नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद आम लोगों को उम्मीद थी कि देश के विकास को नई दिशा मिलेगी, जनकल्याण की नीतियां एवं योजनाएं आकार लेंगी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। मगर अब देश के शासन और सियासत में ही नई चुनौतियां पैदा हो गई हैं। नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब हवाला व्यवसायी दीपक भट्ट के साथ उनके कथित व्यावसायिक संबंधों को लेकर जांच चल रही है और पार्टी के अंदर तनातनी थीं।

गुरुंग का इस्तीफा नहीं होता, तो अंत:पुर का झगड़ा खुल कर बाहर आ जाता। उनका कहना है कि उनसे जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने पद से इस्तीफा दिया है, ताकि कोई ये न कह सके कि पद पर रहते वे जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।

गृहमंत्री के इस्तीफे के बाद नेपाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुंग ने कहा, ‘हाल के दिनों में सार्वजनिक स्तर पर उनके निवेश, जिसमें शेयरों में निवेश भी शामिल है, उसे लेकर उठाए गए सवालों को मैंने गंभीरता से लिया है, नैतिकता पद से बड़ी होती है। देश में चल रहा युवाओं का आंदोलन सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, उसने भी यही संदेश दिया है कि सार्वजनिक जीवन साफ-सुथरा होना चाहिए और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए। अगर कोई मेरे भाइयों और बहनों के बलिदान से बनी सरकार पर सवाल उठाता है, तो उसका जवाब नैतिकता है।’

गुरुंग ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा, ‘बहुत सारी अफवाहें’ फैल रही हैं। तथ्यों को अटकलों से अलग करने की जरूरत है। आरोप और सच्चाई एक ही चीज नहीं हैं। फैसले सबूतों पर आधारित होने चाहिए, भावनाओं पर नहीं। मैं पार्टी द्वारा लिए गए हर फैसले का पूरी तरह पालन करूंगा और जांच में सहयोग करूंगा। अब सवाल यह है कि क्या पार्टी आलाकमान ने उन्हें इस्तीफा देने को कहा था?

गौरतलब है कि बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार में किसी मंत्री का यह दूसरा इस्तीफा है। प्रधानमंत्री ने नौ अप्रैल को श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीपक कुमार साह को पद से हटा दिया था। उनको पार्टी अध्यक्ष रवि लामिछाने के एक औपचारिक पत्र के बाद हटाया गया था। यह पत्र पार्टी के केंद्रीय अनुशासन आयोग की जांच रपट पर आधारित था, जिसमें कहा गया था कि साह ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी को स्वास्थ्य बीमा बोर्ड के सदस्य के तौर पर बनाए रखा। यह पद काफी समय से लगभग निष्क्रिय पड़ा था। दीपक कुमार साह संसद सदस्य बनने से पहले मेडिकल दाखिले में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में अपनी कंपनी के सहयोगी के साथ गिरफ्तार किए गए थे। उनका मामला नेपाल की एक उच्च अदालत में लंबित था। प्रधानमंत्री ऐसे शख्स को मंत्री बनाने की वजह से भी आलोचना के घेरे में थे।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी पारदर्शिता और साफ-सुथरी राजनीति का पैगाम देकर सत्ता में आई थी और उसके लिए अब जनता की उम्मीदों की कसौटी पर खरा उतरने की चुनौती है। बालेंद्र शाह ने पहले श्रम मंत्री दीपक साह को सत्ता दुरुपयोग के आरोप में मंत्रिमंडल से बाहर किया। साह चुनाव से पहले मेडिकल में दाखिले में पैसे उगाही के मामले में जेल जा चुके थे। मगर इस बार देश के गृहमंत्री सुदन गुरुंग शक के घेरे में थे। गुरुंग ने जहां निवेश किया था, उसके तार कुख्यात हवाला कारोबारी दीपक भट्ट के साथ जुड़े बताए जा रहे हैं।

दीपक भट्ट को इसी महीने एक अप्रैल को नेपाल पुलिस के ‘सेंट्रल इनवेस्टिगेशन ब्यूरो’ ने हिरासत में लिया था। धन शोधन जांच विभाग के अधिकारी बता रहे हैं कि युवाओं के आंदोलन के बाद खरीदे गए ये शेयर, गुरुंग के संपत्ति घोषणापत्र में दर्ज नहीं किए गए थे। संपत्ति शुद्धिकरण अनुसंधान विभाग ने व्यवसायी दीपक भट्ट और सुलभ अग्रवाल के कार्यालय पर छापा मारा, जहां गृहमंत्री गुरुंग द्वारा किए गए निवेश के कुछ कागजात मिले हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में एक खेमे का कहना है कि जब गृहमंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आए हैं, तो हम चुप नहीं रह सकते।

