एक और युद्ध शुरू हो चुका है। इजरायल उकसाने वाला है और अमेरिका युद्ध का आगाज करने वाला है। इजरायल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह विश्वास दिला दिया है कि ईरान के पास परमाणु हथियार हैं या लगभग विकसित करने के अंतिम चरण में है और वह अमेरिका को धमकी देने की योजना बना रहा है। हालांकि, वाल स्ट्रीट जर्नल ने रपट दी है कि गोपनीय जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों ने इन कथित संभावित धमकियों को निराधार बताकर सिरे से खारिज कर दिया है। फिर भी, ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ व्यापक पैमाने पर युद्ध शुरू कर दिया है।

अतीत के झूठे दावे

ईरान के परमाणु हथियारों के कथित खतरे की बात उसी तरह है, जैसे इराक के पास ‘सामूहिक विनाश के हथियार’ होने का झूठा दावा किया गया था, जिसका इस्तेमाल अमेरिका के राष्ट्रपति बुश ने वर्ष 2003 में इराक पर आक्रमण करने के लिए किया था। यह उस झूठे दावे से भी मिलता-जुलता है कि मुअम्मर अल-गद्दाफी ने लीबिया में जनसंहार की योजना बनाई थी, जिसके आधार पर वर्ष 2011 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ‘मानवीय संकट को रोकने’ के लिए अमेरिकी हस्तक्षेप को उचित ठहराया था। ट्रंप ने पिछले दिनों वेनेजुएला में ‘सत्ता परिवर्तन’ लाने के लिए मोनरो सिद्धांत को नए सिरे से गढ़ा और ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए इस सिद्धांत का विस्तार किया है।

अमेरिका के ये सैन्य हस्तक्षेप अवैध थे और हैं। अमेरिका का राष्ट्रपति वहां की कांग्रेस की अनुमति के बिना किसी अन्य देश के विरुद्ध युद्ध की घोषणा नहीं कर सकता। ऐसे हस्तक्षेप संयुक्त राष्ट्र चार्टर के भी विरुद्ध हैं। किसी भी देश की ओर से दूसरे संप्रभु राष्ट्र में सत्ता परिवर्तन करना न केवल अवैध है, बल्कि अनैतिक भी है। जिस तरह रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ छेड़ा गया युद्ध नाजायज है, उसी प्रकार अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो का अपहरण करना तथा अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामेनेई एवं उनके सहयोगियों को मार गिराना भी अवैध है। भारत ने इनकी मौत पर छह दिन बाद शोक व्यक्त किया।

इजरायल की संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन इजरायली परिवारों के प्रति भारत की संवेदना व्यक्त की, ‘जिनकी दुनिया सात अक्तूबर को हमास के बर्बर हमले में तबाह हो गई थी।’ उन्होंने यह कहकर चौंका दिया कि ‘भारत इस समय और भविष्य में भी पूरी दृढ़ता एवं विश्वास से इजरायल के साथ खड़ा है।’ मगर उन्होंने गाजा में फिलिस्तीनी बस्तियों के लगभग पूरी तरह नष्ट हो जाने की निंदा में एक शब्द भी नहीं कहा। हालांकि, यह सच है कि हमास के बिना उकसावे वाले हमले में 1,219 इजराइली नागरिक मारे गए, लेकिन यह भी हकीकत है कि इजराइल की कार्रवाई में गाजा में 70,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई।

इजरायल की संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण 25 फरवरी, 2026 को हुआ था। इसके बाद अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत कर दी। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अरब देशों में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। ट्रंप ने कहा कि युद्ध चार से पांच सप्ताह या उससे अधिक समय तक चल सकता है। इजरायल के प्रति उनके समर्थन ने भारत की उस संभावित भूमिका के रास्ते बंद कर दिए हैं, जिनके जरिए वह युद्ध समाप्त कराने या उसे अन्य अरब देशों तक फैलने से रोकने में मदद कर सकता था। अपनी नैतिक साख खोकर, भारत एक असहाय दर्शक बना हुआ है, जबकि युद्ध पूरे क्षेत्र यहां तक कि श्रीलंका के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्रों में फैल रहा है।

