बीते काफी दिनों से इस बात की चर्चा थी कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व पंजाब संगठन में बदलाव कर सकता है। इसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर टीवी तक में अटकलों का दौर जारी था लेकिन अब पार्टी ने कह दिया है कि कोई बदलाव नहीं होगा।

पंजाब में हालिया निकाय चुनाव के नतीजों में कांग्रेस का प्रदर्शन ठीक नहीं रहा और वह आम आदमी पार्टी से काफी पीछे रह गई।

निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कांग्रेस नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठक में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी आमने-सामने आ गए थे।

चन्नी-अमरिंदर के बीच तल्खी

चन्नी ने अमरिंदर के गृह क्षेत्र गिद्दड़बाहा में पार्टी के खराब प्रदर्शन का मुद्दा उठाया था। दूसरी ओर, अमरिंदर ने चन्नी के विदेश जाने की बात को मुद्दा बना लिया था। यह भी खबर आई थी कि विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा बीच में ही बैठक छोड़कर चले गए थे।

चन्नी पंजाब कांग्रेस में दलित समुदाय को सही भागीदारी न मिलने का सवाल खुले मंच से उठा चुके हैं, तब भी यह मामला काफी चर्चा में रहा था।

पंजाब में कांग्रेस संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच केंद्रीय नेतृत्व ने कई बार कहा कि गुटबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खुद राहुल गांधी ने पार्टी मंच से पंजाब कांग्रेस के नेताओं को गुटबाजी छोड़ने और संगठन के लिए काम करने का संदेश दिया था और चेताया भी था।

अब जब फिर से पंजाब कांग्रेस के प्रभारी भूपेश बघेल ने कहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को नहीं बदला जाएगा तो सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के नेता गुटबाजी को छोड़ेंगे?

2027 की शुरुआत में जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें पंजाब एक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस को उम्मीद है कि उसकी सरकार बन सकती है लेकिन ऐसा लगता है कि वह पंजाब को लेकर कंफ्यूज है और कोई मजबूत फैसला नहीं कर पा रहा है।

सिद्धू ने किया था अमरिंदर को परेशान

कुछ ऐसा ही पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी देखने को मिला था। तब भी कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पंजाब में मुख्यमंत्री बदलने को लेकर लगातार उहापोह की स्थिति में रहा। उस दौरान तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने उस वक्त के वजीर-ए-आला कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

तब सरकार और संगठन के बीच आए दिन लड़ाई होती थी और इससे पंजाब में पार्टी की अच्छी-खासी फजीहत हुई थी। तब एक बेहद खराब फैसला लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने चुनाव से कुछ महीने पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह जैसे अनुभवी और बड़े कद वाले नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा दिया था।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की जगह पार्टी ने दलित समुदाय से आने वाले चरणजीत सिंह चन्नी को सूबे की जिम्मेदारी सौंपी थी लेकिन उसके बाद भी पंजाब में सरकार और संगठन का झगड़ा खत्म नहीं हुआ। नवजोत सिंह सिद्धू कई बार चरणजीत सिंह चन्नी से भिड़ गए और खुद को भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करने लगे।

कांग्रेस को मिली थी करारी हार

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाने का फैसला बहुत भारी पड़ा और 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार हुई। आम आदमी पार्टी ने चुनाव में प्रचंड जीत हासिल की और कांग्रेस के सिर्फ 18 विधायक ही विधानसभा में पहुंचे थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी खुद दो सीटों से चुनाव हार गए थे।

यह माना जा रहा था कि कांग्रेस नेतृत्व इस बार पंजाब को लेकर बेहद संजीदा है और वह कोई ऐसा फैसला करेगा जिससे पार्टी नेता एकजुट होकर चुनाव मैदान में जाएंगे लेकिन पिछले कुछ वक्त में एक बार फिर बड़े नेताओं के बीच अच्छी-खासी तकरार देखने को मिली। विशेषकर चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच सियासी रिश्ते सहज नहीं रहे।

पंजाब को लेकर फैसला कर पाएगा हाईकमान?

ऐसे वक्त में जब पंजाब के विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने का वक्त बचा है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि पार्टी के सभी नेता गुटबाजी और आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होंगे और राज्य में फिर से पार्टी की सरकार बनाएंगे। लेकिन जिस तरह की लड़ाई पार्टी के नेताओं के बीच देखने को मिल रही है, उससे निश्चित रूप से कार्यकर्ता निराश ही होंगे।

ऐसा लगता है कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के द्वारा दी जा रही चेतावनियों का राज्य के नेताओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। अगर कांग्रेस नेतृत्व वाकई अनुशासन का डंडा चलाता तो राज्य में कांग्रेस के नेता इस तरह एक-दूसरे से नहीं भिड़ते।

देखना होगा कि क्या पंजाब में कांग्रेस अपने इस वादे पर टिकी रहेगी कि वह नेतृत्व परिवर्तन नहीं करने जा रही है और क्या उसके नेता लड़ाई-झगड़े को छोड़कर एक मंच पर आकर पार्टी को जिताने का काम करेंगे।

ऐसा तभी हो पाएगा जब कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व वाकई कोई सख्त कार्रवाई करके यह मैसेज देगा कि पार्टी के अनुशासन से ऊपर कोई भी नहीं है और किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पंजाब में कांग्रेस के कार्यकर्ता भी ऐसा ही चाहते हैं लेकिन शायद हाईकमान 2022 की ही तरह ही उनकी भावनाओं को नहीं समझ पा रहा है।

पंजाब निकाय चुनाव में AAP की शानदार जीत

आम आदमी पार्टी ने पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की है। ​​पार्टी ने 1977 वार्डों में से 900 से ज्यादा वार्ड जीते हैं। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।