हमारे देश में पर्यटन को विशेष महत्त्व दिया गया है। वैसे तो भारत कृषि प्रधान देश है, लेकिन कमाई पर्यटन क्षेत्र से होती है। इसको कई तरीके से वर्गीकृत कर देखा जा सकता है जैसे, चिकित्सा पर्यटन और धार्मिक पर्यटन। इस तरह के पर्यटन से विदेशी राजस्व भी प्राप्त हो जाता है, क्योंकि कई देशों से पर्यटक और यात्री भारत आते हैं और हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को समृद्ध करते हैं।
रमणीक स्थलों के पर्यटन को भी कमाऊ माना गया है। पहाड़ों, नदी किनारे और समुद्र तट पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इस पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कई स्थलों का पुनरुद्धार कर पर्यटकों को आकर्षित किया गया है। आकर्षक पर्यटन स्थलों को देखने जब विदेश वे आते हैं, इससे देश को फायदा ही होता है।
मगर अब एक नया संकट हमारे सामने हैं। ईरान और अमेरिका युद्ध के कारण कच्चे तेल, गैस और उर्वरक का भारी संकट पैदा हो गया है। देश के शीर्ष नेतृत्व ने मितव्ययी होने का संदेश दिया है। सोना न खरीदने, पेट्रोल-डीजल बचाने और विदेशी यात्राएं कम करने की नसीहत दी गई है। लक्ष्य एक ही है कि विदेशी पूंजी बचाई जाए, ताकि विदेशी विनिमय में हम अपने बजट घाटे और चालू घाटे को संभाल सकें और डालर के मुकाबले रुपए के गिरते जाने से बचा सकें।
इन चुनौतियों के बीच पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। उसे और विकसित किया जा सकता है। इस पर काम करने की जरूरत है। भारत कई संस्कृतियों का देश है। इतनी विविधता वाला राष्ट्र दुनिया में कहीं नहीं हैं। कृषि प्रधान देश होने के कारण भारत की एक अनूठी लोक संस्कृति भी है। ग्रामीण समाज के हर क्षेत्र की अपनी विशेषता है। अपने-अपने लोकगीत हैं और अपनी-अपनी लोक परंपराएं हैं।
राजस्व बढ़ेगा, पूंजी कमाने का नया रास्ता निकलेगा
अगर इनकी ओर देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया जाए, तो हमारा राजस्व बढ़ेगा। विदेशी पूंजी कमाने का एक नया रास्ता निकलेगा। हमारे सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़े बताते हैं कि कृषि क्षेत्र के मुकाबले सेवा क्षेत्र से कहीं अधिक राजस्व प्राप्त होता है। सेवा क्षेत्र में पर्यटन क्षेत्र मुख्य भागीदार है।
अगर पर्यटन क्षेत्र में हम लोक संस्कृति से परिचय का एक नया आयाम जोड़ दें, तो पर्यटकों की एक बड़ी संख्या हमारे सामने होगी। देश के कई कोने पर्यटन का आकर्षण बन जाएंगे। भारत में विदेशी पर्यटकों की आमद इस तरह भी बढ़ाई जा सकती है। हमारी घरेलू दस्तकारियां, हमारे अनूठे लोक नृत्य और ग्रामीण समाज का लोक व्यवहार पर्यटकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण का केंद्र है। बस इसको और प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इससे हम विदेशी पर्यटकों के लिए भारत में एक नई दुनिया खोज सकते हैं।
पिछले दिनों पंजाब में एक नई नीति शुरू हुई है जिसे ‘होमस्टे नीति’ कहा जाता है। इसमें पंजाबी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने का ‘मास्टर प्लान’ बनाया गया है। ‘होमस्टे’ को लेकर नवाचार या उससे जुड़े नव उद्यमियों के लिए आनलाइन पंजीकरण की नीति बनाई गई है। यह भी घोषणा की गई है कि ऐसे उद्यमियों को योजनाबद्ध तरीके से पांच करोड़ तक की सबसिडी दी जा सकती है।
मगर पंजाब ही क्यों, हम इसका विस्तार देश के हर राज्य में कर सकते हैं, क्योंकि हर राज्य की ग्रामीण संस्कृति और उसका लोकाचार और व्यंजन अलग-अलग हैं। इसे बढ़ावा दें, तो पर्यटक देश के हर कोने में जाना पसंद करेंगे। इस प्रकार हम देखते ही देखते पूरे देश को पर्यटकों के लिए आकर्षक स्थल बना सकते हैं। पंजाब में जो योजना बनाई गई है, इसका नाम ‘फार्मस्टे पालिसी 2026’ दिया गया है।
