बहिष्कार करने लगे। हालत यह है कि बड़े बाबा की सभाओं में अधिकतर कुर्सियां खाली दिखती हैं। जैसे ही ‘सनातन’ में कलह बढ़ी, वैसे ही कुछ लोग ‘टीपू-टीपू’ करने लगे कि टीपू अंग्रेजों के खिलाफ लड़ा… शहादत दी..!
दूसरी ओर, ‘एपस्टीन फाइलों’ की चर्चा ने पीछा न छोड़ा। विपक्ष ने अमेरिका से हुए समझौते को एपस्टीन फाइलों के दबाव का परिणाम बताया। सत्ता प्रवक्ता आरोपों का प्रतिवाद करते हुए समझौते के फायदे बताते रहे, जबकि विपक्ष का गाना वही रहा कि देश को बेच डाला… किसानों को बेच डाला..!
विपक्ष के नामी नेता के सुर से सत्ता पक्ष को भी मिला आनंद
फिर एक दिन अचानक विपक्षी दल के एक नामी नेता ने ऐसा विवादी सुर लगाया कि सत्ता पक्ष को भी कुछ आनंद मिला और विपक्ष के प्रवक्ताओं को लेने के देने पड़ते दिखे। नेता ने कहा कि मैं नेहरूवादी, इंदिरावादी, राजीववादी हूं… राहुलवादी नहीं हूं..! फिर उन्होंने केरल में वामपंथी मुख्यमंत्री की वापसी की कामना भी कर डाली। उनके दल के प्रवक्ता ने ‘ये उनके निजी विचार हैं’ कहकर अपना पिंड छुड़ाया। इसी क्रम में असम के विपक्ष के बड़े नेता ने अपने दल से इस्तीफा देकर विपक्षी दल को हिला दिया। एक विशेषज्ञ कहिन कि यह विपक्षी दल का संकट है… उनके नेता के काम करने का तरीका अपने आप में एक समस्या है!
इस बीच एक बार फिर ‘घृणा भाषण’ चर्चा में आया। एक राज्य के मुख्यमंत्री ने कहा था ‘मिया’ शब्द और उनका बंदूक चलाने का चित्र। यह कुछ चैनलों में चर्चा के केंद्र में रहा। एक चर्चा में विपक्षी प्रवक्ता कहिन कि ‘घृणा भाषण’ को लेकर बड़ी अदालत में दो जनहित याचिका दाखिल की गई हैं। एंकर बताता रहा कि किस वर्ष कितने घृणा भाषण हुए। किस दल के नेता ने अब तक कितने घृणा भाषण दिए हैं..! इसके बाद वही हुआ, जो ऐसी चर्चा में दर्जनों बार हुआ है कि एक आरोप लगाता कि ‘पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड’ किसने कहा, तो दूसरा प्रत्यारोप लगाता कि ‘मौत का सौदागर’ किसने कहा। ये किसने कहा कि वह किसने कहा… घृणा अनंत, घृणा कथा अनंता..!
बहरहाल, ‘एआइ इंपैक्ट सम्मेलन’ में ‘विश्वगुरु’ की भद जिस तरह से ‘गलगोटिया’ ने पिटवाई, वैसी किसी ने न पिटवाई। कुत्ता था ‘मेड इन चाइना’, लेकिन ‘गलगोटिया’ ने चीनी चेपी हटाकर अपना बना लिया और सम्मेलन में प्रदर्शित कर दिया तथा इस धत्कर्म के लपेटे में मंत्री को भी ले लिया। पोल खुलते ही तुरंत कार्रवाई हुई। ‘गलगोटिया’ को तुरंत बाहर करने की खबर आई। फिर भी विपक्ष ने मौका न छोड़ा। विश्वगुरु की जैसी ‘भद’ पिटी, वैसी न देखी, न सुनी।
शुक्रवार की दोपहर विपक्षी दल के कुछ युवा कार्यकताओं ने एआइ सम्मेलन के परिसर में अचानक अपनी बनियानें उतारकर और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के विरोध में नारे लगाकर सम्मेलन की छवि बिगाड़ने की कोशिश की।
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इंडिया एआई एक्सपो में गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर उठे विवाद के बीच ग्लोबल एआई कार्यक्रम में प्रदर्शकों को स्थान कैसे आवंटित किया गया था इस बात पर भी सवाल उठे हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो में प्रदर्शनी स्थल को इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के अधीन एक स्वायत्त निकाय, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) की देखरेख में पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर पट्टे पर दिया गया था। इस दौरान इन संस्थानों द्वारा प्रदर्शित किए जाने वाले मॉडल की कोई औपचारिक जांच नहीं की गई थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
