Jobs in Service Sector: अर्थव्यवस्था के मुख्य रूप से तीन क्षेत्र होते हैं। पहला प्राथमिक क्षेत्र, जिसके अंतर्गत प्राकृतिक संसाधनों के निष्कर्षण और उत्पादन से संबंधित क्रियाएं होती हैं। जैसे कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वनस्पति और वन उत्पाद और खनन। दूसरा क्षेत्र है जिसमें प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्चे माल से विभिन्न उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इसमें विनिर्माण उद्योग, निर्माण कार्य और बिजली उत्पादन जैसी गतिविधियों को सम्मिलित किया जाता है।
अर्थव्यवस्था का तीसरा क्षेत्र सेवाओं से संबंधित है। इसमें व्यापार और वाणिज्य, साजो-समान परिवहन, संचार, शिक्षा और स्वास्थ्य, वित्त, बीमा, पर्यटन तथा आतिथ्य से जुड़ी सेवाओं को शामिल किया जाता है। इन तीनों क्षेत्रों का एक दूसरे से गहरा संबंध है और ये मिल कर देश की अर्थव्यवस्था को आकार देते हैं। रोजगार की दृष्टि से भी ये तीनों क्षेत्र महत्त्वपूर्ण हैं।
भारत का सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। इसमें पर्याप्त रोजगार भी उपलब्ध हुए हैं, लेकिन इनमें गुणवत्ता वाले रोजगार की कमी बनी हुई है। सेवा क्षेत्र लगभग 18.8 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है, जो कुल कार्यबल का लगभग 30 फीसद है। नीति आयोग की एक नई रपट के अनुसार, वर्ष 2023-2024 में सेवा क्षेत्र में रोजगार बढ़ कर 29.7 फीसद हो गया, जो वर्ष 2011-12 में 26.9 फीसद था। इस दौरान लगभग चार करोड़ नौकरियां जुड़ीं जो वैश्विक औसत 50 फीसद से काफी कम है।
इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कृषि और सेवा क्षेत्र की बढ़त अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में धीमी रही है। जाहिर है कि सामाजिक सुरक्षा, असंगठित क्षेत्र के पंजीकरण और औपचारिक सेवाओं के विस्तार पर जोर देना होगा। भारत सरकार ने सेवा क्षेत्र को अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा क्षेत्र मानते हुए इसे बढ़ावा देने वास्ते कई महत्त्वपूर्ण प्रयास किए हैं। ‘डिजिटल इंडिया अभियान’ के अंतर्गत कई सरकारी सेवाओं को आनलाइन किया गया है।
डिजिटल भुगतान और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा का विस्तार करने के लिए कदम उठाए गए। ‘स्टार्टअप इंडिया योजना’ के अंतर्गत नए उद्यमों को करों में छूट और पंजीकरण प्रक्रिया को आसान किया गया है। जो कंपनियां नवाचार और सेवा आधारित कार्यों को प्रोत्साहन देती हैं, उनको कई राहत और प्रोत्साहन देने की घोषणाएं की है। ‘मेक इन इंडिया अभियान’ के अंतर्गत विनिर्माण के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यटन और आतिथ्य जैसे सेवा क्षेत्रों को बढ़ावा देने के उपाय किए गए हैं।
इसके अलावा, ‘स्किल इंडिया मिशन’ के माध्यम से युवाओं को तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण देकर सेवा क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने की योजनाएं बनाई गई हैं। साथ ही पर्यटन स्थलों का विकास और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास किए गए हैं। होटल और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर कोशिश जारी हैं। आइटी और बीपीओ क्षेत्र को प्रोत्साहन, साफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क की स्थापना, सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों को कर रियायतें और सेवा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बनाई गई हैं।
सरकार ने वित्तीय समावेशन योजनाओं के अंतर्गत बैंकिंग सेवाओं का विस्तार और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के भी उपाय किए हैं। हकीकत यह है कि सरकारी प्रोत्साहनों और प्रयासों के बावजूद सेवा क्षेत्र की अधिकांश नौकरियां और सेवाएं अभी भी कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों जैसे व्यापार और परिवहन में केंद्रित है, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, स्वास्थ्य और व्यावसायिक सेवाएं अधिक मूल्य सृजन तो करती हैं, लेकिन इनमें रोजगार के अवसर सीमित हैं। नीति आयोग के अनुसार, सेवा क्षेत्र अब भारत की आर्थिक वृद्धि की रीढ़ बन गया है। हालांकि, ग्रामीण और शहरी असमानताएं अभी भी बनी हुई हैं।
