मेरा रिश्ता संघ परिवार से पुराना है। उन दिनों से है जब मैं एक रिपोर्टर थी दिल्ली के एक अंग्रेजी अखबार में और इंदिरा गांधी ने पत्रकारों को चुप कराने के लिए ऐसी पाबंदियां लगाई थीं कि अखबार के ‘रिपोर्टर्स रूम’ में हम तकरीबन बेकार बैठे रहते थे दिन भर। इस दौरान हरियाणा से एक व्यक्ति आया करता था हमारे दफ्तर, शहर की राजनीतिक खबरें और अफवाहें हमें बताने। जिस दिन इंदिराजी ने विपक्ष के कई बड़े नेताओं को आधी रात गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था, उसकी अगली सुबह वह हमारे दफ्तर आया और मजाक करते हुए कहा कि धोबियों के पास खाकी निक्करों के ढेर लग गए थे, इसलिए कि संघी अपनी निक्करें वापस लेने से डर गए थे।

इस किस्से के बाद मेरी आरएसएस में रुचि बढ़ी। शाखाओं में जाने लगी, इस संस्था के बारे में जानकारी लेने। शाखाएं आपातकाल के दौरान कम हो गई थीं, लेकिन संघ परिवार के सदस्य एक-दूसरे के घरों में गप्पें मारा करते थे देश की, राजनीति की और मुसलमानों की। विभाजन को उन दिनों केवल बीस साल हुए थे और स्वाभाविक था कि मुसलमानों के लिए इनके दिलों में नफरत भरी हुई थी। उनकी बातों से पता लगा मुझे कि उनका सबसे बड़ा डर इसको लेकर था कि मुसलमानों के बच्चे ज्यादा होते हैं हिंदुओं से, इसलिए एक दिन भविष्य में एक और विभाजन हो सकता है।

सरसंघचालक मोहन भागवत की हाल में दी गई चेतावनी सुन कर मुझे वे दिन याद आए। भागवत साहब ने हिंदुओं को चेताया है कि जरूरत है अब कि जल्दी शादियां हों और कम से कम तीन बच्चे पैदा करने की कोशिश की जाए, ताकि देश की आबादी संतुलित रहे। ऐसा तो नहीं कहा उन्होंने कि मुसलमान ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं, लेकिन इशारा जरूर था उनका उस तरफ। यथार्थ यह है कि मुसलमानों की आबादी आज करीब पंद्रह फीसद है भारत में और 1947 में यह कोई दस फीसद थी। यानी मामूली-सा फर्क आया है पिछले 75 वर्षों में, तो इस तरह की चेतावनियां देकर संघ प्रमुख केवल हिंदुओं और मुसलमानों के बीच खाई बढ़ाने का काम कर रहे हैं जो देश के हित में बिल्कुल नहीं है। क्यों नहीं है बताती हूं।

अमृतसर से लेकर रूस की सीमाओं तक आप नजर डालेंगे, तो दिखेगा कि जितने भी देश दिखते हैं सब इस्लामी हैं। ऊपर से हम ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जब कट्टरपंथी इस्लाम का प्रभाव दुनिया में फैल चुका है इतना कि इसका खतरा विकसित पश्चिमी देशों में भी महसूस हो रहा है, तो सोचिए कि हमारा क्या होगा अगर हमारे मुसलमान भी इस जिहादी विचारधारा के शिकार बन जाते हैं। इंडोनेशिया के बाद दुनिया की सबसे बड़ी मुसलिम आबादी भारत में है विभाजन के बावजूद। फिर समस्या यह भी है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में जिहादी कट्टरपंथियों का बोलबाला है। ये दोनों देश लगातार कोशिश करते हैं भारत के मुसलमानों को हिंदुओं के खिलाफ भड़काने की।

इस प्रयास के कारण भारत के मुसलमान जिहादी सोच से प्रभावित होकर स्कूलों और कालेजों में मुसलिम लड़कियों को हिजाब पहन कर पढ़ाई करने देने की मांग करते रहे हैं। जिहादी आतंकवाद की घटनाओं में अब दूसरे आतंकवादी भी शामिल होने लगे हैं, लेकिन यह भी सच है कि जिहादी विचारधारा ने भारत में अभी तक वे सीमाएं लांघी नहीं है, जिनसे देश को खतरा पैदा हो। जबसे हिंदुत्व विचारधारा फैली है, थोड़ी बहुत जिहादी विचारधारा भी फैली है, लेकिन इतनी नहीं, जितनी फैल सकती थी। बावजूद इसके कि भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े राजनेता डट कर ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ को चुनावी मुद्दा बनाते हैं। ऐसा करते हैं, यह जानते हुए कि घुसपैठ के कारण मुसलमानों की जनसंख्या बहुत कम बढ़ी है।

भारत को खतरा तब पैदा होगा, जब इस देश के आम मुसलमानों को लगने लगेगा कि उसको दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने का प्रयास हो रहा है। अभी तक संघ प्रमुख ने दिखाया है कि वह अच्छी तरह समझते हैं कि भाईचारा कायम रखने की कितनी आवश्यकता है भारत में। अयोध्या में मंदिर बनने के बाद जब हिंदुत्ववादियों से ‘अब मथुरा, काशी बाकी हैं’ के नारे लगे, तो भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर ढूंढ़ना बंद किया जाए। अभी तक उनकी आवाज एक समझदार और अनुभवी व्यक्ति की रही है, इसलिए बहुत अजीब लगी उनकी तीन बच्चे पैदा करने वाली बात।

इस तरह लोगों को डराना गलत भी है और खतरनाक भी। भारत की शक्ति अभी तक इसमें रही है कि जिहादी इस्लाम के दौर में हमारे देश में भाईचारा कायम रहा है, बावजूद दुश्मन देशों से जिहादी आतंकवाद फैलाने की तमाम कोशिशों के। बावजूद इसके भी कि कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कानूनी प्रक्रिया को ताक पर रख कर बुलडोजर चलाए हैं। लोगों के घरों पर बिना उनको किसी अदालत में अपराधी या दंगाई साबित किए। मुझे आपको याद दिलाने की जरूरत नहीं है कि अक्सर जो घर गिराए गए हैं बुलडोजरों से, वे मुसलमानों के रहे हैं। हमको गर्व होना चाहिए कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां सबसे बड़ी आबादी है मुसलमानों की और सबसे ज्यादा बुलडोजर चले हैं, वहां भी भाईचारा आज तक कायम है। भाईचारा भारत की सबसे बड़ी शक्ति है सो जब संघ प्रमुख ही उसको तोड़ने की कोशिश करते दिखते हैं, तो चिंता होने लगती है भारत के भविष्य की।

हमको गर्व होना चाहिए कि भारत न पाकिस्तान है और न बांग्लादेश। और न ही हम उनके रास्ते पर चलना चाहते हैं। हमको नुकसान न तो पाकिस्तान कर सकता है न बांग्लादेश। हमको नुकसान कर सकते हैं सिर्फ अपने लोग और वह भी देश को सुरक्षित रखने के नाम पर।