मारे बीच के ज्यादातर लोग अपना सामान्य जीवन जीते हुए अधिकांश समय साधारण ही होते हैं। एक मानवीय दुनिया के लिहाज से देखें तो क्या अपने आप में यह काफी नहीं होना चाहिए? बेहतरीन बनने की कोशिश और आम चीजें साथ-साथ चलती हैं, लेकिन उनके बीच का रिश्ता थोड़ा अजीब होता है। ‘कभी जीत, कभी हार’ जैसे जुमलों से हम यह मानते हैं कि एक आम दिन, एक आम जिंदगी में घटनाएं औसत दर्जे के आसपास ही घूमती हैं।
सैद्धांतिक तौर पर हम ‘बहुत बुरा नहीं’ और ‘काफी अच्छा’ के बीच के दायरे में खुश रह सकते हैं। फिर भी बहुत से लोगों के लिए जो चीजें आम हैं, उनमें संतोष ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। समाज में इस बात की बहुत चर्चा होती है कि ‘यह तो कमाल है! यह तो जीनियस है!’ नतीजतन, ‘दो-सितारा अनुभव’ के लिए कोई जगह ही नहीं बचती। साधारण बने रहना पीछे हटने जैसा महसूस होता है। हममें से बहुत से लोग उस जाल में फंसे हुए हैं, जिसे ‘महानता की सोच’ कहते हैं।
महान बनने की जिद की शुरुआत इस बात की एक सार्थक प्रतिक्रिया के तौर पर होती है कि जिंदगी अधूरी है, लेकिन सिर्फ आंकड़ों के हिसाब से असाधारण या महान चीजें बहुत कम होती हैं। याद रखना चाहिए कि श्रेष्ठता को प्रकृति ने तय किया है, समाज ने नहीं। उत्कृष्टता एक पैमाना है। हम जितने बेहतर होते जाते हैं, हमें उतना ही और बेहतर बनने की जरूरत पड़ती है। एक साधारण जिंदगी भी अपने आप में मूल्यवान और सार्थक होती है। सवाल है कि असाधारण या महान बनने की चाहत की जगह हम पर्याप्त रूप से अच्छा बनने का लक्ष्य क्यों न बनाएं। असाधारण होने से साधारण होना ज्यादा मुश्किल है।
जिंदगी उन चीजों से आकार लेती है, जिन्हें हम आखिरकार भूल जाएंगे। हम इस बारे में बहुत ज्यादा सोचना बंद कर दें कि हम कैसे दिखते हैं, हम कितने उत्पादक हैं, या लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं। हम जैसे हैं, वैसे ही बनने की कोशिश करेंगे, तो आप ही महान बन जाएंगे। साधारण होना महानता को कम नहीं आंकना है। मानवता अपने महान वैज्ञानिकों, कार्यकर्ताओं, आविष्कारकों और कलाकारों की बहुत ऋणी है। यह सोच कर देखा जा सकता है कि आइंस्टीन की सापेक्षता या न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण के बगैर हम कितने अज्ञानी होते, प्लेटो के आदर्शवाद या पिकासो के क्यूबिज्म के बगैर हम कितने प्रेरणाहीन होते, मंडेला की बराबरी और न्याय की लड़ाई के बगैर दुनिया कितनी अमानवीय होती, और एडिसन के सभी आविष्कारों के बिना हमारी जिंदगी कितनी अविकसित और आधुनिकता से दूर होती।
जब हम महानता को अपने जीवन का सबसे बड़ा मिशन और लक्ष्य बनाते हैं, तो क्या हमें सच में पता होता है कि इसका क्या मतलब है और महान बनने के लिए क्या करना पड़ता है? और इससे जुड़ी सभी कीमतों, त्याग और जोखिमों के बारे में क्या हमें पूरी जानकारी होती है? अगर वहां तक पहुंचने की कीमत कई सालों तक अपना निजी समय या अपनी सेहत की कुर्बानी देना हो, अगर वहां पहुंचने या न पहुंचने की बात लंबे समय तक किसी को पता न चले और कोई चर्चा न हो, अगर वहां पहुंचने के बाद हम लोकप्रिय होने के बजाय भीड़ से अलग-थलग पड़ जाएं, तो क्या हम फिर भी वही काम उसी जोश और पक्के इरादे के साथ करेंगे? कितने लोग अगला नेल्सन मंडेला बनना पसंद करेंगे, अगर उन्हें भी उनकी तरह अगले सत्ताईस साल जेल में बिताने पड़ें? क्या मशहूर हस्तियों की महानता का बहुत ज्यादा जश्न मनाकर हम महानता के उन दूसरे, अनदेखे, लेकिन उतने ही अहम रूपों को नजरअंदाज तो नहीं कर रहे, जो आम लोगों (वही लोग जिनकी जिंदगी बोरियत से भरी लगती है!) में भी हो सकते हैं। हम महान होने को मशहूर, चर्चित और सार्वजनिक रूप से सराहे जाने से जोड़कर शायद गलती करते हैं।
दरअसल, हम महान होने को बस ‘होने’ (अस्तित्व) से अलग कर देते हैं। हमें महानता के उस विचार के पीछे भागना छोड़ देना चाहिए, जो अक्सर हमारा अपना नहीं होता। हमें लगा था कि महानता पाना आसान होगा। दूसरों के लिए तो यह आसान रहा, लेकिन सोशल मीडिया के अलावा हम दूसरों के बारे में क्या जानते हैं? जब हमें एहसास होता है कि हमने खुद को महानता के एक झूठे विचार या चक्र में फंसा लिया है, तो हम अक्सर सच्चाई को मानने से इनकार करते हैं।
यह संभव है कि हम सफलता पा लें, उम्मीदों पर खरे उतरें। हो सकता है कि हमें पदोन्नति मिले, पुरस्कार मिले, खूब पैसे कमाएं या चर्चा में आएं, लेकिन उस समय असल में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अंदर ही अंदर अपनी सफलता के चरम पर भी हम जानते हैं कि हमने इतने लंबे समय तक एक ऐसे मकसद के लिए लड़ाई लड़ी, जो हमारा अपना था ही नहीं। ऐसा बेजान रोबोट नहीं बनना चाहिए, जो किसी ऐसे एजंडे पर काम कर रहा हो और जिसे चुनने के लिए हमें मजबूर किया गया हो, जिसे छोड़ने की हिम्मत हम न जुटा पाए हों। अपनी महानता खुद बनाएं, भले ही बाहर की दुनिया के लिए वह कितनी भी मामूली या अनदेखी क्यों न हो। इसे इसलिए बनाना चाहिए, ताकि जब भी हम आईना देखें, तो हमें अपनी आत्मा जिंदा और उजली दिखाई दे।