गुणवत्ता वाला रोजगार वह होता है, जिसमें काम के बदले पर्याप्त आय मिले, जो जीवनयापन की जरूरतों को पूरा करे। यह समय पर भी मिले। शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित कार्यस्थल हो जो स्वास्थ्य जोखिम एवं भेदभाव जैसे उत्पीड़न तथा असुरक्षित कार्य से मुक्त हो। चिकित्सा बीमा, पेंशन, भविष्य निधि, मातृत्व लाभ और वेतन सहित छुट्टियां जैसी सुविधाएं मिलें। व्यक्ति के कौशल विकास, प्रशिक्षण, पदोन्नति और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध हों। यदि हम इन मापदंडों के आधार पर सेवा क्षेत्र का मूल्यांकन करें, तो पाते हैं कि अधिकांश सेवा क्षेत्र उपक्रमों में इन आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जाता।
सेवा क्षेत्र में रोजगार की गुणवत्ता की दृष्टि से अधिकांश सेवा क्षेत्र उपक्रमों में असमानता है और गुणवत्ता की शर्ते लागू नहीं होतीं। इसमें अधिकांश रोजगार अनौपचारिक और कम वेतन वाले हैं। सेवा क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की भागीदारी कम है।
सेवा क्षेत्र में रोजगार की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। इसके लिए व्यावहारिक कार्यक्रमों और नीतियों को लागू करना जरूरी है। इस क्षेत्र की जो गतिविधियां अनौपचारिक क्षेत्र में हैं, उनको औपचारिक क्षेत्र में लाने और कार्यरत व्यक्तियों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास करना जरूरी हैं।
महिलाओं और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए कौशल विकास और डिजिटल माध्यमों की पहुंच बढ़ाना भी आवश्यक है। इसमें निवेश और नवाचार भी बढ़ाने की जरूरत है। इसमें कार्यरत श्रम बल के रोजगार की गुणवत्ता की दृष्टि से कई उपाय किए जा सकते हैं, जिनमें स्व-नियोजित व्यक्ति और सूक्ष्म लघु तथा मध्यम क्षेत्र के उपक्रमों के श्रमिकों के लिए औपचारिक रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू करने, ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल तथा डिजिटल पहुंच पर ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। शहरों में सेवा केंद्रों के माध्यम से संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा दिया जाना भी जरूरी है। इससे रोजगार में गुणवत्ता बनी रह सकती है।
रोजगार गुणवत्ता की दृष्टि से डिजिटल अवसंरचना, नवाचार, वित्त और कौशल को प्राथमिकता, स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर राज्य स्तरीय सेवा रणनीति विकसित करना, संस्थागत क्षमता में सुधार और सेवाओं को औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के साथ संतुलित करना एवं प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए शहरी और क्षेत्रीय सेवा समूहों का विस्तार जैसे उपाय भी किए जा सकते हैं। सेवा क्षेत्र को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों के रोजगार में गुणवत्ता बढ़ाने की दृष्टि से जहां एक तरफ सरकारी उपाय जरूरी है, वहीं इस क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों का कौशल बढ़ाने एवं प्रशिक्षण संस्थानों को कुशल कार्यबल उपलब्ध कराने के लिए गुणवत्ता में सुधार करना जरूरी है।
गुणवत्तापूर्ण रोजगार के लिए जो युवा सेवा क्षेत्र में आना चाहते हैं, उन्हें भी कुछ प्रयास करने होंगे। वे जिस क्षेत्र में जाना चाहते हैं उसमें उन्हें प्रशिक्षण लेना चाहिए। व्यावसायिक अनुभव के लिए अपने क्षेत्र से संबंधित व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। सामूहिक भावना और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और डिजिटल विपणन क्षमता को भी विकसित करने की जरूरत है।
कौशल विकास के लिए सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्र में कई आनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इनमें से जिस क्षेत्र में युवा अपना भविष्य बनाना चाहते हैं, उस क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त करने के लिए व्यावहारिक अनुभव लेने का प्रयास करना चाहिए। दो मत नहीं कि सामूहिक प्रयासों से ही सेवा क्षेत्र में रोजगार की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है।
यह भी पढ़ें: विचार: अक्षय ऊर्जा से पृथ्वी बचाने की दिशा में भारत की बेहतरीन पहल, बदल रहा है भविष्य

प्रदूषण की लगातार बढ़ती समस्या और प्राकृतिक संसाधनों का सीमित होना आज दुनिया की बड़ी चुनौतियों में शामिल है। हर देश और नागरिक इस स्थिति से प्रभावित हैं। वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी चुनौती यह है कि लगातार बढ़ते प्रदूषण को कैसे रोका जाए, क्योंकि यह प्रतिवर्ष लाखों लोगों की जान ले रहा है। पढ़िए पूरी खबर…
