इन दिनों सोशल मीडिया पर रोज कोई न कोई नई रील दिखती है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाया जाता है। जब प्रधानमंत्री ने अपना वीडियो डाला इंस्टाग्राम पर कुछ दिन पहले यह कहने के लिए कि वे इतने दरियादिल हैं कि उन ‘बेटियों’ को ‘माफ’ करते हैं जिन्होंने उनको और उनकी दिवंगत मां को गालियां दी थीं।
इस वीडियो के निकलने के कुछ ही घंटों बाद उसको बदल कर एक सुंदर लड़की बीच में बोलती दिखी, जिसने मुस्करा कर प्रधानमंत्री की हर बात में दखल देकर दिखाया कि वे जो कह रहे थे, उसका उसकी उम्र की लड़कियों पर कोई असर नहीं होने वाला है।
प्रधानमंत्री ने अपने इस क्षमा करने वाले वीडियो में कहा कि हमारी भारतीय सभ्यता में जो लोग बड़े हुए हैं उनको बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रहा कि लड़कियों के मुंह से गालियां निकल रही हैं आजकल। इस बात का खूब मजाक उड़ाया गया यह कह कर कि ‘भारतीय सभ्यता’ में जीने वाले ऐसे लोगों की भावनाओं को तब कोई ठेस नहीं पहुंची, जब बेटियों को दिल्ली पुलिस ने लाठियों से मारा और उनके कपड़े फाड़े।
न ही उनको तकलीफ हुई यह देख कर कि छात्रों पर पुलिस ने पैलेट गन चलाई। न उस समय तकलीफ हुई, जब प्रधानमंत्री के एक करीबी मंत्री ने संसद में झूठ बोला कि गोलियां चली ही नहीं थीं। गोलियों से तकलीफ नहीं हुई, लेकिन गालियों से बहुत तकलीफ हुई।
सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर लोकप्रिय हुई हैं वे रीलें, जिनमें प्रधानमंत्री पर एक गाना गाया जा रहा है। मोदी के बारह वर्षों के शासनकाल में कभी किसी की उनका मजाक उड़ाने की हिम्मत नहीं हुई। अब काकरोच जनता पार्टी के सदस्यों ने मजाक करके दिखाया है कि उनको प्रधानमंत्री से कोई डर नहीं है उनको और न ही किसी और को होना चाहिए। प्रधानमंत्री की तरफ से पूरी कोशिश की गई है जेन-जी को इतना डरा कर रखने की, ताकि दोबारा प्रदर्शन करने की उनकी हिम्मत न हो।
इस कोशिश में छात्रों से माफियां मंगवाई गई हैं इंस्टाग्राम की रीलों के जरिए और काकरोच जनता पार्टी के नेताओं को बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। कभी सौरव दास को बदनाम करते दिखते हैं मोदी भक्त, यह कहते हुए कि उनको महंगी चीजें खरीदने का कुछ ज्यादा शौक है। कभी यह कह कर उनको नीचा दिखाया जा रहा है कि इतने महंगे और आलीशान घर में रह रहे हैं, बिना यह साबित किए कि इतना पैसा उनके पास आता कहां से है।
अभिजीत दिपके के बारे में हर दूसरे घंटे सोशल मीडिया पर दिखता है कोई न कोई पोस्ट, यह कहते हुए कि इतने गरीब घर से आते हैं कि बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए पैसा जरूर किसी जॉर्ज सोरोस किस्म के व्यक्ति से आया होगा। पंचानबे साल का यह अमेरिकी अरबपति मोदी भक्तों की नजरों में सबसे बड़ा खलनायक है। मोदी सरकार के हर विरोध प्रदर्शन में दिखते हैं इनको सोरोस के पैसे।
राजग की सरकार बनने से पहले शायद ही आम भारतीयों को सोरोस का नाम मालूम था। आज भी ज्यादातर लोगों का मानना है कि सोरोस जीता है सिर्फ मोदी को हटाने के लिए। वास्तव में सोरोस की दान संस्थाएं कई देशों में उन लोगों का समर्थन करती हैं जो तानाशाह नेताओं के खिलाफ लड़ते हैं। सोरोस ने अपने बचपन में हिटलर की नाजी फौजों को उसके देश हंगरी में आते हुए देखा था और एक यहूदी होने के नाते हिटलर का यूरोप के यहूदियों पर बर्बर जुल्म देखा था। सो कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि उनकी राजनीति प्रगतिशील और उदारवादी है।
रही मेरी बात तो इतना कहना चाहती हूं कि मेरी हमदर्दी भारत के नौजवानों के साथ है। मैं न सिर्फ उनका दर्द समझ सकती हूं, बल्कि यह भी समझती हूं कि अगर मैं उनकी उम्र की होती, तो मैं भी इस देश की बदहाली देख कर क्रोधित होती। अच्छा होता अगर प्रधानमंत्री उन मुद्दों पर ध्यान देते जो छात्र और उनके नेता पहले जंतर-मंतर पर उठा रहे थे और अब झारखंड में। अच्छा होता अगर प्रधानमंत्री बेहाल शिक्षा व्यवस्था पर दो आंसू बहाते, दो शब्द सहानुभूति के बोलते।
अच्छा होता अगर वे बेरोजगारी की गंभीर समस्या की तरफ ध्यान देकर देश के नौजवानों को समझाते, क्योंकि इस देश में वे नौकरियां अभी तक नहीं दिखती हैं जिनका वादा उन्होंने बारह वर्ष पहले किया था। आज हाल यह है कि हर साल लाखों युवा पढ़ाई खत्म करके आते हैं नौकरी ढूंढ़ने। इनमें से आधे से कम ही हैं जिनको कोई अच्छी नौकरी मिलती है। ऐसी स्थिति में क्यों नहीं देश के नौजवानों में आक्रोश पैदा हो?
भारत के नौजवानों की समस्याएं गंभीर हैं और उनका भविष्य भी रौशन नहीं है। उनकी बातों को सुनने के बदले प्रधानमंत्री सत्ता की पूरी शक्ति का इस्तेमाल कर रहे हैं उन लोगों के खिलाफ जिन्होंने जंतर-मंतर पर उनका मजाक उड़ाया था। कहने को तो उनको तकलीफ सिर्फ गालियों से हुई थी, लेकिन थोड़ा सा सोचेंगे, तो आपको भी लगने लगेगा कि उनको असली तकलीफ हुई है इस बात से कि उनका मजाक उड़ाया गया था।
खूब पैसा खर्च कर उनकी छवि बनाई गई है एक ऐसे राजनेता की जो इतना शक्तिशाली है कि उनका स्थान भगवान से थोड़ी ही कम है। ज्यादा नहीं। स्वीकार करना मुश्किल हो रहा है उनको यह कहना कि उनको असली चोट पहुंची है गालियों से नहीं, मजाक से। वैसे भी ऐसा कहेंगे नहीं। कहेंगे तो उनकी कमजोरियां दिखने लगेंगी।
मोदी देश के सबसे अनुभवी राजनेता हैं, तो छवि की मरम्मत जरूर कर लेंगे, लेकिन फिर भी लगता है अब कि उनके बुरे दिन शुरू हो गए हैं।
