सोशल मीडिया आज हमारी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। खबरों और सूचनाओं से लेकर मनोरंजन, शिक्षा और लोगों से जुड़ने तक, इसके बहुत से फायदे हैं। लेकिन इसके बढ़ते इस्तेमाल के साथ कई नई चुनौतियां भी सामने आई हैं।
सोशल मीडिया सूचनाओं को हम तक पहुंचाना आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ फेक न्यूज, साइबर अपराध, मानसिक तनाव, निजता और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी बढ़ी हैं। ऐसे में सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना और इससे जुड़ी चुनौतियों को समझना बेहद जरूरी हो गया है।
सोशल मीडिया के इस दौर में लोग कई बार खबरों की सच्चाई जानने की मेहनत भी नहीं करते, उसके बजाय वायरल हो रही पोस्टों पर जल्दी विश्वास कर लेते हैं। किसी पोस्ट, वीडियो या मैसेज को बिना जांच करें उसकी बिना पुष्टि करे आगे शेयर भी कर देते है और इससे गलत जानकारी और अफवाहें तेजी से फैलती हैं। कई बार लोग इसे असली समाचार से मिलाकर देखने की भी जहमत नहीं उठाते, जिससे लोगों के बीच भ्रम पैदा होता है।
बच्चों की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती
सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा भी एक गंभीर चुनौती बन गई है। कम उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले बच्चे अनजान या अजनबी लोगों के संपर्क में आ सकते हैं या अनुचित सामग्री के संपर्क में आ सकते हैं। इसलिए बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर निगरानी और जागरूकता बताने चाहिए। इसी वजह से कई देशों में बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए नियम भी बनाए गए हैं।
आज बहुत से लोग घंटों फोन और सोशल मीडिया स्क्रीन से जुड़े रहते हैं। धीरे-धीरे ये फोन की आदत लत में बदल सकता है। इसके कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित होती है और पढ़ाई, काम, नींद और दूसरी जरूरी गतिविधियों के लिए समय कम पड़ने लगता है और कई बार शरीर में बीमारियां भी घर बना लेती हैं।
सोशल मीडिया अब दिखावे की दुनिया हो गई है। लोग अपनी जिंदगी के अच्छे पल ही दूसरों के सामने रखते हैं। ऐसे में दूसरे लोगों की जिंदगी देखकर व्यक्ति खुद की तुलना उनसे करने लगता है, खुद को कम आंकने लगते है, बेहतर दिखने और दूसरों से आगे निकलने की वजह से वो तनाव और हीन भावना के शिकार हो जाते है।
ठगी का आसान जरिया बना सोशल मीडिया
सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल में बड़े-बुजुर्गों को भी कई बार परेशानी का सामना करना पड़ता है। तकनीक और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़ी पूरी जानकारी न होने के कारण वे फर्जी लिंक, संदेश, कॉल या ऑनलाइन ठगी में फंस सकते हैं। इसलिए इस वर्ग को साइबर फ्रॉड और डिजिटल सुरक्षा के तरीकों के बारे में बताना जरूरी है।
प्राइवेसी (निजता) का खतरा भी सोशल मीडिया की बड़ी चुनौतियों में शामिल है। आज लोग अपनी निजी तस्वीरें, लोकेशन, यात्रा, परिवार और दूसरी पर्सनल जानकारियां तुरंत से साझा कर देते हैं। अगर यह जानकारी गलत हाथों में पहुंच जाए तो इसका गलत इस्तेमाल हो सकता है। इससे व्यक्ति की निजता के साथ-साथ उसकी व्यक्तिगत और डिजिटल सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है।
सोशल मीडिया पर गाली-गलौज, ट्रोलिंग, धमकी और ऑनलाइन उत्पीड़न यानी साइबर बुलिंग की घटनाएं भी बढ़ती ही जा रही हैं।
पारिवारिक रिश्तों पर भी देखने को मिल रहा असर
सोशल मीडिया का असर पारिवारिक रिश्तों पर भी देखने को मिल रहा है। पहले परिवार के लोग साथ बैठकर खाना खाते, बातचीत करते और अपना समय एक-दूसरे के साथ बिताते थे। अब कई बार एक ही घर में रहने वाले लोग भी अपने-अपने फोन में व्यस्त रहते हैं। मोबाइल और सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने के कारण आमने-सामने बातचीत कम हो जाती है।
AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक वीडियो, तस्वीरें और नकली आवाजें बनाना भी बहुत आसान हो गया है। किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो में बदलाव करके गलत और झूठ कंटेंट तैयार किया जा सकता है जो देखने में असली लगे।
ऐसे कंटेंट का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने के लिए हो सकता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर किसी भी तस्वीर या वीडियो पर तुरंत विश्वास या कुछ शेयर करने के बजाय उसकी पुष्टि करना जरूरी है और।
तेजी से वायरल होती हैं भड़काऊ चीजें
सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाली भाषा और भड़काऊ चीजें भी तेजी से फैलती है। कई बार किसी समूह या व्यक्ति के खिलाफ उल्टी सीधी बातें सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं। इससे लोगों के बीच तनाव और विवाद बढ़ने का खतरा रहता है।
फेक न्यूज, साइबर अपराध, और नफरत फैलाने वाली पोस्ट पर रोक लगाना सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। सरकार को लोगों की सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठाने होते हैं, लेकिन इसके साथ यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि लोगों की स्वतंत्रता प्रभावित न हो। सुरक्षा और स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाना सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती है।
इन सभी चुनौतियों के बीच सबसे जरूरी है कि सोशल मीडिया और वास्तविक जीवन के बीच संतुलन बनाया जाए। परिवार, दोस्त, समाज, पढ़ाई और काम के साथ सोशल मीडिया के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल हमारी जिंदगी का एक बस छोटा सा ही हिस्सा होना चाहिए।
(यह लेख कल्याणी चौधरी ने लिखा है। वह जनसत्ता के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं। यह उनके निजी विचार हैं। जनसत्ता का उनसे सहमत होना जरूरी नहीं है।)
