उत्तर प्रदेश में युवाओं की बात अब केवल योजनाओं या घोषणाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह जमीन पर दिखने वाले बदलाव का विषय बन चुकी है। बीते 9 वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में एक ऐसा ढांचा खड़ा होता दिख रहा है, जहां मैदान भी है, मेरिट को जगह भी है और आगे बढ़ने के मौके भी लगातार बढ़े हैं।

यह बदलाव किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। खेल के मैदान गांवों तक पहुंचे हैं, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आई है, और युवाओं को सामाजिक व राष्ट्रीय गतिविधियों से जोड़ने की संगठित कोशिश हुई है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में अब युवा केवल अवसर खोजने वाला वर्ग नहीं, बल्कि अवसरों का उपयोग कर आगे बढ़ने वाला वर्ग बनता दिखाई दे रहा है।

ग्रामीण मैदान से तैयार हो रही नई पीढ़ी

योगी सरकार ने यह समझा कि प्रतिभा केवल शहरों तक सीमित नहीं होती, बल्कि गांवों में भी उतनी ही क्षमता मौजूद है। इसी सोच के तहत प्रदेश में ग्रामीण स्तर पर खेल अवसंरचना विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। आज प्रदेश में 125 ग्रामीण स्टेडियम बनकर तैयार हो चुके हैं और 39 स्टेडियमों पर कार्य प्रगति पर है। 117 विकास खंड इनसे आच्छादित हो चुके हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में दो-दो स्टेडियम बनाकर सुविधाओं को और मजबूत किया गया है।

इन स्टेडियमों को सक्रिय बनाए रखने के लिए खेल उपकरणों की व्यवस्था और प्रशिक्षकों की तैनाती भी सुनिश्चित की गई है। इससे ग्रामीण युवाओं को अपने ही क्षेत्र में अभ्यास और प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है, जो पहले बड़े शहरों तक सीमित था।

युवा सहभागिता से सामाजिक ऊर्जा का निर्माण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में युवाओं को केवल खेल तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ने का भी प्रयास किया गया है। प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में 53,760 युवक मंगल दल और 52,354 महिला मंगल दल गठित किए जा चुके हैं।

इन दलों के माध्यम से युवाओं को स्वच्छता, वृक्षारोपण, नशामुक्ति और रक्तदान जैसी गतिविधियों में भागीदारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 96,000 से अधिक मंगल दलों को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा चुकी है। इससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो रही है।

पारदर्शी भर्ती से बढ़ा युवाओं का भरोसा

योगी सरकार के कार्यकाल में रोजगार के क्षेत्र में पारदर्शिता और निष्पक्षता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। विभिन्न आयोगों और भर्ती बोर्डों के माध्यम से 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं। भर्ती प्रक्रिया को सरल और निष्पक्ष बनाने के लिए समूह ‘ख’ और ‘ग’ पदों पर साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त की गई, एकल अवसरीय पंजीकरण (OTR) लागू किया गया और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया गया।

PET की वैधता तीन वर्ष तक बढ़ाना और आरक्षण के मानकों का पालन सुनिश्चित करना यह दर्शाता है कि व्यवस्था को अभ्यर्थियों के अनुकूल बनाया गया है। इन सुधारों ने युवाओं के बीच यह भरोसा मजबूत किया है कि अवसर अब पारदर्शी और योग्यता आधारित हैं।

खेल और रोजगार के बीच मजबूत संबंध

योगी आदित्यनाथ सरकार ने खेल को केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि करियर और रोजगार के अवसर के रूप में भी विकसित किया है। “एक मंडल – एक स्पोर्ट्स कॉलेज” की परिकल्पना और मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इतना ही नहीं, राज्य खेल नीति-2023 के तहत खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने पर करोड़ों रुपये के पुरस्कार दिए जा रहे हैं।

इसके साथ ही खिलाड़ियों को सरकारी सेवाओं में अवसर प्रदान करने की प्रक्रिया भी जारी है। “एक जनपद एक खेल” योजना के तहत प्रशिक्षकों को मानदेय और खिलाड़ियों को आवश्यक किट उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे प्रतिभाओं को संसाधनों के अभाव में पीछे न रहना पड़े।

डिजिटल माध्यम से अवसरों की पहुंच

योगी सरकार ने युवाओं को योजनाओं से जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी प्रभावी उपयोग किया है। “माय भारत” पोर्टल पर 19 लाख से अधिक युवाओं का पंजीकरण हो चुका है, जबकि “युवा साथी” पोर्टल के माध्यम से 12 लाख से अधिक युवाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। यह पहल युवाओं को केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सक्रिय भागीदारी और अवसरों तक पहुंच के लिए सक्षम बनाती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार से बढ़ती संभावनाएं

योगी सरकार के कार्यकाल में खेल अवसंरचना का भी व्यापक विस्तार हुआ है। गोरखपुर और वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियमों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा बहुउद्देशीय क्रीड़ा हॉल, स्विमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। एकलव्य क्रीड़ा कोष की स्थापना और खिलाड़ियों को किट वितरण जैसी पहलें यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रतिभाओं को हर स्तर पर सहयोग मिले। वर्ष 2025-26 में 789 खिलाड़ियों को किट वितरित किया जाना इसका उदाहरण है।

नीतियां स्पष्ट हों तो केवल कागजों तक सीमित नहीं रहता बदलाव

उत्तर प्रदेश में युवाओं को लेकर जो परिवर्तन दिखाई दे रहा है, वह अलग-अलग पहलों का परिणाम भर नहीं है, बल्कि एक ऐसे दृष्टिकोण का संकेत है जिसमें मैदान, मेरिट और मौके एक साथ जुड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बना यह ढांचा यह दिखाता है कि जब नीतियां स्पष्ट हों, क्रियान्वयन निरंतर हो और प्राथमिकता युवा हों, तो बदलाव केवल कागजों तक सीमित नहीं रहता।

आज प्रदेश का युवा केवल प्रतिस्पर्धा में शामिल नहीं है, बल्कि बेहतर तैयारी, संसाधनों और अवसरों के साथ आगे बढ़ रहा है। यही बदलाव आगे चलकर उत्तर प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक और खेल पहचान को नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

(लेखक आईआईटी कानपुर के पुराछात्र अमिताभ सत्यम ने अमेरिका के Fisher Collge of Business से MBA की शिक्षा हासिल की है। अमेरिका में Shearson Lehman Brothers और CableVision में काम किया और भारत में IBM, Reliance, SAP और Siemens में उच्च पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने भारतीय खेलों पर आधारित एक मशहूर किताब लिखी है जिसका नाम ‘The Games India Plays’ है।)

डिस्क्लेमर: इस लेख में लेखक के निजी विचार हैं। जनसत्ता का इनसे सहमत होना जरूरी नहीं है।