विवादों से घिरा रहा गृहमंत्री का संक्षिप्त कार्यकाल

गृहमंत्री सुदन गुरुंग का संक्षिप्त कार्यकाल विवादों से घिरा रहा है। पार्टी के सांसदों ने शिकायत की है कि निरीक्षणों के दौरान वे चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ तालमेल बनाने में नाकाम रहे और दूसरे मंत्रालयों के मामलों में दखल दिया। आरोप है कि बीते 26 मार्च को पद संभालने के तुरंत बाद गुरुंग ने पुलिस प्रमुख दान बहादुर कार्की को निर्देश दिया कि वे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार करें। मगर जब गुरुंग ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और पार्टी जो भी फैसला लेगी, उसका पालन करेंगे, तभी से लोग मान कर चल रहे थे कि उनके सितारे गर्दिश में हैं। अगर देश भर में बुलडोजर की कार्रवाई नहीं होती, तो नेपाली मीडिया में यह मामला सुर्खियों में होता।

दरअसल, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में दिक्कत शीर्ष स्तर पर है। नेपाल के पूर्व पत्रकार और उप प्रधानमंत्री पद पर रह चुके राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख रबी लामिछाने पर मुख्य रूप से गोरखा मीडिया नेटवर्क के प्रबंध निदेशक के रूप में दस करोड़ नब्बे लाख रुपए से अधिक की अवैध हेराफेरी करने और पोखरा, चितवन, रूपन्देही, काठमांडो की कई सहकारी समितियों से करोड़ों रुपए के अवैध हस्तांतरण का आरोप है, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। इससे पहले, वर्ष 2023 में नेपाल की सर्वोच्च अदालत ने रबी लामिछाने को अमेरिकी नागरिकता छोड़ने के बाद नेपाली नागरिकता फिर से प्राप्त करने की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करने के कारण उन्हें उपप्रधानमंत्री के पद से बर्खास्त कर दिया था।

राजनीति के जानकारों का कहना है कि रबी लामिछाने पर यदि इतने सारे गंभीर आरोप नहीं होते, तो निश्चित रूप से नेपाल के प्रधानमंत्री वही बनते। मगर नई सरकार के लिए सबसे बड़ी दुविधा यही है कि अपने पार्टी आलाकमान को आरोपमुक्त कैसे बनाए? आरोप एक नहीं, अनेक हैं। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के मंत्रिमंडल में भी जो दागी थे, वे पद से हटते ही बागी हो गए। अभी गृहमंत्री सुदन गुरुंग को हटाने के वास्ते पार्टी के भीतर माहौल बनाने वाले लोगों में कुछ दिन पहले मंत्री पद से हटाए गए दीपक शाह भी बताए गए हैं।

इस समय सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में घमासान मचा हुआ है। अभी से कई गुट बालेंद्र शाह पर दबाव बनाए हुए हैं। ‘जेन जी रेड फोर्स’ ने नैतिक आधार पर गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की थी। मौजूदा परिस्थिति में नई सरकार की साख पर जनता का विश्वास कम होने का खतरा पैदा हो गया है। ‘जेन जी रेड फोर्स’ नेपाल में माओवादी सेंटर से जुड़ी युवा शाखा है, जिसका गठन वर्ष 2025 में स्मृति तिमिल्सिना की अगुआई में किया गया था। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह का भारत के दौरे पर आने का कार्यक्रम था, लेकिन लगता नहीं कि इस ज्वलंत मुद्दे को छोड़ कर वे दिल्ली आएंगे।

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नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरुङ ने पदभार संभालने के महज 26 दिन बाद ही गृह मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्ट के साथ अपने व्यापारिक हिस्सेदारी को लेकर उठे विवाद के बाद इस्तीफा दिया। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए एक फेसबुक पोस्ट में गुरुङ ने कहा कि उन्होंने सार्वजनिक आलोचना को गंभीरता से लिया और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए पद छोड़ने का विकल्प चुना। उन्होंने कहा, “मैं सुदन गुरुङ चैत्र 13, 2082 (26 मार्च, 2026) से गृह मंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन कर रहा हूं। हाल ही में, मैंने अपने शेयरों और संबंधित मामलों के बारे में नागरिकों द्वारा उठाए गए सवालों, टिप्पणियों और सार्वजनिक चिंताओं को बहुत गंभीरता से लिया है।” पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक