केंद्रीय परीक्षा नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद यह पीड़ादायक है कि देश के किसी न किसी हिस्से से अब भी बच्चों के जीवन से हारने की खबरें आनी जारी हैं। हमारे देश में प्रतियोगी परीक्षाएं जीवन संवारने की एक उम्मीद होती हैं। आशाओं का एक ऐसा द्वार, जिसे पार कर अच्छा भविष्य बनाने के लिए हर वर्ष लाखों बच्चे और उनके स्वजन तपस्या की तरह तैयारी में जुट जाते हैं।
यही वजह है कि इन इम्तिहानों का निरस्त होना सीधे-सीधे उनके सपनों पर कुठाराघात होता है। इन घटनाओं के कारण वर्षों की श्रमशील दिनचर्या व्यवस्था की लचरता की भेंट चढ़ जाती है, जिसके चलते बच्चे भावी जीवन से जुड़ी अनिश्चितता, मानसिक अवसाद और सपनों के बिखरने की पीड़ा से जूझते हैं।
कुछ समय पहले नीट परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक की चर्चा के बीच रद्द किया गया। अब इसकी जांच सीबीआई कर रही है। तकलीफदेह है कि प्रश्नपत्र लीक होने के अधिकतर मामले जांच-पड़ताल तक ही सिमट कर रह जाते हैं। जबकि ऐसी घटनाएं पहले से ही गलाकाट प्रतियोगिता के दौर में भविष्य बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहे बच्चों के श्रम और उनकी प्रतिबद्धता पर पानी फेर देती हैं।
इस बार भी एनटीए के इस फैसले के बाद करीब बाईस लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। कई बच्चों की आत्महत्या की खबरों के बीच बहुत से बच्चों द्वारा आक्रोश जताने वाले विरोध प्रदर्शन भी हुए। अभिभावकों ने भी बच्चों की पढ़ाई से जुड़े संघर्ष और हालात का हवाला दिया। स्पष्ट है कि पूरे समाज को निराशा और अविश्वास की ओर धकेलने वाले ऐसे वाकये चिंतनीय हैं और हमारी अकादमिक व्यवस्था से भरोसा कम करने वाले हैं।
असल में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं को केवल अभ्यर्थियों की समस्या के तौर पर नहीं देखा जा सकता। व्यवस्थागत मोर्चे पर बड़ी खामी को उजागर करने वाली ये घटनाएं अभ्यर्थी के पूरे परिवार को आघात पहुंचाती हैं। देश के आम परिवार के लिए ये मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक मोर्चे पर पीड़ादायी होती हैं। निराश होकर बच्चों के जीवन से मुंह मोड़ लेने वाले मामलों की तो कोई क्षतिपूर्ति ही नहीं हो सकती। दुखद है कि नीट परीक्षा निरस्त होने के बाद ऐसे कई दुर्भाग्यपूर्ण मामले भी सामने आए।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले में नीट की तैयारी कर रहे बाईस वर्षीय छात्र ने परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक विवाद से आहत होकर अपनी जान दे दी। अभ्यर्थी के पिता के मुताबिक, बहुत अच्छा पेपर होने और अच्छे अंक आने की उम्मीद को लगी ठेस के चलते उसने ऐसा कदम उठाया। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में जीवन से हार मान लेने वाले इक्कीस वर्षीय छात्र के परिवार का कहना है कि वह अपने तीसरे प्रयास में डॉक्टर बनने को लेकर पूरी तरह आश्वस्त था, लेकिन परीक्षा खारिज होने के समाचार ने उसका मनोबल तोड़ दिया। दिल्ली के आजादपुर में आत्महत्या करने वाली बीस वर्षीय छात्रा के परिजनों ने बताया कि परीक्षा रद्द होने के बाद वह मानसिक अवसाद में चली गई थी।
कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के कई बच्चे भारी मुश्किलों में करते हैं तैयारी
समझना कठिन नहीं है कि यह संसाधनों का ही नहीं, अनमोल मानवीय जीवन का भी नुकसान है। कितने ही बच्चों और उनके स्वजनों के सपने अनिश्चितता के घेरे में आ जाते हैं। नीट यूजी-2026 निरस्त होने से देशभर में अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। यह स्थिति लाखों युवाओं और उनके परिवारों के संघर्षों पर आघात करने वाली है। कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले कई बच्चे अनगिनत मुश्किलों से जूझकर ऐसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
अधिकतर प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की शुल्क राशि आम परिवारों के लिए बड़ा बोझ होती है। दूरदराज के इलाकों से आने वाले गरीब घरों में तो अभिभावकों को बच्चों के घर से दूर रहने और कोचिंग के खर्च के लिए कर्ज तक लेना पड़ जाता है। मध्यवर्गीय परिवार हर मोर्चे पर जूझकर अपने बच्चों के सपनों को साकार करने का अवसर देते हैं। कम से कम संसाधनों में तैयारी करने वाले बहुत से बच्चों के पास सही समय पर पौष्टिक भोजन लेने और पर्याप्त आराम करने की व्यवस्था भी नहीं होती। कितने ही बच्चे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य समस्याओं के दुश्चक्र में फंस जाते हैं। इसी वजह से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान भी बच्चों की आत्महत्या के मामले सामने आते रहते हैं।
इसके अलावा, पेपर लीक के कारण फिर से परीक्षा होने की स्थिति में अभ्यर्थियों को दोबारा तैयारी के लिए मानसिक दबाव से गुजरना पड़ता है। परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई के लिए कई परिवारों में गहने और जमीन तक बिक जाती है। गांवों-कस्बों से बार-बार परीक्षा देने आने के लिए भी खर्च करना पड़ता है।
यही वजह है कि इन वाकयों के कारण मेहनत के बल पर अपने सपने पूरे करने का मार्ग चुनने वाले योग्य उम्मीदवार और उनके अपने ठगा-सा महसूस करते हैं। इस स्थिति में किसी एक परिवार में ही नहीं, पूरे समाज में निराशा फैलती है। ऐसे में परीक्षा लेने के तरीके में बदलाव और व्यवस्थागत सख्ती जरूरी है।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में प्रश्नपत्र लीक को लेकर सख्त कानून होने के बावजूद परीक्षाओं की निष्पक्षता, गोपनीयता और पारदर्शिता सवालों के घेरे में है। बच्चों को हताशा ही नहीं, जान देने वाले हालात तक ले जाने वाली घटनाएं रुक नहीं पा रही हैं। जबकि प्रश्नपत्र लीक, नकल गिरोह और परीक्षाओं में धांधली पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2024 में कठोर कानून भी बनाया गया था। ‘सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम अधिनियम’ में दोषियों के लिए दस वर्ष तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
ऐसे में सरकार और एनटीए को ऐसे प्रयास करने होंगे कि इन कानूनों का असर भी दिखाई दे। अभ्यर्थियों को मायूसी की ओर धकेलने वालों पर त्वरित कार्रवाई हो। पारदर्शी जांच और दोषियों को सख्त सजा सुनिश्चित किए बिना विद्यार्थियों का विश्वास नहीं जीता जा सकता।
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पेपर लीक को लेकर विवाद दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। पहले कॉकरोच पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने की योजना बनाई और अब आप के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से सड़कों पर उतरकर सरकार विरोध करने की अपील की है। आप संयोजक ने एक एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली व्यक्तियों की मिलीभगत से एक बड़ा रैकेट बन गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
