सप्ताह का स्थायी राग ‘महायुद्ध’- एक ओर ‘महाबली’ और ‘बाहुबली’ का ‘ दन दनादन’ तो दूसरी ओर ‘धर्मबली’ का भी ‘दन दनादन!’ युद्ध को बढ़ता देख रसोई गैस सिलेंडर… तेल की किल्लत… लाइनें ही लाइनें… नोटबंदी वाला हाल, कोविड वाला हाल का शोर..! सत्ता का जवाब- तेल पर्याप्त… गैस की किल्लत नहीं… जनता घबराए नहीं… अतिरिक्त खरीद न करे। फिर भी जनता के बीच घबराहट फैलती रही!
स्थानीय चुनावी युद्ध-चैनलों पर केरल के मुख्यमंत्री के साक्षात्कार पर साक्षात्कार और सबमें एक ही मजेदार पंक्ति कि कांग्रेस भाजपा की ‘बी टीम’… कांग्रेस भाजपा की ‘बी टीम’..! कांग्रेस का तुरंत पलटवार कि माकपा भाजपा की ‘बी टीम’… माकपा भाजपा की ‘बी टीम’! भाजपा का मुफ्त का प्रचार… मुफ्त की मौज..!
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप की जांच करने वाले बंदे ‘राबर्ट म्यूलर’ का निधन और ट्रंप की ये ‘शोक श्रद्धांजलि’ कि अच्छा हुआ जो मर गया। आप रोते रहें कि ये कैसी निर्ममता! लेकिन यही ट्रंप की ‘यूएसपी’ है। यही बिकती है। ‘कोई घड़ियाली आंसू नहीं’ और ‘कोई भावनात्मक अत्याचार नहीं’। सब कुछ दो टूक और बंटाधार।
आप उनके ऐसे ‘दो टूक’ गिनते जाइए। वही कह सकते हैं कि हमने ईरान को नेस्तनाबूद कर दिया… उसकी वायुसेना नष्ट… उसकी नौसेना नष्ट… परमाणु भंडार नष्ट… बिजली नष्ट… बड़े नेताओं की सारी टीम नष्ट..! तिस पर भी धमकी पर धमकी कि हम हैं दुनिया की सबसे बड़ी ताकत। ताकत ही शांति लाती है। वही कि ‘क्षमा शोभती उस भुजंग को…’। फिर धमकी कि अगर ईरान ने दो दिन में हथियार नहीं डाले, तो उसे मिटा दूंगा… कि मैं चाहूं तो दो सेकंड में लड़ाई खत्म कर दूं… फिर अचानक पांच दिन का विराम। फिर चेतावनी कि ईरान या तो मान जाओ या नेस्तनाबूद होने को तैयार रहो।
युद्ध को लेकर सरकार की सर्वदलीय बैठक। बैठक के बाद फिर विपक्ष की वही शिकायत कि प्रधानमंत्री क्यों नहीं आए! आते तो जवाब देना पड़ता। विपक्ष के सवालों से डर गए। फिर वही राग ‘समझौता-समझौता’…, ‘कमजोर प्रधानमंत्री’।
सत्तापक्ष का जवाबी हमला कि विपक्ष के नेता क्यों नहीं आए! बहरहाल, जैसे ही खबर आई कि सोनिया गांधी बीमार और राहुल अपनी माताजी के साथ अस्पताल में… यह मुद्दा दाखिल दफ्तर! इसी बीच भाजपा की ‘बल्ले-बल्ले’ वाली खबर कि मोदी ने सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री के पद पर बने रहने का कीर्तिमान कायम किया।
फिर एक दिन खबरों में हल्ला रहा कि अमेरिका ईरान में पंद्रह सूत्री समझौता होने वाला है… कि समझौते का दस्तावेज तैयार कराने में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका। अचानक विपक्ष का ‘भारत गर्व’ जागृत। विपक्ष के एक नेता कहिन- भारत की कूटनीति दुनिया में एक मजाक बनकर रह गई है। एक विपक्षी प्रवक्ता कहिन कि पाकिस्तान चौधरी बना है। इसमें हम कहां? विपक्ष के एक नेता का कटाक्ष कि हमारी ‘कूटनीति कंप्रोमाइज्ड… इंडिया कंप्रोमाइज्ड’। वे कहें कि पाकिस्तान से युद्ध बंद कर, तो ‘जी हजूर’… अब ये कर, तो ‘जी हजूर’… वो कर, तो ‘जी हजूर’!
विपक्ष के एक प्रवक्ता की चुटकी- इसमें अपने ‘विश्वगुरु’ कहां हैं? जवाब में विदेश मंत्री का दो टूक- ‘हम कोई ‘दलाल’ राष्ट्र नहीं हैं!’ फिर ईरान का खंडन कि किसी समझौते की बात नहीं… पाक की कोई भूमिका नहीं! फिर ट्रंप की कैबिनेट बैठक और लंबे सीधे प्रसारण के तहत मीडिया को संबोधित करना… धमकी पर धमकी… कि मैंने ईरान की जान बख्श दी, वरना ‘परमाणु तबाही’ तय थी। ईरान ‘डील’ की भीख मांग रहा है… ईरान हार चुका है… खार्ग द्वीप पर लड़ाके उतारेंगे… ‘नाटो’ ने कुछ नहीं किया…. ईरान खत्म हो चुका है… हम उसकी जमीन पर आजादी से टहल रहे हैं… हम एक बहुत बड़ी जीत हासिल करने जा रहे हैं।
उधर ईरान का भी ताल ठोंक एलान कि हम उनका ‘इंतजार’ कर रहे हैं! इसी बीच ट्रंप द्वारा ईरान के भेजे कथित ‘तोहफे’ की खबर एक चैनल ने खोली कि पाकिस्तान ने अपने झंडे लगाकर अमेरिका के दस जंगी जहाजों को होर्मुज से निकलने में मदद की। इस खबर ने पाक की पोल तो खोली ही, अमेरिका की दुर्जेयता की पोल भी खोल दी। जोश में होश कहां?
फिर शुक्रवार को एक खबर कि ‘पूर्णबंदी’ नहीं होगी! बहरहाल, ‘धुरंधर 2’ को दो दिन में तीन सौ करोड़ मिले। उधर विपक्ष ने कहा- यह भाजपा का प्रोप्रेगेंडा है… यह तनाव बढ़ाने वाली फिल्म है… यह मोदी का प्रचार है। किसी को कुछ मिले, इसे देख कर कोई अफसोस में हाथ मले और फिर जले तो कोई क्या करे?
एक एंकर विपक्ष के एक नेता से- आपने फिल्म देखी भी है या यों ही बोल रहे हैं श्रीमान! जो हुआ है ‘धुरंधर 2’ ने वही दिखाया है..। विपक्षी धड़े के नेता ने कहा कि न देखी है, न देखेंगे, फिर भी विरोध जताएंगे, क्योंकि हम विपक्ष हैं। एक सत्तापक्ष के नेता कहिन- कोई बात नहीं, विपक्ष की हताशा, तो निकल रही है। उधर धुरंधर, इधर धुरंधर! वे गंवा रहे! ये कमा रहे।