सत्ता परिवर्तन

इस युद्ध का मुख्य मुद्दा ‘सत्ता परिवर्तन’ है। किसी देश में शासन व्यवस्था कितनी भी खराब क्यों न हो, दूसरे देश को बलपूर्वक शासन बदलने का कोई अधिकार नहीं है। इस मानक के अनुसार, दुनिया भर में पचास से अधिक ऐसे देश हैं, जहां वर्तमान सरकार को बदलना आवश्यक है। मगर वास्तव में ऐसे कई तानाशाह अमेरिका के मित्र हैं और उस पर आश्रित हैं।

जून 2025 में अमेरिका ने इजरायल के उकसावे पर ‘मिडनाइट हैमर’ अभियान चलाया और बारह दिनों के बाद दावा किया कि ‘ईरान की प्रमुख परमाणु संवर्धन इकाइयों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है।’ यदि यह दावा सच था, तो ईरान ने परमाणु हथियार या संवर्धित यूरेनियम का भंडार कैसे जमा किया होगा, जो अमेरिका के लिए खतरा पैदा करता हो? इसके अलावा ओमान, जो ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा था, उसने स्पष्ट रूप से कहा था कि ईरान ने ‘संवर्धित यूरेनियम का कोई भंडार जमा न करने और कभी भी परमाणु बम न रखने’ पर सहमति जताई थी। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक प्रासंगिक सवाल पूछा, ‘ईरान में परमाणु हथियारों के सबूत कहां हैं?’ अमेरिका की ओर से अतीत में शुरू किए गए कुछ अन्य युद्धों की तरह ईरान के खिलाफ युद्ध भी एक असत्य पर आधारित है।

इजरायल और ईरान दोनों एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं। अमेरिका ने इराक और लीबिया से इजरायल को होने वाले खतरों को लगभग समाप्त कर दिया है। इजरायल ने सऊदी अरब के साथ कम से कम फिलहाल के लिए शांति समझौता कर लिया है। मध्य-पूर्व में एकमात्र और प्रमुख शक्ति बनने के इजरायल के रास्ते में केवल ईरान ही बाधा बना हुआ था। इजरायल ने अमेरिका को ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने और ईरान को एक अधीन राज्य बनाने के लिए उकसाया है। यह एक घृणित सिद्धांत है। कोई भी शासन कितना भी बुरा क्यों न हो, सत्ता परिवर्तन करना उस देश की जनता का एकमात्र अधिकार है।

अमेरिका और इजरायल दोनों ही अपनी सफलता के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर दावे कर रहे हैं। एक सम्मानित इजरायली संवाददाता एलन मिजराही का दृष्टिकोण इससे अलग है। उनका कहना है कि यह एक ऐसा युद्ध है, जिसमें सैनिक नहीं हैं। दोनों ओर से मशीनों से ही युद्ध लड़ा जा रहा है। जो मशीनें सबसे घातक हैं और जिनकी आपूर्ति असीमित है, वही जीतेंगी।

भारत की साख कमजोर हुई

मध्य-पूर्व में भारत के मानवीय, आर्थिक और राजनीतिक हित अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं, मगर इस क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और विनाश के बीच वह अलग-थलग पड़ गया है। ईरान ने जार्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं। यहां भारत के तेल, निर्यात और अन्य आर्थिक हित हैं। भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह में 37 करोड़ अमेरिकी डालर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इन हितों के बावजूद भारत की आवाज और प्रभाव न के बराबर है – और यह सब इजरायल के उद्देश्यों के प्रति भारत के सिद्धांतहीन समर्थन के कारण हुआ है।

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दुनिया इतनी बदल गई पिछले सप्ताह कि इस परिवर्तन को समझना मुश्किल है विशेषज्ञों के लिए भी। रही अपने घर की बात, तो हम भारतवासी अक्सर अंदरूनी समस्याओं में इतने उलझे रहते हैं कि कम ही बार नजरें उठा कर देखते हैं कि बाकी दुनिया में क्या हो रहा है। इस बार इतना बड़ा परिवर्तन हुआ है पश्चिमी एशिया में कि हम मजबूर हैं इसको गंभीरता से लेने के लिए। एक तो इसलिए कि जो हो रहा है, उसका सीधा असर हमारे शेयर बाजार पर दिखने लगा है अभी से और दूसरा इसलिए कि अगर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध के कारण तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो अपने देश में महंगाई आसमान छूने लगेगी। इसकी चिंता क्यों न हो? पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक