तापमान बढ़ा, विपक्ष का पारा चढ़ा- शिक्षा मंत्री को हटाओ… शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें… ‘नीट’ में गड़बड़ी… लीक में प्रोफेसर शामिल..! फिर एक खबर- ‘सीएनजी के दाम तीन रुपए बढ़े।’ और विपक्ष का विरोध शुरू- ये वसूली है… किश्तों में वसूली! लेकिन मॉडल और अभिनेत्री त्विषा की हत्या/आत्महत्या की सनसनीखेज कहानी चलती रही। चैनल दर चैनल त्विषा के पिता रोते रहे कि हमारी कोई सुनने वाला नहीं… चार दिन से धरने पर, लेकिन कोई सुनता नहीं… ये ताकतवर लोग हैं… सब मिले हुए हैं… हमारी मांग है कि दूसरा पोस्टमार्टम हो… पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कमियां… मृतका त्विषा के गले पर खून के निशान… शरीर पर चोट… मुकदमा दिल्ली स्थानांतरित हो… हमें न्याय मिले!
त्विषा का पति समर अग्रिम जमानत पर और अग्रिम जमानत पर सास का मीडिया पर त्विषा के खिलाफ एक प्रकार का ‘मीडिया ट्रायल’ जारी कि त्विषा नशा करती थी… वह मनोरोगी थी… कि उसने गर्भपात कराया..! त्विषा की बहन रो-रोकर न्याय की मांग करती रही, लेकिन कुछ हासिल नहीं। फिर एक दिन खबर कि हाईकोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम की अपील नहीं मानी। एक चैनल ने मुकदमे को गोद लिया और अपने शो में पिता को बिठाकर आश्वस्त किया कि आप हमें एक अपील दें, हम सुप्रीम कोर्ट को कल सुबह देंगे और हम चाहेंगे कि गिरिबाला की अग्रिम जमानत निरस्त हो… कोशिश करेंगे कि मुकदमा सुप्रीम कोर्ट देखे। हमारे दर्शक और हमारा चैनल आपको न्याय दिलवाकर रहेगा..!
वकील पर वकील बहस कर चुके। वकीलों के भी दो धड़े बन गए। एक कहता कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया में कमियां… फिर भी रिपोर्ट के खुलासे कि गर्दन पर खून के निशान… कई जगह चोट कि जिस बेल्ट से लटकी, वह जमा नहीं की गई। दूसरा पोस्टमार्टम जल्दी हो, वरना शव के खराब होने का खतरा। दूसरा पक्ष कहता कि समर और गिरिबाला का मीडिया ट्रायल किया जा रहा है..! चैनलों ने मुद्दे को तूल तो दिया है, लेकिन मीडिया में हर मुद्दा एक हद के बाद अपनी मौत मर जाता है। क्या इसके साथ भी यही होने वाला है? आगे-आगे देखिए होता है क्या!
सत्ता ग्रहण के पहले दो सप्ताह में ही बंगाल के भाजपा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कुछ ताबड़तोड़ फैसले बंगाल को सुर्खियों में रखे हुए हैं। ‘चिकेन नेक’ की जमीन को बीएसएफ को देना, बांग्लादेश की सीमा पर बाड़ लगाने के लिए बीएसएफ को जमीन देना… गोकशी पर प्रतिबंध, मंदिर-मस्जिदों आदि से लाउडस्पीकर के शोर की सीमा तय… स्कूलों-मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ का गान अनिवार्य। कई विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं कि अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का दमन किया जा रहा है।
इस बीच तमिलनाडु से एक बार फिर सनातन के प्रति नफरत की बरसात हुई। एक ने ‘सनातन को नष्ट करने’ की पुरानी बात दोहराकर खबर बनाई, तो दूसरे नेता ने इसे दोहरा कर नफरत को आगे बढ़ाया। फिर एक दिन तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में आरोपी ‘एलटीटीई’ के चीफ दिवंगत प्रभाकरण की याद में एक्स पर पोस्ट लिखा, तो भाजपा ने कटाक्ष किया कि इस पर कांग्रेस चुप क्यों… क्या सत्ता के लिए कोई कुछ भी सहेगा..! लेकिन जैसी मजेदार खबरें जॉर्जिया मेलोनी से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात ने बनाई, वैसी उनकी नॉर्वे या स्वीडन या अरब यात्रा ने न बनाई! प्रधानमंत्री ने मेलोनी को दी ‘मेलोडी’ चॉकलेट और चैनलों ने इसे ऐसा उठाया कि वीडियो सुर्खियों में आ गया। एक से एक टिप्पणियां आती दिखीं।
इससे पहले नॉर्वे में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक संवाददाता सम्मेलन से जाने लगे, तो अचानक एक पत्रकार हेली ने भारत में मीडिया की स्वतंत्रता पर कुछ कहा, तो प्रधानमंत्री उसे अनसुना करते निकल गए। यहां के कुछ विपक्षी नेताओं ने इसे मुद्दा बना लिया और कहने लगे कि देखा, प्रधानमंत्री डर गए और भाग गए… प्रधानमंत्री ने आज तक कोई संवाददाता सम्मेलन नहीं किया। एक सत्ता प्रवक्ता कहिन कि यह चीन प्रेरित था… एक एंकर कहिन कि यहां तो लोग कुछ भी बोलते रहते हैं, लेकिन क्या किसी को बोलने से रोका गया! एक और एंकर कहिन कि विदेश में हमारी बेइज्जती हो, तो हमारे यहां कुछ लोग परम सुखी..।
इसके बाद फिर बरसे कुछ ‘आत्मीय सुभाषित’ कि ये कहीं भी चला जाता है… देखना दो-तीन महीने में पता लग जाएगा… बवंडर… वो कहेगा मेरी गलती नहीं… बता रहा हूं कि ये एक महीने के अंदर रोएगा… संविधान में सबका खून है… हमें बचाता है..! यह तो सर जी ‘दाग’ वाली बात हो गई कि ‘रंज की जब गुफ्तगू होने लगी… आप से तुम, तुम से तू होने लगी../ नाउम्मीदी बढ़ गई है इस कदर, आरजू की आरजू होने लगी!’
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देश में जब भी किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है, तो जांच के आदेश के बाद ‘मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी’ और ‘दोबारा परीक्षा की तारीख’ जैसी बातों के शोर-शराबे के पीछे एक ऐसा कड़वा सच छिप जाता है। नीट परीक्षा के इस अंतहीन तमाशे और बार-बार होने वाले प्रश्नपत्र लीक ने भारत में एक नए किस्म के पलायन को जन्म दे दिया है। अब तक देश का युवा डॉक्टर बनने के बाद विदेश जाता था, लेकिन अब इस परीक्षा तंत्र से तंग आकर देश के मेधावी विद्यार्थी बारहवीं पास करते ही भारत छोड़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
