दो साल तक भारतीय टीम से बाहर रहने के बाद सात टी20 इंटरनेशनल मैचों में 53.28 के औसत और 215.6 के स्ट्राइक रेट से 373 रन। इशान किशन की वापसी के बाद के ये आंकड़े स्वाभाविक रूप से चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। क्या 2023 के बाद उन्हें बाहर रखना उस समय की रणनीतिक जरूरत थी या टीम मैनेजमेंट ने एक संभावित मैच-विजेता को जरूरत से ज्यादा लंबा इंतजार कराया?
जनवरी 2026 में वापसी के बाद से उनकी निरंतरता और आक्रामक बल्लेबाजी ने इस बहस को फिर से प्रासंगिक बना दिया है। अब चर्चा सिर्फ उनके प्रदर्शन की नहीं, बल्कि चयन में निरंतरता और जवाबदेही की भी हो रही है। नवंबर 2023 की उस सीरीज पर नजर डालें तो तस्वीर एकतरफा नहीं दिखती। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी टी20 में वह खाता नहीं खोल पाए, लेकिन उससे पहले दो मुकाबलों में अर्धशतक जड़ चुके थे।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या एक असफल पारी निर्णायक साबित हुई या टीम मैनेजमेंट उस समय किसी अलग संयोजन और दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहा था? भारतीय टीम में प्रतिस्पर्धा हमेशा कड़ी रही है, जहां हर स्थान के लिए कई दावेदार होते हैं। हर सीजन नए चेहरे उभरते हैं, टीम कॉम्बिनेशन बदलता है, कप्तान की सोच बदलती है और भविष्य की योजनाएं भी। हालांकि, इस जटिल ढांचे के बीच एक मूलभूत सवाल हमेशा कायम रहता है, क्या हर खिलाड़ी को समान मौके और निरंतरता मिलती है? इशान किशन का मामला इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
2023: प्रदर्शन था, भरोसा नहीं?
28 नवंबर 2023, गुवाहाटी: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 मुकाबला। इशान खाता नहीं खोल पाए। स्कोरकार्ड में ‘0’ दर्ज हुआ। यही उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच साबित हुआ।
लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। उसी सीरीज के पहले दो मुकाबलों में उन्होंने अर्धशतक लगाए थे। यानी फॉर्म पूरी तरह से गायब नहीं थी। एक खराब पारी के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और फिर लगभग दो साल तक वापसी का रास्ता बंद रहा।
यहां सवाल प्रदर्शन का कम और भरोसे का ज्यादा है। क्या चयनकर्ताओं ने उस समय यह मान लिया था कि इशान टीम की दीर्घकालिक योजना में फिट नहीं बैठते? या फिर टीम मैनेजमेंट किसी अलग टेम्पलेट पर काम कर रहा था, जिसमें पावरप्ले आक्रामकता से ज्यादा स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही थी?
2024-2025: नहीं मिले मौके
दो साल का अंतरराष्ट्रीय ब्रेक किसी भी खिलाड़ी के करियर में बड़ा होता है। इस दौरान नए बल्लेबाज उभरे, टीम में संयोजन बदले, कप्तानी में भी बदलाव आया। टी20 प्रारूप में जहां लय और आत्मविश्वास सबसे अहम होते हैं, वहां निरंतर मौके न मिलना खिलाड़ी की मानसिकता पर असर डाल सकता है। हालांकि, घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट में इशान किशन ने खुद को चर्चा में बनाए रखा। यह संकेत था कि उनकी क्षमता पर संदेह नहीं, बल्कि चयन का समीकरण अलग था।
2026: वापसी और आंकड़ों की ताकत
इशान किशन ने 21 जनवरी 2026 को न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज के पहले मैच से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की। इससे पहले उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच 28 नवंबर 2023 को खेला था, जो गुवाहाटी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल मुकाबला था।
उस मैच में इशान किशन अपना खाता नहीं खोल पाए थे। हालांकि, उससे पहले सीरीज के दोनों टी20 मैच में उन्होंने अर्धशतक लगाए थे, इसके बावजूद उन्हें ड्रॉप कर दिया गया था और करीब दो साल तक उन्हें टीम में जगह नहीं दी गई।
अब जनवरी 2026 में वापसी के बाद से इशान किशन ने 15 फरवरी 2026 तक सात टी20 इंटरनेशनल मैच खेले, जिसमें 53.28 के औसत और 215.6 के स्ट्राइक रेट से 373 रन बनाए। टी20 क्रिकेट में 200 से ऊपर का स्ट्राइक रेट सिर्फ आक्रामकता नहीं, मैच पर नियंत्रण का संकेत है।
यह बताता है कि बल्लेबाज सिर्फ टिक नहीं रहा, बल्कि खेल की दिशा तय कर रहा है। इशान ने पावरप्ले में जोखिम उठाया, गेंदबाजों को लंबाई बदलने पर मजबूर किया और मध्यक्रम को खुलकर खेलने का मंच दिया। यह भूमिका आधुनिक टी20 में अत्यंत मूल्यवान है।
चयन की दुविधा: निरंतरता बनाम प्रयोग
भारतीय टीम में प्रतिस्पर्धा असाधारण है। हर स्थान के लिए कई दावेदार हैं। ऐसे में चयनकर्ताओं को भविष्य, फिटनेस, टीम संतुलन और रणनीतिक लचीलापन- सब पर एक साथ नजर रखनी पड़ती है।
संभव है कि 2023 के बाद टीम मैनेजमेंट किसी ऐसे सलामी संयोजन पर काम कर रहा हो जो अलग प्रकार का संतुलन देता हो। यह भी संभव है कि इशान को बैकअप विकल्प के रूप में देखा गया हो।
हालांकि, यहां एक व्यापक मुद्दा यह है कि क्या हर खिलाड़ी को ‘लंबे समय से मौके’ मिलते हैं? इतिहास गवाह है कि कुछ नाम लगातार औसत प्रदर्शन के बावजूद मौके पाते रहते हैं, जबकि कुछ को छोटी चूक महंगी पड़ जाती है। यह असंतुलन ही बहस की जड़ है।
क्या 2023 का फैसला गलत था?
