गर्मी इस बार कहर बरपा रही है। यह पिछले कई वर्षों की अपेक्षा अधिक है। कुछ राज्यों में आंधी-पानी और ओले गिरने के कारण तापमान में कुछ गिरावट आई थी, लेकिन अब सूरज फिर आग बरसाने लगा है। दिन में लू चल रही है और रात में भी लोग गर्मी से बेहाल हैं। पारा 46 डिग्री पार कर रहा है।

भारतीय मौसम विभाग ने जून तक के मौसम का जो पूर्वानुमान जारी किया है, उसके अनुसार पूर्वी मध्य, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण पूर्वी प्रायद्वीप में इस बार अधिक गर्मी पड़ेगी। इस वर्ष गर्मी 2001 का रेकार्ड तोड़ सकती है। पहाड़ों में बारिश होगी और मैदानों में लू चलेगी। रात में भी लू चलने की संभावना जताई गई है।

मई में यह हाल है, तो जून में पारा और ऊपर जा सकता है। ऐसी आशंका वैज्ञानिक व्यक्त कर रहे हैं। ऐसे में बिना किसी बचाव के घर से निकलना खतरे से खाली नहीं है। दिल्ली में कुछ उपाय किए गए हैं जो पर्याप्त नहीं हैं।

2026 में भीषण गर्मी की चेतावनी

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 में भीषण गर्मी पड़ेगी। अल नीनो और सुपर अल नीनो के कारण 31 जुलाई के बाद तक पूरी दुनिया में बहुत अधिक गर्मी पड़ेगी। प्रशांत महासागर का जल और उसकी सतह का जल दोनों गर्म हो रहे हैं। इसी कारण इस साल दुनिया भर में गर्मी बढ़ेगी और सूखे की स्थिति उत्पन्न होगी।

मानसून में हल्की बारिश का अंदेशा है। किसानों को सूखे की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इससे फसलों की पैदावार पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। प्रशांत महासागर की सतह के जल का दो डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान बढ़ने की स्थिति को सुपर अल नीनो कहा जाता है। यही पूरी दुनिया में गर्मी के कारण बेचैनी पैदा करेगा। दूसरी ओर अमेरिका, ईरान, रूस, यूक्रेन और इजराइल-लेबनान युद्ध में इतना ज्यादा बारूद का इस्तेमाल किया गया है कि धरती से लेकर आसमान तक कांप उठा है।

गर्म हवाएं लोगों को बेहाल कर रहीं

भारत में गर्म हवाएं लोगों को बेहाल कर रही हैं। कई जिलों में लू चल रही है। राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश तक मध्य मई में ही पारा 45 से 46 डिग्री तक पहुंच गया। रात का पारा भी ऊपर जा रहा है। कोयले की कमी के कारण बिजली का उत्पादन कम हो रहा है। ऐसी स्थिति में बिजली कटौती का असर राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अधिक दिखेगा। अत्यधिक कार्बन उत्सर्जन और वनों की कटाई के कारण गर्मी और भयावह होती जाएगी।

वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि दुनिया की जलवायु खराब हो गई है। भूमिगत जल सूख रहा है। यह इतना गंदा हो गया है कि पीने लायक नहीं है। गांवों और शहरों की हवा विषैली हो गई है। गंगा और यमुना सहित सभी नदियां खतरनाक स्तर पर दूषित हो गई हैं। कभी इन नदियों का पानी पीने के काम आता था। आज इनका जल आचमन के लायक भी नहीं बचा।

उत्तर प्रदेश के 67 जिले गर्मी की चपेट में

कृषि विभाग ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के 67 जिले गर्मी की चपेट में आ गए हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब और दिल्ली इस समय भयंकर गर्मी की चपेट में हैं। यमुना सूख रही है। मौसम विभाग की सारी घोषणाएं धरी रह जा रही हैं। सच यह है कि मनुष्य जिस तरह से प्रकृति का विनाश करने पर तुला है, यह धरती के लिए शुभ संकेत नहीं है।

कनाडा जैसे ठंडे देश में पारा ऊपर जा रहा है। तालाबों-झीलों और यहां तक कि समुद्र तक का पानी गरम हो रहा है। भूजल स्तर इतना नीचे चला गया है कि जल संकट गहराने का अंदेशा है। यह हाल कमोबेश पूरे भारत में है। पहले तालाब और झील गांव-गांव में होते थे। इससे भूजल संतुलन बना रहता था। बरसात का पानी गांवों के तालाबों में भर जाता था। इससे जमीन के नीचे पानी की कमी नहीं होती थी। सरकार की गलत नीतियों के कारण घर-घर पंप लग जाने के कारण भूजल समाप्त होने की स्थिति में है। वैज्ञानिकों ने आधे से ज्यादा भारत को भूजल रहित क्षेत्र घोषित किया हुआ है, लेकिन फिर भी इस संकट को कोई भी गंभीरता से नहीं ले रहा।

अचानक नहीं आया यह संकट

पहले लोग गांवों में तालाब और झील खुदवाते थे। कुएं और बावड़ी बनवाते थे। आज लोगों ने तालाबों और झीलों को पाट कर वहीं पर अपने घर बना लिए हैं। नदियों को संकरा कर दिया है। दूसरी ओर, आसमान से आग बरस रही है। अगर ऐसी ही गर्मी लगातार पड़ती रही, तो जीवन जीना मुश्किल हो जाएगा। हालात अनियंत्रित हो जाएंगे।

यह संकट अचानक नहीं आया है। हम इतने विकासशील हो गए हैं कि अपना भला-बुरा भूल गए और पर्यावरण को अकल्पनीय क्षति पहुंचाई। कार्बन गैसों का इतना उत्सर्जन किया कि इसका जलवायु पर प्रतिकूल असर पड़ा है। भीषण गर्मी और अकाल के जोखिम को देख कर भी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि खाड़ी युद्ध के कारण पिछले दिनों डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए। रसोई गैस से लेकर सीएनजी तक महंगी हो गई है। बिजली की दरें पहले से महंगी हैं। इस साल खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ने वाली है, क्योंकि डीजल पहले से बहुत महंगा हो चुका है। रासायनिक खाद के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं। अब प्राकृतिक खाद से काम चलाने की नसीहत दी जा रही है। क्या उससे भारी मात्रा में फसल हो पाएगी?

देश के करीब अस्सी करोड़ लोग पांच किलो गेहूं-चावल से ही जीवनयापन कर रहे हैं। मगर जब धान ही नहीं होगा, तो चावल कहां से आएगा? ज्वार, बाजरा और मक्का पहले ही सूखे जा रहे हैं। पूरी खरीफ फसल संकट में है, लेकिन किसानों के अलावा इसकी किसी को चिंता नहीं है।

सरकार को संभावित सूखे और अकाल को लेकर योजनाएं बनानी होंगी

बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून का कोई ठिकाना नहीं होता। ऐसा बताया जा रहा कि अल नीनो और सुपर अल नीनो के प्रभाव से भारत में 30 अगस्त तक कम बारिश होगी। सूखे की स्थिति बन सकती है। इसलिए समय रहते सरकार को संभावित सूखे और अकाल को लेकर योजनाएं बनानी होंगी। भारतीय कृषि तो सदियों से मानसून पर निर्भर रही है।

ग्लासगो में हुए सम्मेलन में भारत ने 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने पर प्रतिबद्धता जताई थी। मगर स्थिति तो अभी से खराब हो चुकी है। तब तक तो हालात बहुत खराब हो जाएंगे। दरअसल, सड़क पर चलने वाले पेट्रोल और डीजल के वाहन बहुत अधिक प्रदूषण फैलाते हैं। ध्वनि प्रदूषण भी खूब होता है। वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण भारत के अधिकांश शहरों की वायु प्रदूषित हो गई है। इस कारण तपेदिक, कैंसर और अस्थमा जैसी बीमारियां होने लगी हैं।

अब यह सिर्फ सरकार की ही जिम्मेदारी नहीं है, आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वह जलवायु सुधार के लिए वह खुद भी पहल करे। पेट्रोल-डीजल वाले वाहनों का उपयोग कम करे। जल का अंधाधुंध दोहन न करे। जलवायु संकट आसानी से दूर होने वाला नहीं है। इसके लिए सभी को मिलजुल कर प्रयास करने होंगे। अभी नहीं चेते, तो फिर बहुत देर हो जाएगी।

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मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भीषण गर्मी और लू चलने की चेतावनी दी है। विभाग के अनुसार 19 से 24 मई तक अधिकतम तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें