दुनिया में अस्थिरता के साथ रक्षा संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर भारत को भी तेज विकास के साथ बहुआयामी स्तर पर रक्षा के मोर्चे मजबूत करने होंगे। हाल ही में प्रधानमंत्री ने देश में निर्मित तीन नौसैनिक जहाजों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि देश में शांति और विकास के लिए सुरक्षा मजबूत करना आवश्यक है। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कुछ पड़ोसी देशों से मिल रही चुनौतियों के बीच दुनिया में भारत के प्रति आर्थिक भरोसा बढ़ रहा है। यहां विदेशी निवेश बढ़ रहा है और नए व्यापार समझौते आकार ले रहे हैं। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे समय में अब भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आर्थिक विकास के साथ-साथ आधुनिक रक्षा प्रणाली के मामलेमें भी खुद को सुदृढ़ करना होगा।
इस परिप्रेक्ष्य में हाल में जारी दो रिपोर्ट उल्लेखनीय हैं। विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.6 फीसद होगी और उभरते हुए देशों में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। दूसरी ओर दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली ग्लोबल संस्था ‘स्टाकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (सिपरी) की परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत परमाणु हथियार के मोर्चे पर बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रक्षा बजट के मामले में भारत दुनिया में पांचवें क्रम पर है। जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु हथियार थे। इनमें से बारह परमाणु बमों को मिसाइल, पनडुब्बी और लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ दिया गया है। साथ ही उन्हें संचालन अड्डे पर तैनात किया गया है। स्पष्ट है कि परमाणु हथियारों को अलग रखने की भारत की दशकों पुरानी नीति अब बदल गई है।
लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि शांति के समय भारत अपने परमाणु हथियारों को तैनात ‘लांचर’ से अलग रखता है। हालिया कदमों से संकेत मिलता है कि भारत शांति के समय में भी अपने कुछ हथियारों को ‘लांचर’ के साथ जोड़ने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि भारतीय युद्धपोत, पनडुब्बी और दूसरे हथियारों में परमाणु हथियार हमेशा तैनात रहते हैं। वस्तुत: चीन और पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए रक्षा तैयारी रणनीति के तहत यह एक असाधारण बदलाव है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और रक्षा व्यय से संबंधित ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में भारत रणनीतिक रूप से आर्थिक मजबूती के साथ रक्षा व्यय बढ़ाने वाले प्रमुख देश के रूप में उभर रहा है। निश्चित रूप से ऐसे समय में जब देश की सीमाएं भू-राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर पहले से अधिक असुरक्षित और संवेदनशील हो गई हैं, तब भारत को न केवल दुनिया की आर्थिक शक्ति, बल्कि उन्नत परमाणु हथियारों से सुसज्जित सैन्य शक्ति बनने की जरूरत दिखाई दे रही है। स्पष्ट है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान आधुनिक चीनी हथियारों से भारत में घुसपैठ को बढ़ावा दे रहा है। इन दिनों ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता प्रयासों से उसकी निकटता बढ़ी है। चीन की ओर से भी सीमा पर भारत के संप्रभु इलाकों में चुनौती देने वाली गतिविधियां बढ़ी हैं। यह चिंता की बात है कि चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा ( एलएसी और विशेष रूप से काराकोरम दर्रे के पास भी चुनौतियां पैदा कर रहा है। पिछले दिनों उसने शरारत पूर्ण तरीके से अक्साई चीन में नया ‘प्रशासनिक क्षेत्र’ बनाया है। चीन हिंद महासागर में ‘स्ट्रिंग आफ पर्ल्स’ नीति के जरिए भी भारत को चुनौती दे रहा है। पिछले वर्ष पाकिस्तान को पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देने के मद्देनजर जब ‘आपरेशन सिंदूर’ चलाया गया था, तब पाकिस्तान का साथ देने के लिए चीन, तुर्किये और अजरबैजान का खतरनाक गठजोड़ सामने आया था। चीन ने पाकिस्तान को उपग्रह के जरिए खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी। अब पाकिस्तान द्वारा चीन के सहयोग से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हथियार विकसित किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं उसने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता भी किया है।
पिछले दिनों अमेरिकी खुफिया संस्थान की ‘एनुअल थ्रेट असेसमेंट’ रिपोर्ट 2026 में कहा गया है कि इस समय पाकिस्तान द्वारा किया जा रहा परमाणु और पारंपरिक हथियारों का विस्तार भारत सहित दक्षिण एशिया के लिए बड़ा खतरा बन गया है। मगर आर्थिक और रक्षा विकास की नई रणनीति के तहत भारत आर्थिक और सामरिक रूप से मजबूती आगे बढ़ रहा है। भारत ने आतंकवाद के प्रति कठोर नीति अपनाई है। पूरी दुनिया ने देखा है कि पिछले वर्ष आपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। वस्तुत: सैन्य अभियान के तहत भारत ने एआइ के उपयोग से पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर मिसाल पेश की है। तेज आर्थिक विकास के साथ युद्ध के लिए अर्थव्यवस्था को तैयार करने और मजबूत सैन्य शक्ति बनने के लिए भारत को रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ना होगा।
इस समय मजबूत घरेलू बाजार, पूंजीगत व्यय, रेकार्ड खाद्यान्न उत्पादन और विदेशी मुद्रा भंडार देश की शक्ति है। साथ ही ये सभी कारक भारत को बाहरी आर्थिक झटकों से बचा रहे हैं। मगर अभी देश को तीसरी बड़ी आर्थिकी बनाने के लिए रफ्तार से बढ़ना होगा। युवाओं को देश की शक्ति बनाना होगा। हमें युद्ध पर आधारित ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में भी तैयार होना होगा, जहां जरूरत पड़ने पर तेजी से औद्योगिक और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए युद्ध सामग्री का निर्माण हो सके। सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से रक्षा इकाइयों को तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों के साथ जोड़ कर सैन्य साजो-सामान को अत्याधुनिक बनाने में भी तेजी से आगे बढ़ना होगा। देश में साइबर और सूचना क्षमताओं का विस्तार करना होगा। क्योंकि अब युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़े जाते, बल्कि ये आधुनिक चिप से निर्मित मिसाइलों व उन्नत ड्रोन के इस्तेमाल से हवा, समुद्र तथा अंतरिक्ष में भी लड़े जाते हैं।
भारत को हाइपरसोनिक मिसाइलों के साथ एआइ की नई क्षमताओं के साथ आगे बढ़ना होगा। इस परिप्रेक्ष्य में भारत की हाल की उपलब्धियां दुनिया भर में रेखांकित की जा रही हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत रूस के बाद व्यावसायिक ‘फास्ट ब्रीडर रिएक्टर’ संचालित करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है। इससे देश दुनिया की परमाणु महाशक्ति के रूप में उभरेगा। भारत ने पिछले एक दशक में रक्षा उपकरणों के सबसे बड़े आयातक से निर्यातक के रूप में खुद को बदला है। पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 38424 करोड़ रुपए का रेकार्ड रक्षा निर्यात किया है। मगर अभी भी रक्षा मजबूती के लिए मीलों चलना बाकी है। ‘मेक-इन-इंडिया’ के तहत आधुनिक हथियारों का मजबूती से स्वदेशीकरण होगा। भारत को सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण के साथ साइबर तकनीक और आधुनिक मिसाइलों से सुसज्जित होना होगा। उम्मीद है देश आर्थिक विकास के साथ परमाणु हथियार मोर्चे पर भी तेजी से आगे बढ़ेगा।