इस प्रश्न का सीधा उत्तर देना आसान नहीं। चयन हमेशा उस समय की जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों पर आधारित होता है। साल 2023 में टीम शायद अलग संतुलन चाहती थी। हालांकि, 2026 के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इशान किशन जैसे प्रोफाइल का बल्लेबाज टी20 रणनीति में निर्णायक साबित हो सकता है। अगर वही आक्रामकता 2024 या 2025 में टीम के पास होती, तो क्या कुछ करीबी मुकाबलों का परिणाम अलग हो सकता था? यह एक काल्पनिक सवाल है, लेकिन तर्कसंगत है।
मानसिकता और संदेश
खिलाड़ियों के लिए चयन सिर्फ अवसर नहीं, संदेश भी होता है। जब किसी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता है तो यह संकेत जाता है कि उसकी भूमिका स्पष्ट नहीं है। इशान किशन की वापसी और उसके बाद का प्रदर्शन ‘प्रमाण’ है कि प्रतिभा को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
हालांकि, यह भी सच है कि हर खिलाड़ी वापसी पर इतनी मजबूती से नहीं लौट पाता, इसलिए यह मामला सिर्फ एक बल्लेबाज का नहीं, बल्कि चयन प्रणाली के दृष्टिकोण का भी है। क्या टीम मैनेजमेंट युवा खिलाड़ियों को असफलता के बाद दोबारा उठने का पर्याप्त समय देता है?
सोशल मीडिया बनाम चयन कक्ष
सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में प्रशंसक इसे अन्याय मान रहे हैं। उनके अनुसार, जिस खिलाड़ी ने वापसी के बाद इतनी विस्फोटक बल्लेबाजी की, उसे दो साल तक बाहर रखना गलत था। हालांकि, चयन कक्ष में फैसले भावनाओं से नहीं, योजनाओं से होते हैं।
वहां आंकड़ों के साथ-साथ फिटनेस रिपोर्ट, ड्रेसिंग रूम समीकरण, आगामी टूर्नामेंट की रणनीति के साथ-साथ व्यवहार भी मायने रखता है। फिर भी पारदर्शिता की कमी हमेशा संदेह को जन्म देता है। जब चयन के कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं होते, तो अटकलें स्वाभाविक हैं।
आगे का रास्ता
खिलाड़ियों और चयनकर्ताओं की अब असली परीक्षा निरंतरता की है। क्या इशान किशन को लगातार मौके मिलेंगे? क्या टीम उन्हें स्पष्ट भूमिका देगी, ताकि वह बिना असमंजस के खेल सकें? टी20 क्रिकेट में आक्रामक सलामी बल्लेबाज मैच की धुरी बन सकता है। अगर इशान किशन इसी लय को बरकरार रखते हैं, तो उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल होगा।
निष्कर्ष
इशान किशन का मामला ‘सही या गलत’ का सरल समीकरण नहीं है। साल 2023 का फैसला उस समय की रणनीति का हिस्सा रहा होगा, लेकिन 2026 का प्रदर्शन यह साबित करता है कि प्रतिभा को समय पर अवसर मिलना कितना महत्वपूर्ण है।
यह कहानी भारतीय क्रिकेट में चयन की संवेदनशीलता, प्रतिस्पर्धा की तीव्रता और धैर्य की आवश्यकता तीनों को सामने लाती है। अंततः सवाल यही है: क्या दो साल का इंतजार आवश्यक था या यह वह अवधि थी जिसमें भारतीय टीम एक संभावित मैच-विजेता की सेवाओं से वंचित रही? जवाब समय देगा, लेकिन बहस अभी खत्म नहीं हुई है।
