सत्ता की जैसी किरकिरी ‘एनसीईआरटी’ ने कराई वैसी किसी ने न कराई। जैसे ही आठवीं कक्षा की पाठ्य पुस्तक में ‘एनसीईआरटी’ ने ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ जैसा पाठ रखा, वैसे ही सबसे बड़ी अदालत का कोड़ा पड़ा। प्रधान न्यायाधीश इस कदर नाराज दिखे कि कह दिए कि न्यायपालिका को गोली मारी गई है, खून बहाया गया है! एनसीईआरटी तुरंत पुस्तक रोके और जवाब दे… सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा। ‘एनसीईआरटी’ की हवा खुश्क। बेचारे शिक्षा मंत्री माफी मांगते दिखे। मामले की गंभीरता देख प्रधानमंत्री ने इजराइल से ही कहा कि पता लगाया जाए कि इस सबके पीछे कौन है।

अब तक ‘सत्ता’ का सत्य था, अब ‘सत्य’ ही सत्ता है। कल तक सत्ता का ‘सत्य’ यह था कि ‘कट्टर ईमानदार’ भी ‘कट्टर बेईमान’ हैं, लेकिन जैसे ही सत्य और उसके साथियों को एक अदालत ने शराब घोटाले के आरोपों से मुक्त किया, वैसे ही सत्ता का सत्य हारा और कट्टर सत्य जीता।

अदालत ने साफ कहा कि एक भी सबूत नहीं है… यह इतना फर्जी केस है कि मुकदमा तक नहीं चलाया जा सकता… सीबीआइ पर केस होना चाहिए..!

फैसले के आते ही सत्य का गला भर आया। सत्य के साथियों में जान पड़ गई और वे कहने लगे कि सत्य परास्त नहीं हो सकता। कट्टर ईमानदार ने प्रेस में कहा कि मैंने जीवन में केवल ईमानदारी कमाई है… आज मेरे दिल से बहुत बड़ा बोझ उतर गया। आपने जेल भेज दिया, लेकिन कुछ नहीं बिगाड़ सके। आप आज चुनाव करा लो… दिल्ली में दस सीट से ज्यादा नहीं मिलेंगी..! अब केजरीवाल आपसे संभलने का नहीं..!

कैसे दिन आ गए हैं कि अभी तक गलगोटिया का कुत्ता ही पीछे पड़ा था, अब सत्य पीछे पड़ गया। चैनलों का भी स्वर बदला। कल तक जो सत्य को असत्य बताते थे, अब सत्य के सत्य के साथ नजर आए..! सत्ता प्रवक्ता कहिन कि यह फैसला तकनीकी मामला है, हम फैसला देखकर बात करेंगे..! सीबीआइ से खबर आती दिखी कि वह हाई कोर्ट जाएगी..! मगर सबसे ज्यादा झटकेदार लाइन विपक्ष के सबसे बड़े प्रवक्ता से आई। पत्रकार ने जैसे ही पूछा कि इस फैसले पर आपका क्या कहना है, तो जवाब आया कि चूंकि पंजाब और गुजरात में चुनाव है, इसलिए सत्यवादियों को नहला धुलाकर वाशिंग मशीन में डाल कर नया बनाया जा रहा है।

उधर एआइ यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आयोजन में विरोध प्रदर्शन करने वालों की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही। विपक्ष के नेता ने प्रदर्शनकारियों को ‘बब्बर शेर’ कहा। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की धर-पकड़ शुरू की। सत्ता ने विरोध के तरीकों को देश की छवि बिगाड़ने के इरादे से किया गया सुनियोजित षड्यंत्र बताया और कहा इस सबके पीछे कौन है। इसकी जांच की मांग की जाने लगी। विपक्ष ने ‘बब्बर शेरों’ के मामले को और तूल दिया… फिर नया पोस्टर युद्ध शुरू हुआ। पोस्टर कहते ‘मोदी कंप्रोमाइज्ड…’, जवाब में सत्ता पक्ष के पोस्टर कहते ‘नेहरू कंप्रोमोइज्ड..!’ इस तरह बचा क्या?

गुरुवार की शाम होते-होते उस विरोध प्रदर्शन की कहानी ने चैनलों में एक नया मोड़ लिया। सोशल मीडिया पर असर रखने वाले दर्जनों हस्तियां बताती नजर आईं कि ‘किसी’ ने हमें संपर्क कर कहा कि हम इस विरोध प्रदर्शन की तरफदारी करें..! प्रदर्शनकारी युवाओं की तुलना भगतसिंह से करें..! ऐसा करने के लिए पैसे दिए जाएंगे। एंकर बताते रहे कि इनमें से अधिकांश हस्तियां पहले ही विपक्ष के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं, तब भी उनसे संपर्क किया गया।

एक बाबा ने दूसरे बाबा पर आरोप लगाए और इस तरह बाबा से बाबा का अखाड़ा खुला रहा। पहले चैनलों में सामना हुआ। बाबा भी विभाजित नजर आए एक कहे कि वह यौन अपराधी… किस बात का बाबा… दूसरा कहे कि आरोप लगाने वाला खुद ‘हिस्ट्रीशीटर’… उसकी बात का क्या भरोसा। यही होना था। बाबाओं का भाव बढ़ेगा, तो बाबाओं के टकराव भी बढ़ेंगे और अंदर की बातें बाहर आएंगी..। अदालत का फैसला सुरक्षित – बाबा की जांच जारी रह सकती है… मार्च के तीसरे हफ्ते तक बाबा की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती..!

अब जेएनयू में ‘लौंग मार्च’। कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का प्रस्ताव और जेएनयू उपकुलपति का सार्वजनिक बयान। जेएनयू के छात्रों का एक वर्ग इतना नाराज कि इंडिया गेट तक ‘लौंग मार्च’ करने की कोशिश। पुलिस ने रोका तो, भिड़ंत हो गई। एक छात्र नारा लगाता दिखा कि जेएनयू की ताकत दिखा दो… पुलिस कार्रवाई शुरू!

सुर्खियों में आने वाला सबसे प्रचारित दृश्य इजराइल की संसद ‘नेसेट’ से आते दिखना। विदा बेला आई तो ‘कूटनीति’ में ‘अश्रुनीति’ का ऐसा मिश्रण हुआ कि नेतन्याहू मोदी के गले लग कर भावुक होते रहे। क्या यहूदी लोग भी विदाई के वक्त भारतीयों की तरह रोते हैं?