सत्तापक्ष, विपक्ष के आगे एक ‘हाथजोड़ू प्रार्थना’ है। इसके बरक्स विपक्ष एक ‘शोर’ है, ‘नारेबाजी’ है, ‘काला वस्त्र’ है और ‘पोस्टर’ है। एक जिद है कि हमारा एजंडा मानो, तब चलने देंगे संसद… यानी हम चलाएंगे संसद..। सत्तापक्ष आग्रह करता है : हे विपक्ष जी! कृपया संसद चलने दें, सरकार हर मुद्दे पर विचार करने के लिए तैयार है, नियम एवं समय तय करने पर विचार करेंगे। आसन की ओर से भी विपक्ष के नेताओं से बार-बार आग्रह किया जाता है कि आप वरिष्ठ अनुभवी सांसद हैं, शोर न करें, पोस्टर न लहराएं, सदन चलने दें..। कुछ देर बाद संसद पहले बारह बजे तक, फिर दो बजे, फिर तीन बजे तक और चार बजे तक स्थगित होती रहती है।

सरकार जितना ‘हाथजोडू मुद्रा’ में नजर आती है, उतने ही सबसे बड़े विपक्षी दल के तेवर कड़े होते दिखते हैं। अफसोस कि सत्तापक्ष के पास इसका कोई तोड़ नहीं! जब से मानसून सत्र शुरू हुआ है, तभी से विपक्ष आक्रामक है और सत्तापक्ष रक्षात्मक! विपक्ष पूरी तरह सक्रिय है और उसमें राहुल गांधी आगे हैं…विपक्ष का सारा ‘स्पेस’ उनका है।

सत्तापक्ष, विपक्ष को यह कहकर लज्जित करना चाहता है कि उसका ऐसा अड़ियल व्यवहार गैरजिम्मेदाराना है। एक ओर वह कहता है कि संविधान खतरे में है, तो दूसरी ओर संसद न चलने देकर वह संविधान को ही खतरे में डालता है। सरकार को रक्षात्मक देख विपक्ष अपनी करता रहता है कि संसद चलाना सत्तापक्ष का काम… हमारा काम विरोध करना है।

पहले विपक्ष की तीन मांगें मानो कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, छात्रों से माफी मांगें और नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा दें। फिर ‘काकरोच जनता पार्टी’ की एक और मांग कि प्रदर्शनकारियों पर केस वापस लें।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के कारण झुकी सरकार, जानें अब तक क्या-क्या हुआ

उधर, ‘काकरोच जनता पार्टी’ के कुछ नेताओं के लिए ‘भूख हड़ताल’ भारी पड़ी। एक ‘काकरोच’ ने भूख हड़ताल के दौरान ‘बर्गर’ खाया और फिर टीवी चैनलों को स्वयं बताया कि खाया। इसके बाद वह ‘काकरोच जनता पार्टी’ के प्रवक्ता पद से बाहर हो गया, लेकिन वह बंदा भी गजब कि जाते-जाते कह गया कि ‘उन्होंने’ भी कचौड़ी खाई है। ‘काकरोच’ के नेता उतनी सुर्खियों में नहीं दिखते, जितने कि सोनम वांगचुक या विपक्ष के नेता हैं।

संसद में हर दिन अब सिर्फ लंबा ‘स्थगन’ है! संसद स्थगित, लेकिन बाहर मकर द्वार पर विपक्ष का लगभग हर रोज प्रदर्शन। फिर एक दिन सत्तापक्ष के सांसदों का मकर द्वार पर जवाबी प्रदर्शन…। मानसून सत्र के पहले दिन ही ‘काकरोच जनता पार्टी’ का संसद की ओर ‘कूच’ का एलान। पुलिस द्वारा रास्ते बंद करना, लेकिन बढ़ती भीड़ बेकाबू, फिर पत्थरबाजी और पुलिस का बल प्रयोग। ऐसे दृश्य दिल्ली सहित कई बड़े शहरों में देखे गए।

चैनलों पर सब कुछ का सीधा प्रसारण… कुछ चैनलों के पत्रकार भी प्रदर्शनकारियों का निशाना बने…बहसें विपक्ष के नेताओं और प्रदर्शनकारियों के पक्ष में झुकती हुई..। उधर, पुलिस का कथन कि प्रदर्शन में बहुत से बाहरी तत्त्व भी शामिल दिखते हैं… वे अपने चेहरों को छिपाकर, हेल्मेट पहनकर पत्थर चलाते हैं, कुछ तलवारें भी लहराते हैं, वे पुलिस या सार्वजनिक संपत्ति को निशाना बनाते हैं।

कुछ एंकर और चर्चकों के लिए कथित ‘जेन-जी पीढ़ी’ का आचरण आपत्तिजनक, कइयों को संदेह कि ये विद्यार्थी हैं या असामाजिक तत्त्व? ये किसी विदेशी ‘टूलकिट’ से प्रेरित हैं और मांग कि पुलिस सख्ती बरते इनको हटाए। इस बीच, बॉलीवुड अभिनेताओं समेत कई हस्तियां छात्रों के समर्थन में खड़ी हो गईं!

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फिर एक शाम सबसे बड़े विपक्षी दल का प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन और नारे। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इसका नेतृत्व करते हुए। एक मंत्री का राहुल से मिलकर बातचीत करना कि विपक्षी नेता सुरक्षा की दृष्टि से इस संवेदनशील इलाके से हट जाएं… सरकार बातचीत करने को तैयार है। जब नहीं हटे, तो पुलिस ने जबरन हटाया। कई चर्चक कहिन कि विपक्ष एक बार फिर सरकार को हिलाकर निकल गया।

उधर, गुरुवार की रात को प्रधानमंत्री ने एक नया एलान किया कि प्रश्नपत्र लीक मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए त्वरित अदालतें बनाई जाएंगी, सख्त कानून लाएंगे, जिसमें सजा की अवधि और जुर्माने को बढ़ाने के प्रावधान होंगे। जब पूछा गया कि क्या विपक्ष नए कानून का समर्थन करेगा, तो जवाब आया कि पहले संबंधित विधेयक को देखेंगे, तब बताएंगे।

इसी बीच, सोनम वांगचुक की ओर से 26 दिन पुरानी भूख हड़ताल को समाप्त करने की खबर आई। साथ ही यह खबर भी आई कि किसी ‘न्यूट्रल’ जगह पर ‘काकरोच जनता पार्टी’ के नेता सरकार से बातचीत करने के लिए तैयार हैं। सड़क से लेकर संसद तक गहमागहमी जारी… और एक बार फिर संसद की कार्यवाही का स्थगन किया गया..! इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री को आखिर जाना पड़ा।