आजकल होटलों के अतिरिक्त रमणीक स्थलों पर आने वाले नव दंपतियों या विदेशी पर्यटकों को ‘होमस्टे’ की सुविधा दी गई है। हिमाचल और उत्तराखंड की सरकारें इस तरह के निवेश को अपने यहां प्रोत्साहित कर रही है। अब पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों को पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जा सकता है। पंजाब ने इस दिशा में पहल कर दी है। अब यहां किसान पर्यटकों को ठहराने, खाने-पीने और ठेठ ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव कराने की सुविधा शुरू कर सकेंगे।
पूरे देश में छोटे किसानों की की बड़ी संख्या
ध्यान देने की बात है कि पंजाब ही नहीं पूरे देश में छोटे किसानों की की बड़ी संख्या है, जिनके पास औसत क्षेत्र दो एकड़ से पांच एकड़ तक जमीन है। इससे आय इतनी कम होती है कि उनका जीना मुश्किल हो जाता है। आजादी के इतने साल गुजर जाने के बाद भी वे अपनी खेती को व्यावसायिक नहीं बना सके और आज भी उन्हें मानसून पर निर्भर रहना पड़ता है।
मगर अब यह सहारा भी कमजोर पड़ने लगा है। पर्यावरण पर प्रदूषण की मार का असर उन पर भी पड़ा है। बारिश के मौसम में भीषण गर्मी पड़ती है और जब फसलें पकने लगती हैं तो बारिश होने लगती है। ऐसी स्थिति में किसानों को अतिरिक्त आय की जरूरत है। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को जो इस समय खेतीबाड़ी में हाथ बंटा कर परिवार की मदद करती हैं। उनको अतिरिक्त आय का साधन दिया जा सकता है।
वह साधन है- ‘फार्मस्टे’। इसमें इनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण हो सकती है। वे पर्यटकों को ठहराने और ग्रामीण जीवनशैली से परिचित कराने में सहयोग कर आय का उपार्जन कर सकती हैं।
अगर हम लोक संस्कृति के वाहक बन कर पूरे देश के ग्रामीण परिवेश को पर्यटकों के लिए विशेष पर्यटन क्षेत्र बना दें, तो सोचिए, इससे राजस्व में कितनी वृद्धि हो जाएगी। यही सोच कर पंजाब ने नई नीति बनाई है। पहाड़ों में बने ‘होमस्टे’ की तर्ज पर ‘फार्मस्टे’ को विकसित किया जा रहा है। ऐसा हर राज्य क्यों न करें? सभी राज्यों की अपनी लोक संस्कृति है और अपना ग्रामीण आकर्षण।
पंजाब आने वाले पर्यटक खेतों में रह कर ट्रैक्टर चलाने, बैलगाड़ी की सवारी करने, पशुपालन देखने और गांवों के पारंपरिक खानपान व रहन-सहन को करीब से महसूस कर सकेंगे। इसी प्रकार हर राज्य अपनी-अपनी ग्रामीण संस्कृति के अनूठेपन और अपने लोकगीतों एवं लोकनृत्यों से पर्यटकों को लुभा सकता है।
पंजाब में यह तय किया गया कि इस तरह के पर्यटन के लिए किसान के पास कम से कम एक एकड़ कृषि भूमि जरूर हो। इस प्रकार यहां के छोटे किसानों को अतिरिक्त आय का एक साधन मिल गया है। पंजाब में बनी नई नीति में साफ किया गया है कि कुल जमीन के केवल दस फीसद हिस्से पर ही निर्माण किया जा सकेगा, जबकि बाकी 90 फीसद क्षेत्र खुला रखना होगा, ताकि पर्यटकों के लिए खेती और उसका प्राकृतिक स्वरूप बना रहे।
पंजाब में इस परियोजना पर निवेश में दस फीसद सबसिडी मिलेगी। इसकी अधिकतम सीमा पंच करोड़ है। विदेशी पर्यटक आते हैं तो ‘फार्मस्टे’ संचालक को 24 घंटे के भीतर फार्म-सी भरकर प्रशासन को सूचना देनी होगी और ध्यान रखना होगा कि उनका ‘फार्मस्टे’ ग्रामीण परिवेश को बरकरार रखे। गांवों की शांति और सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। यह योजना अपने आप में महत्त्वपूर्ण है।
इससे पहले निर्यात के लिए भी हर राज्य की दस्तकारी को विशेष रूप से प्रोत्साहन देने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सकी। मगर इस योजना में क्योंकि साधारण व्यक्ति का अपना उद्यम शामिल है, इसलिए इसके कामयाब होने की गुंजाइश काफी अधिक है।
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